संसद का मानसून सत्र आज अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया. 12 बिल दोनों सदनों से पास हुए, लेकिन चर्चा और उत्पादकता के मोर्चे पर तस्वीर कमजोर रही. लोकसभा की उत्पादकता सिर्फ 19 फीसदी, जबकि राज्यसभा की 39.17 फीसदी रही. आखिरी दिन लोकसभा महज एक मिनट चली. वहीं, राज्यसभा में करीब एक घंटे तक कार्यवाही हुई, लेकिन हंगामा और सियासी आरोप-प्रत्यारोप आखिरी दिन भी जारी रहे.

वहीं, संसद के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड कई सवाल छोड़ गया है. लोकसभा की 19 बैठकें हुईं. करीब 114 घंटे कार्यवाही होनी थी, लेकिन सदन सिर्फ 17 घंटे 30 मिनट चला. यानी करीब 96 घंटे 30 मिनट का समय काम नहीं हो सका. इस दौरान उत्पादकता सिर्फ 19 फीसदी रही.

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राज्यसभा में भी करीब 114 घंटे काम होना था, लेकिन कार्यवाही लगभग 37 घंटे 20 मिनट ही चली. करीब 76 घंटे 40 मिनट का समय काम नहीं हो सका और 39.17 फीसदी उत्पादकता रही. आखिरी दिन लोकसभा में वंदे मातरम के बाद महज 3 मिनट में कार्यवाही स्थगित हो गई.

सरकार ने पास कराए 12 बिल

विधायी कामकाज की बात करें तो सरकार के खाते में दोनों सदनों से 12 बिल पास हुए. इनमें सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधन रोकथाम, राष्ट्रीय सम्मान, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, सुप्रीम कोर्ट जजों की संख्या, MSME, टैक्सेशन, बैंकर्स बुक्स एविडेंस, ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स, केरल नाम परिवर्तन, NCDC और MMDR संशोधन विधेयक शामिल हैं. लेकिन चर्चा के मोर्चे पर लोकसभा में सिर्फ नकल रोकने वाले विधेयक पर चर्चा हो सकी और आखिरी दिन भी हंगामा खत्म नहीं हुआ. राज्यसभा में MMDR संशोधन बिल पास होने के बाद कार्यवाही स्थगित हुई. इसी दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी में उनके कार्यक्रम के बाद मंच के कथित शुद्धिकरण का मुद्दा उठाया.

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पूरे सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच सबसे बड़ा टकराव जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन को लेकर रहा. गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा की पेशकश की, लेकिन विपक्ष ने इसे स्वीकार नहीं किया. राहुल गांधी ने कहा कि पहले सरकार बताए कि छात्रों पर गोली चलाने का आदेश किसने दिया. यानी सरकार का आरोप है कि हम चर्चा के लिए तैयार थे. विपक्ष का जवाब- पहले सरकार जवाब दे.

11 अगस्त को यही टकराव संसद के मकर द्वार तक पहुंचा था, जहां NDA और इंडिया गठबंधन के सांसद आमने-सामने आ गए थे. सुरक्षा कर्मियों को मोर्चा संभालना पड़ा था.

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राज्यसभा के आंकड़े भी सत्र की तस्वीर बताते हैं. सदस्यों के पास 285 सवाल, 380 शून्यकाल प्रस्ताव और 380 विशेष उल्लेख का मौका था. लेकिन सदन में सिर्फ 16 सवाल, 52 शून्यकाल प्रस्ताव और 93 विशेष उल्लेख ही उठाए जा सके. यानी संसदीय कामकाज के लिए मिले बड़े हिस्से का इस्तेमाल नहीं हो सका. 12 बिल पास हुए, लेकिन बहस सीमित रही. सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध पूरे सत्र पर हावी रहा.

कुल मिलाकर मानसून सत्र का रिपोर्ट कार्ड दो तस्वीरें दिखाता है- 12 बिल पास होने का विधायी कामकाज और कम उत्पादकता का संसदीय रिकॉर्ड. लोकसभा में सिर्फ 19 फीसदी, राज्यसभा में 39.17 फीसदी उत्पादकता. आखिरी दिन लोकसभा सिर्फ एक मिनट चली. सत्र खत्म हुआ है, लेकिन सरकार और विपक्ष के बीच ‘चर्चा बनाम जवाबदेही’ की लड़ाई खत्म नहीं हुई.

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मानसून सत्र आज समाप्त हो गया. विधायी कामकाज के लिहाज से सरकार ने सत्र को सफल बताया, लेकिन चर्चा और बहस के लिहाज से तस्वीर निराशाजनक रही. दोनों सदनों से कुल 12 विधेयक पारित हुए, लेकिन हंगामे और लगातार गतिरोध के चलते संसद की उत्पादकता काफी कम रही.

इस सत्र को दो नजरिए से देखा जा सकता है- बिजनेस और चर्चा. बिजनेस के लिहाज से 12 बिल पास हुए, लेकिन चर्चा के लिहाज से सत्र उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका.

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सरकार ने कांग्रेस के रवैये पर उठाए सवाल

वहीं, सरकार की ओर से कहा गया कि करीब तीन दशक के संसदीय अनुभव में पहली बार ऐसी स्थिति देखने को मिली, जब सरकार चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष चर्चा से दूर रहा. सत्तापक्ष ने कांग्रेस सांसदों के रवैये पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि सदन में नारे लगाना और कार्ड लेकर हंगामा करना ही उनकी प्राथमिकता बन गई है.

कांग्रेस के नए सांसदों को लेकर भी सवाल उठाया गया कि अगर सदन में चर्चा और बहस ही नहीं होगी, तो नए सांसद संसदीय कार्यप्रणाली सीखेंगे कैसे?