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भारतीय सेना की ताकत में बड़ा इजाफा, दुश्मनों की नींद उड़ा देगा रैमजेट इंजन वाला गोला, जानिए क्या है खास?

भारतीय सेना ने वो हथियार बना लिया है जो दुनिया में किसी भी आर्मी के पास अब तक नहीं है. रैमजेट पावर वाले गोला जल्द ही भारतीय सेना में शामिल होने वाला है. ये किस तरह काम करता है और ये कैसे दुश्मनों को तबाह करेगा, पढ़िए इस रिपोर्ट में.

Author Written By: Varsha Sikri Updated: Jan 3, 2026 13:09
INDIAN ARMY
Credit: Social Made

भारतीय सेना की ताकत में एक और बड़ा इजाफा होने जा रहा है, जिसके सामने दुश्मन थर्रथर्र कांपेंगे. इंडियन आर्मी को अब दुश्मन के ठिकानों को नेस्तानबूत करना है तो इसके लिए मिसाइल या ड्रोन नहीं, बल्कि तोप के गोले ही काफी होंगे. भारत ने एक ऐसा हथियार तैयार कर लिया है जो अभी तक किसी भी देश की सेना में शामिल नहीं किया गया है. इंडियन आर्मी जल्द ही 155mm आर्टिलरी के लिए रैमजेट पावर वाले गोले इस्तेमाल करने वाली है.

IIT मद्रास और सेना ने किया विकसित

रैमजेट गोलों को आत्मनिर्भर भारत मुहिम के तहत तैयार किया गया है. इन्हें IIT मद्रास और भारतीय सेना ने मिलकर बनाया है. हाल ही में राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में इन गोलों की शुरुआती फायरिंग टेस्टिंग पूरी हुई. अभी तक तोप से ज्यादा से ज्यादा 40-45Km तक निशाना लगाया जा सकता है, लेकिन रैमजेट इंजन की मदद से तोप के गोले मिसाइल जैसे घातक और सटीक निशाने लगा सकेंगे. ये उनकी मारक क्षमता को 50% तक बढ़ाएगा.

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कैसे काम करेगा रैमजेट इंजन वाला गोला ?

रैमजेट इंजन हवा से ऑक्सीजन लेकर लगातार थ्रस्ट पैदा करता है, जिससे गोला लॉन्च के बाद भी स्पीड बनाए रखता है. इसे किसी कंप्रेसर या टरबाइन की जरूरत नहीं होती. इंजन को शुरू होने के लिए करीब Mach- 2 की स्पीड चाहिए होती है. तोप से फायर किए जाने के बाद हवा कंप्रेस होगी और प्रोपेलेंट के ऑन होने से गर्मी पैदा होगी. थ्रस्ट पैदा होने की वजह से गोला मिसाइल की तरह काम करेगा. रैमजेट पावर वाले गोले 100 किमी तक आसानी से पहुंच सकते हैं.

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आतंकियों के अड्डे गोलों से होंगे तबाह

रैमजेट इंजन वाले गोले को M 777 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर से भी दागा जा सकता है. इसे किसी भी गन सिस्टम पर इस्तेमाल किया जा सकता है जो भारतीय सेना के पास है. रैमजेट पावर वाले गोले से इंडियन आर्मी के जवान आतंकी अड्डों को गोले से ही तबाह कर पाएगी. फिलहाल उनका ट्रायल तो पूरा हो गया है, लेकिन ये सिस्टम अभी डेवलेपमेंट और ऑप्टिमाइजेशन स्टेज में है. सेना को सौंपने से पहले इसकी कुछ कमियों को दूर करना जरूरी है.

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First published on: Jan 03, 2026 01:09 PM

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