अब रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहा भारत, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में इंडिया ऐसे पकड़ रहा गति

आजादी के बाद दशकों तक भारत की रक्षा तैयारियां एक ढांचागत विरोधाभास पर टिकी रहीं। साल 1990 के दशक के मध्य तक भारत के करीब 70 प्रतिशत रक्षा उपकरण विदेशों से आते थे। अधिकतर सोवियत संघ/रूस से और इजराइली तथा पश्चिमी आपूर्तिकर्ताओं द्वारा पूरक।

रक्षा क्षेत्र में आत्म निर्भर भारत

रक्षा क्षेत्र में आत्म निर्भर भारत

भारत आत्मनिर्भरता की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहा है। कई सेक्टरों के साथ रक्षा सेक्टर सबसे अहम है। आत्मनिर्भरता देश को बहुआयामी लाभ प्रदान करती है। रणनीतिक रूप से घरेलू मैन्युफैक्चरिंग परिचालन तत्परता को मजबूत करता है। वैश्विक आपूर्ति झटकों से सुरक्षा प्रदान करता है। राजनीतिक रूप से, यह भारत की सौदेबाजी की शक्ति को बढ़ाता है और प्रतिबंधों या बाहरी दबाव के प्रति संवेदनशीलता को कम करता है। आर्थिक रूप से, एक फलता-फूलता रक्षा उद्योग उच्च-कौशल वाले रोजगार सृजित करता है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को सहयोग देता है, अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित करता है और राष्ट्रीय विकास में योगदान देता है।

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आजादी के बाद दशकों तक भारत की रक्षा तैयारियां एक ढांचागत विरोधाभास पर टिकी रहीं। साल 1990 के दशक के मध्य तक भारत के करीब 70 प्रतिशत रक्षा उपकरण विदेशों से आते थे। अधिकतर सोवियत संघ/रूस से और इजराइली तथा पश्चिमी आपूर्तिकर्ताओं द्वारा पूरक। इस मॉडल ने परिचालन क्षमता तो प्रदान की, लेकिन रणनीतिक नियंत्रण नहीं दिया। भारत ने बार-बार देखा कि कैसे बाहरी झटके उसकी तैयारियों को खतरे में डाल सकते हैं। 1965 और 1971 के युद्धों के दौरान रसद संबंधी बाधाएं, कारगिल में ऑपरेशन विजय के दौरान आई चुनौतियां और हाल ही में रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण दुनिया भर में पुर्जी की कमी। इन घटनाओं ने एक कठोर सत्य को उजागर किया-विदेशी मंचों पर अत्यधिक निर्भर एक राष्ट्र कभी भी सच्ची रणनीतिक स्वायत्तता हासिल नहीं कर सकता। भू-राजनीति के करवट लेने पर गोला-बारूद, उन्नयन और यहां तक कि बुनियादी रखरखाव में भी देरी हो सकती है या उसे नकारा जा सकता है।

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भारत के समकालीन सुरक्षा परिवेश ने आत्मनिर्भरता की तात्कालिकता को और बढ़ा दिया है। उत्तरी सीमाओं और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन का तेजी से सैन्य विस्तार, पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद का लगातार इस्तेमाल और नए संघर्ष क्षेत्रों- साइबर, अंतरिक्ष, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और मानवरहित प्रणालियों के उदय ने उन्नत तकनीकों तक सुनिश्चित पहुंच को अपरिहार्य बना दिया है। वैश्विक व्यवधानों ने निर्भरता के जोखिम को रेखांकित किया है। यूक्रेन और गाजा में युद्ध, सेमीकंडक्टर की कमी और आपूर्ति श्रृंखला में अचानक आई गिरावट, इन सभी ने प्रदर्शित किया है कि आयात पर निर्भर सेनाओं के संकट के समय निष्क्रिय होने का जोखिम होता है। जब प्रतिबंध या निर्यात नियंत्रण लगाए जाते हैं. तो स्वदेशी क्षमता से रहित राष्ट्र महत्वपूर्ण समय और लचीलापन खो देते हैं। इस संदर्भ में, रक्षा में आत्मनिर्भरता एक नीतिगत विकल्प से राष्ट्रीय सुरक्षा की आवश्यकता में बदल गई है।

पीएम मोदी ने बार-बार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को 2047 तक भारत के एक सुरक्षित, आत्मविश्वासी और विकसित राष्ट्र के रूप में उभरने के लिए केंद्रीय बताया है। भारत के ‘रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने और एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरने पर उनका जोर एक रणनीतिक बदलाव को दर्शाता है, न केवल हथियार खरीदने की, बल्कि उन्हें स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और टिकाऊ बनाने की इच्छा। ऑपरेशन सिंदूर जैसे सफल अभियानों पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि स्वदेशी प्लेटफ़ॉर्म, एक बार युद्ध में मान्य हो जाने पर, प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं, राष्ट्रीय आत्मविश्वास का निर्माण करते हैं और भारत को एक भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करते हैं। भारत इसी परिवर्तन की तलाश में है: विदेशी आपूर्तिकर्ताओं की शर्तों पर खरीदार से अपनी रणनीतिक शर्तों पर काम करने वाले उत्पादक में।

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लेखक के बारे में

Raghav Tiwari

Raghav Tiwari

राघव तिवारी न्यूज24 में शिफ्ट हेड की भूमिका निभा रहे हैं। यहां टीम प्रबंधन के साथ नेशनल, इंटरनेशनल, राजनीति, क्राइम आदि की खबरें भी कवर करते हैं। इससे पहले ये अमर उजाला, नईदुनिया, नवभारत टाइम्स (NBT) और हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में रिपोर्टिंग कर चुके हैं। देवभूमि उत्तराखंड, इंदौर, नोएडा, कानपुर समेत देश के विभिन्न हिस्सों में काम करने की वजह से राघव भिन्न-भिन्न कल्चर, खानपान, व्यवहार, जरूरत की समझ रखते हैं। राघव तिवारी ने कानपुर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता एवं जनसंचार में पोस्ट ग्रेजुएशन की शिक्षा पूरी की है। शिकायत और सुझाव के लिए स्वागत है- Mail ID: raghav.tiwari@bagconvergence.in Contact No. 8840671098
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