सरकार ने कांग्रेस को शनिवार तक अपना '24, अकबर रोड' वाला दफ्तर खाली करने के लिए कहा है. इससे दोनों पार्टियों में सियासी टकराव पैदा हो सकता है. कांग्रेस सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है. पिछले 78 वर्ष से अकबर रोड का यह बंगला कांग्रेस का हेडक्वार्टर रहा है.
पिछले साल, कोटला मार्ग पर कांग्रेस के नए हेडक्वार्टर 'इंद्रा भवन' का सोनिया गांधी ने उद्घाटन किया था. लेकिन अकबर रोड वाला दफ्तर खाली नहीं किया गया है, और पार्टी की गतिविधियां वहां भी जारी हैं.
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एनडीटीवी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, कांग्रेस पार्टी को '5, रायसीना रोड' स्थित इंडियन यूथ कांग्रेस का दफ्तर भी खाली करने के लिए कहा गया है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस इस मामले में कुछ राहत पाने के लिए कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है.
ब्रिटिश राज के दौरान यहां सर रेजिनाल्ड मैक्सवेल रहते थे. ये वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो की कार्यकारी परिषद के सदस्य थे. 1960 के दशक की शुरुआत में, यह बंगला भारत में म्यांमार की राजदूत 'दा खिन की' का निवास था. दा खिन की की बेटी, आंग सान सू की, जिन्होंने बाद में नोबेल शांति पुरस्कार जीता, ने उस घर में कई साल बिताए थे.
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1977 के चुनावों में कांग्रेस की करारी हार के बाद, पार्टी टूट गई थी. इंदिरा गांधी ने एक अलग गुट का नेतृत्व किया और उस समूह को काम करने के लिए जगह की जरूरत थी. इंदिरा गांधी के वफादार राज्यसभा सांसद जी. वेंकटस्वामी ने अपना अकबर रोड बंगला पेश किया. यह राजीव गांधी, पीवी नरसिम्हा राव और फिर डॉ. मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री काल में कांग्रेस का मुख्यालय बना रहा.
सरकार ने कांग्रेस को शनिवार तक अपना ’24, अकबर रोड’ वाला दफ्तर खाली करने के लिए कहा है. इससे दोनों पार्टियों में सियासी टकराव पैदा हो सकता है. कांग्रेस सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है. पिछले 78 वर्ष से अकबर रोड का यह बंगला कांग्रेस का हेडक्वार्टर रहा है.
पिछले साल, कोटला मार्ग पर कांग्रेस के नए हेडक्वार्टर ‘इंद्रा भवन’ का सोनिया गांधी ने उद्घाटन किया था. लेकिन अकबर रोड वाला दफ्तर खाली नहीं किया गया है, और पार्टी की गतिविधियां वहां भी जारी हैं.
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ब्रिटिश राज के दौरान यहां सर रेजिनाल्ड मैक्सवेल रहते थे. ये वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो की कार्यकारी परिषद के सदस्य थे. 1960 के दशक की शुरुआत में, यह बंगला भारत में म्यांमार की राजदूत ‘दा खिन की’ का निवास था. दा खिन की की बेटी, आंग सान सू की, जिन्होंने बाद में नोबेल शांति पुरस्कार जीता, ने उस घर में कई साल बिताए थे.
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