एवलांच के बाद ग्लेशियर फटने से भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में मलबा और पानी आई, जिससे नेपाल के रासुवा जिले में बाढ़ आ गई. यह बाढ़ रासुवा जिले की करीब 25 बस्तियों को बहाकर ले गई. लोगों के घर, दुकानें, होटल, सड़कें, पुल, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट सब पानी और मलबे के साथ बह गए. वहीं भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आया मलबा और पानी उत्तर प्रदेश-बिहार के बीचों-बीच बहने वाली गंडक नदी में पहुंचने लगा है, जिससे यह नदी उफान पर बह रही है. इस वजह से उत्तर प्रदेश और बिहार के नदी से सटे इलाकों में बाढ़ आने का खतरा पैदा हो गया है. हालांकि एहतियाती कदम उठाकर बाढ़ आने का खतरा कम कर दिया गया है, लेकिन इन इलाकों में हाई अलर्ट रहेगा.
गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोले गए
लेकिन अगर भारी बारिश हुई और फिर से भूस्खलन हुआ तो ग्लेशियर में बचा पानी बाहर निकलेगा और नदियों में ज्यादा उफान आएगा, जिसके चलते उत्तर प्रदेश के साथ-साथ बिहार में बाढ़ आ सकती है. गंडक नदी में उफान को देखते हुए एहतियातन वाल्मीकि नगर में गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर जिलों, बिहार के उत्तरवर्ती और सीमावर्ती इलाकों में हाई अलर्ट लागू कर दिया है और कंट्रोल रूम से गंडक नदी के जलस्तर की निगरानी की जा रही है. केंद्र और राज्य सरकारों ने NDRF की टीमों को स्टैंडबॉय मोड में रखा हुआ है. नदी किनारे रहने वाले लोगों को ऊंचे इलाकों पर भेज दिया गया है.
आज सुबह गंडक नदी का जलस्तर घटा
UP सरकार की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार, नेपाल में बाढ़ आने के बाद 26 अगस्त की रात को 11 बजे तक गंडक नदी का जलस्तर 150200 क्यूसेक के हाई लेवल तक पहुंच गया. इसके बाद जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की गई, लेकिन बीती रात देवघाट में देर रात हुई बारिश के कारण गंडक नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है. वाल्मीकि नगर गंडक बैराज पर 27 अगस्त की सुबह 8 बजे तक जल प्रवाह घटकर लगभग 99800 क्यूसेक रह गया था. नेपाल की त्रिशुली नदी में बढ़ा हुआ जल नारायणी नदी के रास्ते आगे बढ़ गया है. इसलिए गंडक नदी में बाढ़ आने की संभावना फिलहाल कम हो गई है. बावजूद इसके उत्तर प्रदेश और बिहार में हाई अलर्ट कुछ दिन लागू रहेगा.
लोगों को अफवाहों से बचने की अपील
नेपाल के फ्लड फोरकास्टिंग डिवीजन के अनुसार, रासुवा या नुवाकोट में अब कोई आपदा आने की आशंका नहीं है. बारिश के कारण नदियों का जलस्तर थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन किसी खतरे का संकेत नहीं है. लोगों से अपील है कि वे बिना पुष्टि वाली खबरों और अफवाहों पर भरोसा न करें. अगर कोई खतरा पैदा हुआ तो ऑफिशियल चैनलों और SMS अलर्ट से खतरे के बारे में पहले ही बात दिया जाएगा. फिलहाल लोग नदी किनारों को छोड़कर ऊंचे इलाकों में चले जाएं और सुरक्षित रहें.