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हादसे का शिकार हुआ भारतीय वायुसेना का एक और तेजस विमान, बाल-बाल बचे पायलट, तकनीकी खराबी की जांच शुरू

Tejas Fighter Jet Crash: भारतीय वायुसेना का तेजस लड़ाकू विमान ट्रेनिंग उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. गनीमत ये रही कि पायलट की जान बच गई. हादसे के बाद पूरी तेजस फ्लीट की तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है.

Author Written By: Varsha Sikri Updated: Feb 22, 2026 22:21
Tejas fighter jet crash
Credit: Social Media

भारतीय वायुसेना का स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस एक बार फिर दुर्घटनाग्रस्त हो गया है. ये तेजस फाइटर जेट की तीसरी बड़ी दुर्घटना मानी जा रही है. हादसा उस समय हुआ जब विमान एक रूटीन ट्रेनिंग उड़ान के बाद लैंडिंग की तैयारी कर रहा था. वायुसेना की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, शायद विमान में कोई तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसकी वजह से पायलट को आपात स्थिति में इजेक्शन सिस्टम का इस्तेमाल करना पड़ा. राहत की बात ये रही कि पायलट पूरी तरह सुरक्षित है और उसे कोई गंभीर चोट नहीं आई है.

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आखिर क्यों हुआ हादसा?

दुर्घटना के बाद तेजस विमान के मलबे को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई. शुरुआती जांच में ये सामने आया है कि लैंडिंग के दौरान विमान के कुछ सिस्टम सही तरीके से काम नहीं कर पाए. हालांकि, दुर्घटना के सही कारणों का पता विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा. इस हादसे के बाद भारतीय वायुसेना ने पूरे तेजस बेड़े की तकनीकी जांच के आदेश दिए हैं. जांच के तहत विमान के इंजन, ब्रेकिंग सिस्टम, फ्लाइट कंट्रोल और सॉफ्टवेयर सिस्टम की बारीकी से समीक्षा की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.

तीसरी बार दुर्घटनाग्रस्त हुआ तेजस विमान

ये तीसरी बार है जब तेजस विमान दुर्घटना का शिकार हुआ है. सबसे पहला प्लेन क्रैश मार्च 2024 में जैसलमेर के पास फायरपावर डेमो से लौटते समय हुआ था, जिसमें पायलट की जान बच गई. दूसरी घटना नवंबर 2025 में दुबई एयरशो के दौरान हुई थी, जिसमें पायलट की मौत हो गई थी और उसकी जांच अभी जारी है. आपको बता दें कि तेजस भारत का स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है, जिसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने डिजाइन और विकसित किया है. ये विमान भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए पुराने लड़ाकू विमानों की जगह शामिल किया जा रहा है. पिछले कुछ सालों में तेजस से जुड़ी कुछ दुर्घटनाओं और डिलीवरी में देरी की वजह से इस परियोजना पर सवाल भी उठे हैं. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि नए लड़ाकू विमानों के साथ शुरुआती चरणों में तकनीकी चुनौतियां आना असामान्य नहीं है, लेकिन पायलट की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए. फिलहाल, वायुसेना जांच पूरी होने तक सतर्कता बरत रही है.

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First published on: Feb 22, 2026 10:21 PM

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