सवाल- जस्टिस यशवंत वर्मा के मामले में अब तक कुछ नहीं हुआ? जजों के मामले में इतनी और ऐसी देरी आपको नहीं लगता कि न्यायपालिका की साख पर सवाल खड़ा करता है ?
जवाब- सुप्रीम कोर्ट को संविधान की व्यवस्था के मुताबिक चलना होता है. सुप्रीम कोर्ट ने वही प्रक्रिया अपनाया. अगर सरकार को लगता है कि वह प्रक्रिया ठीक नहीं है तो उसमें बदलाव कर सकती है. लेकिन इस बात का भी ख्याल रखना होगा कि न्यायपालिका की स्वायत्तता बरकार रहे.
इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक जज ( जस्टिस शेखर यादव के कठमुल्ला वाले बयान ) ने संविधान के विरुद्ध बयान दिया, देश ने सुना. लोगों को उम्मीद थी कि सुप्रीम कोर्ट कोई कार्रवाई करेगा, लेकिन कुछ नहीं हुआ ?
कॉलेजियम ने इस सरकार को कार्रवाई की सिफारिश की थी. उस पर कार्रवाई होनी चाहिए थी. जो नहीं हुई. मेरे विचार में कार्रवाई होनी चाहिए थी.
दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री और एक नेता को जमानत देते समय आपने कहा था कि Bail is rule, Jail is exeption के सिद्धांत को अदालतें भूल गई हैं. .. सर आज भी लोग पांच पांच साल से जेल में बंद हैं और जमानत का इंतज़ार कर रहे हैं!
प्रत्येक केस के तथ्य अलग अलग होते हैं. जजों की राय भी अलग अलग होती है. यह केस कोर्ट में है, इसपर सुनवाई चल रही है, इस पर मैं अधिक नहीं बोल सकता.