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30 दिन जेल में रहे तो जाएगी PM-CM की कुर्सी, बिल पर JPC में मंथन

संयुक्त संसदीय समिति ने आज तीन अहम विधेयकों-संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक, 2025, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 और संघ शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025—पर अपनी पहली विस्तृत परामर्श बैठक शुरू की. बैठक करीब तीन घंटे चली, जिसमें कानूनी और संवैधानिक पहलुओं पर गहन चर्चा हुई.

Author Written By: Kumar Gaurav Updated: Jan 7, 2026 23:54

संयुक्त संसदीय समिति ने आज तीन अहम विधेयकों—संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक, 2025, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 और संघ शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025—पर अपनी पहली विस्तृत परामर्श बैठक शुरू की. बैठक करीब तीन घंटे चली, जिसमें कानूनी और संवैधानिक पहलुओं पर गहन चर्चा हुई.

संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक, 2025 में यह प्रावधान है कि यदि प्रधानमंत्री या किसी राज्य के मुख्यमंत्री को लगातार 30 दिनों तक जेल में रखा जाता है, तो उन्हें पद से इस्तीफा देना होगा. यदि ऐसा नहीं किया गया, तो 31वें दिन से उनका पद स्वतः समाप्त माना जाएगा.

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आज की बैठक में चार प्रमुख कानूनी विशेषज्ञों ने समिति के समक्ष प्रस्तुतियां दीं—

• भारत के विधि आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) दिनेश माहेश्वरी

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• विधि आयोग की सदस्य-सचिव डॉ. अंजू राठी राणा

• राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, दिल्ली के कुलपति प्रो. (डॉ.) जी.एस. बाजपेयी

• नालसार विश्वविद्यालय, हैदराबाद के कुलपति प्रो. श्री कृष्ण देवा राव

सूत्रों का कहना है कि विशेषज्ञों ने विधेयकों का सिद्धांततः समर्थन किया, लेकिन कई प्रावधानों पर सवाल भी उठाए. इसके बाद जेपीसी ने इन चारों कानूनी विशेषज्ञों से तीनों विधेयकों पर लिखित में विस्तृत राय और समिति के सदस्यों द्वारा उठाए गए प्रश्नों पर जवाब देने को कहा है. जेपीसी में कुल 31 सदस्य हैं, जिनमें 21 लोकसभा और 10 राज्यसभा से हैं. समिति की अगली बैठक 15 दिनों बाद 22 जनवरी को होगी.

बैठक के दौरान इस बीच, एक विपक्षी सांसद ने मांग की कि इन विधेयकों पर विपक्षी दलों को भी समिति के समक्ष प्रस्तुति देने के लिए आमंत्रित किया जाए. सूत्रों के अनुसार, जेपीसी अध्यक्ष ने इस सुझाव पर विचार करने की बात कही है.

बैठक के बाद समिति की अध्यक्ष अपराजिता सारंगी ने कहा कि सरकार ने सभी राजनीतिक दलों को शालीनता से समिति में शामिल होने का निमंत्रण दिया था, लेकिन कुछ दलों ने इसमें भाग लेने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि सरकार कानून के दायरे में रहकर काम करना चाहती है, जबकि कुछ दल “जेल से सरकार चलाने” की सोच रखते हैं, जो लोकतंत्र के लिए अपमानजनक है.

First published on: Jan 07, 2026 07:00 PM

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