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कौन हैं पूर्व आर्मी चीफ एमएम नरवणे? चीन-पाकिस्तान तक दिखाई अपनी ताकत, नाम सुनते ही कांप जाता था दुश्मन

General MM Naravane Biography: भारतीय सैन्य इतिहास में जनरल मनोज मुकुंद नरवणे का नाम एक ऐसे रणनीतिकार के रूप में दर्ज है, जिन्होंने बेहद चुनौतीपूर्ण समय में भारतीय सेना का नेतृत्व किया. जनरल नरवणे भारतीय सेना के 28वें थल सेना प्रमुख (COAS) रहे और जनरल बिपिन रावत के आकस्मिक निधन के बाद उन्होंने चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली. जानें जनरल नरवणे के सैन्य सफर, पुरस्कार और उनके जीवन से जुड़ी हर बड़ी बात."

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Edited By : Vijay Jain Updated: Apr 24, 2026 14:20
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General MM Naravane Biography: भारतीय सेना के इतिहास में जब भी अनुशासन, धैर्य और कूटनीतिक सूझबूझ की बात होगी, जनरल मनोज मुकुंद नरवणे का नाम सम्मान के साथ लिया जाएगा. वह भारतीय सेना के 28वें थल सेना प्रमुख रहे हैं. उनके नेतृत्व में भारतीय सेना ने कई चुनौतियों का डटकर सामना किया, विशेषकर लद्दाख में चीन के साथ उपजे सीमा विवाद के दौरान उनकी भूमिका बेहद अहम रही. जनरल नरवणे को उनकी सादगी और शांत स्वभाव के लिए जाना जाता है, लेकिन जब बात देश की सुरक्षा की आती है,तो उनके फैसले हमेशा कड़क और निर्णायक रहे. 30 अप्रैल 2022 को वे अपनी शानदार सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए, लेकिन उनका जीवन आज भी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है.

जन्म और शुरुआती जीवन

जनरल एमएम नरवणे का जन्म 22 अप्रैल 1960 को महाराष्ट्र के पुणे में एक सैन्य पृष्ठभूमि वाले परिवार में हुआ था. उनके पिता मुकुंद नरवणे भारतीय वायु सेना में अधिकारी थे और उनकी माता सुधा नरवणे ऑल इंडिया रेडियो में अनाउन्सर थीं. बचपन से ही देश सेवा का जज्बा उनके खून में था. उनकी शुरुआती शिक्षा पुणे के ज्ञान प्रबोधिनी पाठशाला में हुई. इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), खडकवासला और भारतीय सैन्य अकादमी (IMA), देहरादून से कठिन प्रशिक्षण प्राप्त किया. उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से डिफेंस स्टडीज में मास्टर डिग्री और इंदौर की देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से पीएचडी भी की है.

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करियर के महत्वपूर्ण पड़ाव

जून 1980 में ‘7वीं बटालियन, सिख लाइट इन्फैंट्री’ से अपने सफर की शुरुआत करने वाले नरवणे ने सेना के लगभग हर महत्वपूर्ण कमांड को संभाला. जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स की दूसरी बटालियन और 106 इन्फैंट्री ब्रिगेड का नेतृत्व किया. असम राइफल्स में सेवा देने के साथ-साथ उन्होंने कश्मीर और उत्तर-पूर्व भारत में आतंकवाद विरोधी अभियानों में अपनी लोहा मनवाया. 4 दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश के हर कोने में सेवाएं दीं. उन्हें शांति क्षेत्रों से लेकर उग्रवाद प्रभावित कश्मीर और उत्तर-पूर्व भारत में काम करने का लंबा अनुभव है. उन्होंने श्रीलंका में शांति सेना के हिस्से के रूप में ‘ऑपरेशन पवन’ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. थल सेना प्रमुख बनने से पहले वे सेना के उप-प्रमुख और ईस्टर्न कमांड के प्रमुख भी रहे.

पद और रैंक का सफर

जनरल नरवणे का प्रमोशन चार्ट उनकी कड़ी मेहनत और काबिलियत की कहानी कहता है:

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1982: लेफ्टिनेंट

2005: कर्नल

2013: मेजर जनरल

2015: लेफ्टिनेंट जनरल

2019: जनरल (COAS)

सम्मान और परिवार

जनरल नरवणे की वीरता और विशिष्ट सेवा के लिए भारत सरकार ने उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक (2019), अति विशिष्ट सेवा पदक (2017) और सेना पदक जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है. उनकी पत्नी वीणा नरवणे, एक अनुभवी शिक्षिका हैं और उन्होंने ‘आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन’ (AWWA) की अध्यक्षा के रूप में सैन्य परिवारों के कल्याण के लिए अभूतपूर्व कार्य किए हैं. जनरल नरवणे का कार्यकाल न केवल सैन्य आधुनिकीकरण के लिए याद किया जाएगा, बल्कि उनके नेतृत्व में भारतीय सेना ने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर अपनी संप्रभुता को और भी मजबूती से स्थापित किया.

First published on: Apr 24, 2026 12:44 PM

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