टायसन जिंदा है..वो आर्मी डॉग जिसने गोली खाकर भी बताया आतंकियों का ठिकाना, अब मिला वीरता सम्मान

Army Dog Tyson Honoured for Bravery: जब भी वीरता पुरस्कार या सम्मान की बात आती है, तब हमारे जेहन में सेना के जवान या बहादुर बच्चों का चेहरा सामने आता है, लेकिन आर्म्ड फोर्सेस में कुछ स्निफर डॉग भी इस लिस्ट में शामिल हैं.

Army Assault Dog Tyson

Army Assault Dog Tyson (Photo-X)

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Who is Army Assault Dog Tyson: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में एंटी टेरस ऑपरेशन के दौरान अपनी बहादुरी के लिए, 2 पैरा स्पेशल फोर्सेज के साथ काम करने वाले आर्मी असॉल्ट डॉग ‘टायसन’ को ‘मेंशन-इन-डिस्पैचेस’ से सम्मानित किया गया है. इस जर्मन शेफर्ड डॉग ने इस साल की शुरुआत में छतरू इलाके में एक ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों को आतंकियो का पता लगाने में अहम रोल अदा किया था. स्वतंत्रता दिवस सम्मान के तहत अब उसकी बहादुरी को आधिकारिक तौर पर मान्यता दी गई है.

गोली लगने के बावजूद टायसन नहीं रुका

ऑपरेशन के दौरान आर्मी डॉग टायसन को स्पेशल फोर्सेज की टीम से आगे भेजा गया था ताकि उन आतंकवादियों का पता लगाया जा सके जिनके मिट्टी के घर में छिपे होने का शक था. जैसे ही वो उस जगह के पास पहुंचा, आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी और आर्मी डॉग के पैर में गोली लग गई. चोट लगने के बावजूद, टायसन पीछे हटने के बजाय आगे बढ़ता रहा. उसकी हरकत से आतंकवादियों ने और गोलियां चलाईं, जिससे सैनिकों को एक्जैक्ट पोजीशन का पता लगाने में मदद मिली जहां से आतंकवादी फायरिंग कर रहे थे.

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इस जानकारी से सुरक्षा बलों को उनके ठिकाने के करीब पहुंचने और कार्रवाई करने में मदद मिली. बाद में इस ऑपरेशन में जैश-ए-मोहम्मद के 3 आतंकी मारे गए. उनमें से एक की पहचान आतंकवादी संगठन के सीनियर कमांडर सैफुल्ला बलोच के तौर पर हुई. टायसन मुठभेड़ में बच गया और उसकी चोट का इलाज किया गया.

टायसन की क्या है ड्यूटी?

टायसन एक आर्मी असॉल्ट डॉग है जिसे जोखिम भरे मिशन के लिए ट्रेनिंग दी गई है. 2 पैरा स्पेशल फोर्सेज का हिस्सा होने के नाते, उसकी जिम्मेदारियों में खतरों का पता लगाना, छिपे हुए आतंकवादियों को खोजना और मुश्किल इलाकों में सैनिकों को खतरे की पहचान करने में मदद करना शामिल है. मिलिट्री वर्किंग डॉग्स को उनकी सूंघने की बेहतरीन क्षमता, फुर्ती और मुश्किल माहौल में रास्ता खोजने की काबिलियत का इस्तेमाल करने के लिए खास ट्रेनिंग दी जाती है. वो अपने हैंडलर्स के साथ भी मजबूत रिश्ता बनाते हैं.

स्वतंत्रता दिवस पर सम्मान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस स्वतंत्रता दिवस पर 89 ‘मेंशन-इन-डिस्पैचेस’ को मंजूरी दी, जिनमें 75 आर्मी जवान, चार नेवी जवान और 10 एयर फोर्स जवान शामिल हैं. राष्ट्रपति ने 78 वीरता पुरस्कारों को भी मंजूरी दी. टायसन को मिला सम्मान एंटी टेरर ऑपरेशन के दौरान मिलिट्री डॉग्स की अहमियत को बयां करता है.

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बहादुर आर्मी डॉग्स की विरासत

टायसन उन खास मिलिट्री डॉग्स की लिस्ट में शामिल हो गया है जिन्हें उनकी असाधारण बहादुरी के लिए सम्मान मिला है. बेल्जियन मैलिनोइस डॉग्स जूम, फैंटम और एक्सल के साथ-साथ लैब्राडोर केंट और मानसी को भी ऑपरेशन के दौरान उनकी सेवा के लिए सम्मान मिला है. इनमें से कुछ डॉग-हीरोज के उलट, टायसन अपने मिशन में बच गया. गोली लगने के बाद भी, वो आगे बढ़ता रहा और सैनिकों को आतंकवादियों का पता लगाने में मदद की. उसकी कहानी याद दिलाती है कि जंग के मैदान में बहादुरी सिर्फ इंसानी सैनिकों तक ही सीमित नहीं होती. टायसन के योगदान की वजह से उसे भारत की मिलिट्री सर्विस और बहादुरी के ऑफिशियल रिकॉर्ड में जगह मिली है.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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