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‘ऑपेरशन सिंदूर’ के बाद भारतीय सेना लगातार अपनी ताकत में इजाफा कर रही है. भारतीय रक्षा मंत्रालय ने एक और बड़ा कदम उठाया है, इंडियन सेना के एयर डिफेंस सिस्टम में धार देने के लिए 30 इम्प्रूव्ड लो-लेवल लाइट वेट रडार और 2 क्लासरूम वेरिएंट रडार की खरीद को लेकर रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल जारी किया है. बता दें, इसकी लागत करीब 725 करोड़ रुपये बताई जा रही है.

इन रडारों को अगले तीन महीने में खरीद लिया जाएगा. इन रडारों का निर्माण इस तरह से करने का प्लान है कि इसका इस्तेमाल पहाड़ी इलाकों, ऊंचाई वाले क्षेत्रों, मैदानों, अर्ध-रेगिस्तानी इलाकों, रेगिस्तान और तटीय क्षेत्रों में आसानी से किया जा सके.

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रक्षा मंत्रालय के एक बड़े अधिकारी ने न्यूज 24 को बताया कि ये रडार सेना के आकाशतीर कमांड एंड रिपोर्टिंग सिस्टम से अटैच होंगी. इसके लिए जरूरी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर पहले से ही सिस्टम में शामिल होना अनिवार्य होगा. साथ ही, इन्हें आर्मी डेटा नेटवर्क से जोड़ने के लिए आर्मी साइबर ग्रुप के मानकों पर भी खरा उतरना होगा.

रक्षा मामलों के जानकार और भारत शक्ति से जुड़े रवि शंकर के मुताबिक LLLR-I रडार एक आधुनिक एयर सर्विलांस सिस्टम होगा, जो हवाई क्षेत्र की निगरानी करेगा. यह सिस्टम दुश्मन के विमानों, हेलिकॉप्टरों और ड्रोन जैसे हवाई लक्ष्यों को पहचानने, ट्रैक करने और खतरे के हिसाब से प्राथमिकता तय करने में सक्षम होगा. एक साथ सैकड़ों लक्ष्यों को ट्रैक करने की क्षमता इसमें होगी.

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बता दें, इस रडार में इतनी ताकत होगी कि खतरे को भांपते ही यह चंद सेकंड में 10 कमांड पोस्ट या 10 हथियार प्रणालियों को संदेश भेज देगा. यह पोस्ट से 20 किलोमीटर की दूरी तक की निगरानी करने की ताकत रखेगा. अगर इसके कम्युनिकेशन की बात करें तो कनेक्टिविटी लाइन, रेडियो या रेडियो रिले के जरिए होगी और जरूरत पड़ने पर इसे 20 टारगेट डेटा रिसीवर तक बढ़ाया जा सकेगा. रडार में स्वदेशी उपकरण पर भी विशेष जोर देने का प्लान है यानी 50 से 70 प्रतिशत सामान मेक इंडिया का लगाया जाएगा.

कर्नल उमंग कोहली के मुताबिक सेना में शामिल होने के बाद एयर डिफेंस निगरानी क्षमता को एक बड़ी ताकत मिलेगी और देश की सीमाओं की सुरक्षा और मजबूत होगी.

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First published on: Feb 07, 2026 07:25 PM

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