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Ex CJI Gavai Exclusive : क्या जजों की नियुक्ति में सरकार का दखल होता है? पूर्व CJI बीआर गवई ने दिया जवाब

पूर्व सीजेआई बीआई गवई ने News 24 के लीगल कॉरेस्पोंडेंट प्रभाकर मिश्रा को दिए इंटरव्यू में न्यायपालिका, मीडिया, सरकार, वायु प्रदूषण और अपने कार्यकाल से संबंधित फैसलों से जुड़े कई सवालों पर बड़ी बातें कही.

Ex CJI Gavai Exclusive: सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान चीफ जस्टिस सूर्यकांत के 24 नवंबर को बद संभालने के बाद देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई अपने कार्यप्रभार से मुक्त हुए. रिटायरमेंट के बाद पहली बार पूर्व सीजेआई न्यूज 24 से एक्सक्लूसिव बात की. उन्होंने News 24 के लीगल कॉरेस्पोंडेंट प्रभाकर मिश्रा को दिए इंटरव्यू में न्यायपालिका, मीडिया, सरकार, वायु प्रदूषण और अपने कार्यकाल से संबंधित फैसलों से जुड़े कई सवालों पर बड़ी बातें कही.

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22:41 (IST) 29 Nov 2025
सवाल- क्या आपको लगता है कि जजों के रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाई जानी चाहिए?

जवाब - मुझे नहीं लगता कि इसकी जरूरत है. हां हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों के रिटायरमेंट की उम्र एक समान जरूर होनी चाहिए.

22:29 (IST) 29 Nov 2025
सवाल- आप ये शुरू से ही कहते रहे हैं कि आप कोई सरकारी पद नहीं लेंगे ? ऐसा क्यों ? लोग तो पोस्ट रिटायरमेंट के बाद पद पाने के लिए तमाम तरह के जुगत लगाते हैं?

जवाब- मैं शुरू से ही तय कर चुका था कि रिटायरमेंट के बाद कोई पद नहीं लूंगा. मैं बाकि लोगों के बारे में कुछ नहीं कह सकता.

22:27 (IST) 29 Nov 2025
सवाल- करीब दो दशक से मैं सुप्रीम कोर्ट रिपोर्ट कर रहा हूं. सुप्रीम कोर्ट के सामने से गुजरते लोगों को कोर्ट के सामने मंदिर की तरह माथा झुकाते देखा है. प्रार्थना स्थल की तरह कोर्ट रूम में जाने से पहले जूता चप्पल निकाल कर जाते देखा है. कोर्ट रूम में हाथ जोड़कर प्रार्थना के मुद्रा में प्लेंटीफ ( वादी) लोगों को देखा है. आज उसी कोर्ट के बारे में और जजों के बारे में लोग तमाम अभद्र टिप्पणियां करते हैं, इसके पीछे आप क्या कारण मानते हैं?

जवाब- सोशल मीडिया को मैं इसके पीछे जिम्मेदार मानता हूं. एक लॉबी भी है जो जजों को ट्रॉल करती है जो सही नहीं है. कोर्ट के फैसले की आलोचना की जा सकती है. लेकिन ट्रॉल करना ठीक नहीं है.

22:25 (IST) 29 Nov 2025
सवाल- सर आप जब ST SC reservation में क्रीमी लेयर की बात करते हैं तो यह भी बताते हैं कि ऐसा करने से उसी समाज के जरूरत मंद लोगों तक आरक्षण का लाभ पहुंचेगा. फिर भी लोग इसका विरोध करते हैं ! एक सीनियर ias अधिकारी ने तो यहां तक कह दिया कि जबतक उसके बेटे को ब्राह्मण अपनी बेटी दान नहीं करता उसे तबतक आरक्षण मिलते रहना चाहिए ?

जवाब- मैंने देखा है कि दलित समुदाय के अधिकारियों की शादी सवर्ण लड़कियों से हुई है. मेरा मानना है कि ST SC reservation में क्रीमी लेयर जैसी व्यवस्था होनी चाहिए. ऐसा करने से SC ST समाज के जरूरत मंद लोगों तक आरक्षण का लाभ पहुंचेगा. अपने फैसले में भी कहा था.

22:21 (IST) 29 Nov 2025
सवाल- जस्टिस यशवंत वर्मा के मामले में अब तक कुछ नहीं हुआ? जजों के मामले में इतनी और ऐसी देरी आपको नहीं लगता कि न्यायपालिका की साख पर सवाल खड़ा करता है ?

जवाब- सुप्रीम कोर्ट को संविधान की व्यवस्था के मुताबिक चलना होता है. सुप्रीम कोर्ट ने वही प्रक्रिया अपनाया. अगर सरकार को लगता है कि वह प्रक्रिया ठीक नहीं है तो उसमें बदलाव कर सकती है. लेकिन इस बात का भी ख्याल रखना होगा कि न्यायपालिका की स्वायत्तता बरकार रहे.

इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक जज ( जस्टिस शेखर यादव के कठमुल्ला वाले बयान ) ने संविधान के विरुद्ध बयान दिया, देश ने सुना. लोगों को उम्मीद थी कि सुप्रीम कोर्ट कोई कार्रवाई करेगा, लेकिन कुछ नहीं हुआ ?

कॉलेजियम ने इस सरकार को कार्रवाई की सिफारिश की थी. उस पर कार्रवाई होनी चाहिए थी. जो नहीं हुई. मेरे विचार में कार्रवाई होनी चाहिए थी.

दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री और एक नेता को जमानत देते समय आपने कहा था कि Bail is rule, Jail is exeption के सिद्धांत को अदालतें भूल गई हैं. .. सर आज भी लोग पांच पांच साल से जेल में बंद हैं और जमानत का इंतज़ार कर रहे हैं!

प्रत्येक केस के तथ्य अलग अलग होते हैं. जजों की राय भी अलग अलग होती है. यह केस कोर्ट में है, इसपर सुनवाई चल रही है, इस पर मैं अधिक नहीं बोल सकता.

22:18 (IST) 29 Nov 2025
सवाल- जजों की नियुक्ति में सरकार का दखल होता है क्या ?

जवाब - सरकार का दखल नहीं होता. लेकिन कॉलेजियम को सरकार की आपत्तियों पर विचार जरूर करना होता है.

सुप्रीम कोर्ट के एक जज की नियुक्ति में ( जस्टिस पंचोली ) में कॉलेजियम की एक मेंबर की असहमति के बावजूद नियुक्ति हुई.

हां, उसपर विचार हुआ. कॉलेजियम के बाकी सदस्यों की राय नियुक्ति के पक्ष में थी. तो बहुमत से फैसला हुआ. यही व्यवस्था है.

22:10 (IST) 29 Nov 2025
लीगल कॉरेस्पोंडेंट- सर , आपका कोई एक फैसला जो आपके दिल के सबसे क़रीब हो ?

पूर्व सीजेआई - बुल्डोजर एक्शन से जुड़ा फैसला. SC ST आरक्षण में सब क्लासिफिकेशन से जुड़ा फैसला.

ज्यूडिशियरी पर सरकार का किसी तरह का दबाव होता है ? मैं जानता हूं कि आप का उत्तर होगा नहीं! लेकिन लोगों को लगता है कि दबाव तो होता है !

दबाव नहीं होता. मेरे फैसले देख लीजिए. मैंने ऐसे फैसले भी दिए हैं जो विपक्ष के पक्ष में थे. विपक्ष के एक सांसद की सदस्यता के मामले में मैने फैसला दिया. कई फैसले मेरे सरकार के खिलाफ थे. सभी फैसले सरकार के खिलाफ हों यह जरूरी नहीं.

22:06 (IST) 29 Nov 2025

प्रभाकर मिश्रा - सर रिटायर होने के बाद कैसी चल रही है जिंदगी ?

पूर्व सीजेआई - अच्छी चल रही है।

First published on: Nov 29, 2025 09:58 PM

CJI
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About the Author

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला (Akarsh Shukla) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में वो News 24 Digital टीम को शिफ्ट हेड के तौर पर लीड कर रहे हैं। आकर्ष शुक्ला ने India.com (ZEE Media), 'नवोदय टाइम्स' (पंजाब केसरी ग्रुप), 'ओपेरा न्यूज' और 'वनइंडिया' (डेली हंट) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करके अपनी व्यापक पत्रकारिता क्षमता का परिचय दिया। उनकी विशेषज्ञता प्रिंट, डिजिटल मीडिया (वेबसाइट) और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से खबरों को सजीव और प्रभावी रूप में पेश करने में है। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ आकर्ष को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग और खेल जगत की खबरों का भी बखूबी अनुभव है। आकर्ष शुक्ला, पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज और जनसंवाद का एक सशक्त माध्यम मानते हैं।

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Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला (Akarsh Shukla) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में वो News 24 Digital टीम को शिफ्ट हेड के तौर पर लीड कर रहे हैं। आकर्ष शुक्ला ने India.com (ZEE Media), 'नवोदय टाइम्स' (पंजाब केसरी ग्रुप), 'ओपेरा न्यूज' और 'वनइंडिया' (डेली हंट) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करके अपनी व्यापक पत्रकारिता क्षमता का परिचय दिया। उनकी विशेषज्ञता प्रिंट, डिजिटल मीडिया (वेबसाइट) और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से खबरों को सजीव और प्रभावी रूप में पेश करने में है। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ आकर्ष को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग और खेल जगत की खबरों का भी बखूबी अनुभव है। आकर्ष शुक्ला, पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज और जनसंवाद का एक सशक्त माध्यम मानते हैं।

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