---विज्ञापन---

देश

1262 किलो प्याज बेचकर भी घाटे में महाराष्ट्र के किसान, मंडी से खाली हाथ लौटा, उल्टा देना पड़ा 1 रुपया!

Maharashtra Farmers: महाराष्ट्र की किसानों की हालत बयां करना एक माममला सामने आया है। एक किसान 1000 किलो प्याज बेचकर भी घाटे में रहा। जितना प्याज बेचा, उतने ही पैसे नहीं मिले। इतना ही नहीं जेब से ही कुछ पैसे भरने पड़े। आइए पूरा मामला जानते हैं...

Author
Written By: Indrajeet Singh Updated: May 9, 2026 14:35
Indian Farmers
Indian Farmers

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले से किसानों की बदहाली की एक बेहद दर्दनाक तस्वीर सामने आई है, जहां एक किसान ने 1262 किलो प्याज मंडी में बेचालेकिन कमाई होने के बजाय उसे उल्टा 1 रुपया अपनी जेब से देना पड़ा। यह मामला अब किसानों की हालत और गिरते कृषि बाजार भाव पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। मामला पैठण तालुका के वरुडी गांव के किसान प्रकाश गलधर से जुड़ा है। प्रकाश गलधर ने करीब तीन महीने तक मेहनत कर प्याज की फसल तैयार की थी।

प्रकाश गलधर को उम्मीद थी कि फसल बिकने के बाद घर का खर्च चलेगा, बच्चों की फीस भरी जाएगी और कुछ कर्ज भी कम होगा, लेकिन मंडी में उन्हें बड़ा झटका लगा। प्रकाश 25 बोरियों में भरकर अपना प्याज कृषि उपज मंडी लेकर पहुंचा। प्याज का कुल वजन निकला 1262 किलो था, लेकिन मंडी में प्याज का भाव मिला सिर्फ 100 रुपए प्रति क्विंटल यानि एक किलो प्याज की कीमत महज 1 रुपया लगी। 1262 किलो प्याज बेचने पर किसान को कुल 1262 रुपए मिले।

---विज्ञापन---

प्रकाश के अनुसार, मंडी तक प्याज पहुंचाने और बिक्री से जुड़े खर्च इससे भी ज्यादा निकले। हमाली के 125 रुपये कट। तौल के 38 रुपये, भराई के 25 रुपये, छंटाई के 25 रुपये, मंडी तक लाने का किराया 500 रुपये और 25 बोरियों का खर्च 550 रुपये, यानी कुल खर्च 1263 रुपये हुआ। इसका मतलब यह हुआ कि किसान को अपनी जेब से 1 रुपया अतिरिक्त देना पड़ा। यह सिर्फ एक किसान की कहानी नहीं, बल्कि उन लाखों किसानों की पीड़ा है, जो महीनों मेहनत करके फसल उगाते हैं, लेकिन बाजार में उन्हें उनकी मेहनत की सही कीमत तक नहीं मिलती।

घटना के बाद एक बार फिर कृषि व्यवस्था, फसल के दाम और किसानों की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं। किसानों का कहना है कि बढ़ती लागत और गिरते बाजार भाव के बीच खेती अब घाटे का सौदा बनती जा रही है। जिस किसान को अपनी मेहनत की फसल बेचकर राहत मिलनी चाहिए थी। उसी किसान को मंडी से घाटा लेकर लौटना पड़ा। छत्रपति संभाजीनगर से सामने आई यह घटना अब किसानों की बदहाल स्थिति की बड़ी तस्वीर बन गई है। आज सवाल सिर्फ 1 रुपये के नुकसान का नहीं है, बल्कि सवाल उस व्यवस्था का है, जहां देश का अन्नदाता अपनी ही मेहनत की सही कीमत पाने के लिए संघर्ष कर रहा है।

---विज्ञापन---
First published on: May 09, 2026 02:33 PM

End of Article
संबंधित खबरें

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.