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जनरल नरवणे की किताब पर क्यों मचा है बवाल? जानें अब तक क्यों प्रकाशित नहीं हो पाई

Manoj Narwane book controversy : क्या जनरल एमएम नरवणे की किताब 'Four Stars of Destiny' सच में बैन है? लद्दाख में चीन के साथ टकराव का वो सच, जिसने रक्षा मंत्रालय की नींद उड़ा दी. जानें आर्मी रूल्स के उस नियम को, जिसकी वजह से पिछले 2 साल से अटकी है पूर्व सेना प्रमुख की ये विवादित किताब

Manoj Narwane book controversy : भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ न सिर्फ उनके सैन्य जीवन का संस्मरण है, बल्कि इसमें देश की सुरक्षा से जुड़े ऐसे खुलासे हैं, जिन्होंने सरकार और सेना के बीच की रणनीतिक कड़ियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस किताब में सबसे संवेदनशील हिस्सा 2020 का भारत-चीन सीमा तनाव और पूर्वी लद्दाख में हुए सैन्य एक्शन हैं. दिसंबर 2023 में मीडिया में आए किताब के कुछ अंशों से संकेत मिला कि चीन के साथ टकराव के दौरान जमीनी हालात उतने सामान्य नहीं थे, जितने आधिकारिक तौर पर बताए गए. इसमें सरकार और सेना के बीच निर्णय लेने की प्रक्रिया का भी जिक्र है, जिसे सुरक्षा के लिहाज से बेहद गोपनीय माना जाता है.

क्यों अटकी है किताब की रिलीज?

तकनीकी रूप से इस किताब पर कोई आधिकारिक प्रतिबंध नहीं लगा है, लेकिन यह पिछले दो सालों से ‘समीक्षा’ के जाल में फंसी है. इसके पीछे मुख्य कारण कानूनी पेचदगियां हैं. Army Rules, 1954 (Section 21) के तहत सेना से जुड़ी किसी भी रणनीतिक जानकारी या नीति को सरकार की अनुमति के बिना सार्वजनिक नहीं किया जा सकता. सेवानिवृत्त अधिकारियों के लिए भी नियम हैं कि यदि वे सुरक्षा या खुफिया जानकारी साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है. पब्लिशर ने रक्षा मंत्रालय (MoD) से अनुमति मांगी है, लेकिन संवेदनशील जानकारी होने के कारण यह प्रक्रिया लंबी खिंच रही है.

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क्या है राजनीतिक विवाद की वजह?

विपक्ष का मानना है कि जनरल नरवणे की किताब में उन रणनीतिक फैसलों का जिक्र है, जो 2020 के गलवान और पैंगोंग त्सो विवाद के दौरान लिए गए थे. राहुल गांधी के अनुसार सरकार को डर है कि किताब रिलीज होने से चीन नीति पर उनके दावों की पोल खुल सकती है. सेना और सरकार के बीच निर्णय लेने की प्रक्रिया में हुई कमियां उजागर हो सकती हैं. राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि सरकार लद्दाख सीमा पर चीन के साथ हुई असल स्थिति को देश से छिपाना चाहती है. जहां राहुल गांधी इसे ‘अभिव्यक्ति की आजादी का हनन’ और ‘सच को दबाना’ बता रहे हैं, वहीं सत्ता पक्ष और रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सैन्य अनुशासन और Army Rules, 1954 के तहत संवेदनशील जानकारी को सार्वजनिक करना खतरनाक हो सकता है.

क्या पहले ऐसी किताबें नहीं छपीं?

भारत में पूर्व सेना प्रमुखों द्वारा किताबें लिखना नई बात नहीं है. जनरल वीपी मलिक और जनरल वीके सिंह की आत्मकथाएं बाजार में उपलब्ध हैं. हालांकि, नरवणे की किताब के साथ समस्या यह है कि इसमें हालिया और बेहद संवेदनशील घटनाओं का जिक्र है, जो वर्तमान कूटनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं.

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First published on: Apr 24, 2026 01:43 PM

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About the Author

Vijay Jain

सीनियर न्यूज एडिटर विजय जैन को पत्रकारिता में 23 साल से अधिक का अनुभव है.  न्यूज 24 से पहले विजय दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित अखबारों में अलग-अलग जगहों पर रिपोर्टिंग और टीम लीड कर चुके हैं, हर बीट की गहरी समझ है। खासकर शहर राज्यों की खबरें, देश विदेश, यूटिलिटी और राजनीति के साथ करेंट अफेयर्स और मनोरंजन बीट पर मजबूत पकड़ है. नोएडा के अलावा दिल्ली, गाजियाबाद, गोरखपुर, जयपुर, चंडीगढ़, पंचकूला, पटियाला और जालंधर में काम कर चुके हैं इसलिए वहां के कल्चर, खानपान, व्यवहार, जरूरत आदि की समझ रखते हैं. प्रिंट के कार्यकाल के दौरान इन्हें कई मीडिया अवार्ड और डिजिटल मीडिया में दो नेशनल अवार्ड भी मिले हैं. शिकायत और सुझाव के लिए स्वागत है- Vijay.kumar@bagconvergence.in

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