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भारत का 'साइलेंट विलेज' जहां आधे से ज्यादा लोग ना बोल पाते हैं, ना सुन पाते हैं, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान!

भारत में एक ऐसा अनोखा गांव भी है, जहां सन्नाटा लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले का धड़काई (दधकाई) गांव ‘साइलेंट विलेज’ के नाम से जाना जाता है. यहां बड़ी संख्या में लोग जन्म से सुन और बोल नहीं पाते. वैज्ञानिक इसे जैनेटिक प्रॉब्लम मानते हैं, जबकि गांव के कुछ लोग इसे सालों पुराना अभिशाप मानते हैं.

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Credit: AI

भारत में कई ऐसे गांव हैं जो अपनी अनोखी परंपराओं और रहस्यमयी पहचान की वजह से चर्चा में रहते हैं. इन्हीं में से एक है जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले का धड़काई (दधकाई) गांव, जिसे पूरे देश में ‘साइलेंट विलेज’ के नाम से जाना जाता है. इस गांव की सबसे बड़ी खासियत ये है कि यहां बड़ी संख्या में लोग सुन और बोल नहीं पाते. गांव में रहने वाले कई परिवारों का कम से कम एक सदस्य मूक-बधिर है. यही वजह है कि यहां सामान्य गांवों की तरह बच्चों की आवाजें, बातचीत और शोर-शराबा कम सुनाई देता है. लोग एक-दूसरे से इशारों की भाषा के जरिए संवाद करते हैं.

क्या है मामला?

बताया जाता है कि गांव में मूक-बधिर बच्चों का पहला मामला साल 1901 में सामने आया था. इसके बाद समय के साथ ऐसे मामलों की संख्या बढ़ती गई. आज भी गांव के कई परिवार इस समस्या से प्रभावित हैं. ये किसी श्राप का नहीं बल्कि जेनेटिक कारणों का परिणाम है. वैज्ञानिकों का मानना है कि लंबे समय तक सीमित समुदाय के भीतर विवाह होने से ये जेनेटिक बदलाव पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ता गया. हालांकि गांव के कुछ बुजुर्ग आज भी इसे पुराने अभिशाप से जोड़कर देखते हैं.

कैसे होता है गुजारा?

इस गांव में रहने वाले लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी सामान्य तरीके से जीने की कोशिश करते हैं. खेती, पशुपालन और छोटे-मोटे काम उनकी इनकम का मुख्य साधन हैं. जो लोग सुन और बोल नहीं सकते, वो भी इशारों की भाषा के माध्यम से अपने परिवार और गांव के लोगों के साथ आसानी से संवाद कर लेते हैं. शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी भी यहां की बड़ी चुनौती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि खास शिक्षा और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिलने से मूक-बधिर बच्चों का भविष्य ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सकता है. पिछले कुछ सालों में इस गांव की कहानी देश-दुनिया में चर्चा का विषय बनी है. कई शोधकर्ता और डॉक्टर यहां पहुंचकर स्टडी कर चुके हैं. उनका मकसद इस दुर्लभ जैनेटिक समस्या को समझना और भविष्य में इसके समाधान की दिशा में काम करना है.

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लेखक के बारे में

Varsha Sikri

वर्षा सिकरी News24 हिंदी डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. जर्नलिज्म में 9 साल का अनुभव रखने वाली वर्षा सिकरी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. वर्षा सिकरी ने सितंबर 2017 में इंडिया टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद से उन्होंने रिपब्लिक टीवी, जी न्यूज, आज तक जैसे चैनलों में काम किया. फिलहाल वो News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 9 साल के करियर में वर्षा सिकरी ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. वर्षा सिकरी का पत्रकारिता में अनुभव: 9 साल योग्यता: NRAI स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन करने के बाद वर्षा सिकरी ने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने बतौर एंकर और रिपोर्टर भी काम किया है.
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