शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सोमवार को धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार बयान दिया. आज जब वो संसद पहुंचे, तो बीजेपी और एनडीए के सांसदों ने उनका जोर-शोर से स्वागत किया. धर्मेंद्र प्रधान जैसे ही गाड़ी से उतरे, उनके चेहरे पर मुस्कान थी और उन्होंने हाथ जोड़कर सभी का अभिनंदन किया. उन्हें देखकर सभी सांसदों ने 'धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद' के नारे लगाए. इस दौरान धर्मेंद्र प्रधान के कहा कि वो एक स्ट्रीट फाइटर हैं, नाकि कोई एसी रूम एक्टिविस्ट.
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धर्मेंद्र प्रधान का किया सम्मान
धर्मेंद्र प्रधान के संसद आने से बीजेपी और एनडीए सांसद बेहद खुश नज़र आए. उन्होंने उनके सिर पर पारंपरिक टोपी और शॉल पहनाकर सम्मानित किया. एक सांसद ने कहा कि पहली बार किसी मंत्री ने बिना आरोप का सामना किए इस्तीफा दिया है. दरअसल, नीट पेपर लीक मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने विरोध प्रदर्शन करते हुए धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी, जिसे सरकार को मानना पड़ा. कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने धर्मेंद्र प्रधान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ऐसा होता रहता है. जिसपर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि ज़मीनी लड़ाई लड़ने वाले नेता हैं.
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धर्मेंद्र प्रधान ने बताई वजह
धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने इस्तीफे की वजह बताते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया. उन्होंने कहा कि पिछले 4 दशक से वो टीचर, स्टूडेंट और एजुकेशन सिस्टम को बेहतर करने के लिए काम कर रहे थे. धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि मजबूत एजुकेशन सिस्टम ही देश के विकास की असली नींव है. उन्होंने कहा कि पिछले 10 दिनों में जो भी हुआ, उनसे उन्हें बहुत ठेंस पहुंची है. धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि ये किसी एक व्यक्ति की इज्जत का सवाल नहीं है, बल्कि इस पर देश के युवाओं का भविष्य टिका हुआ है. उन्होंने कहा कि वो नहीं चाहते कि छात्रों की शिक्षा से कोई खिलवाड़ हो या फिर वो किसी कानूनी और राजनीतिक मामलों में उलझ कर रह जाएं, इसीलिए उन्होंने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना ही सही समझा.
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