Ex CJI Gavai Exclusive : क्या जजों की नियुक्ति में सरकार का दखल होता है? पूर्व CJI बीआर गवई ने दिया जवाब

पूर्व सीजेआई बीआई गवई ने News 24 के लीगल कॉरेस्पोंडेंट प्रभाकर मिश्रा को दिए इंटरव्यू में न्यायपालिका, मीडिया, सरकार, वायु प्रदूषण और अपने कार्यकाल से संबंधित फैसलों से जुड़े कई सवालों पर बड़ी बातें कही.

BR Gavai Live
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Ex CJI Gavai Exclusive: सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान चीफ जस्टिस सूर्यकांत के 24 नवंबर को बद संभालने के बाद देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई अपने कार्यप्रभार से मुक्त हुए. रिटायरमेंट के बाद पहली बार पूर्व सीजेआई न्यूज 24 से एक्सक्लूसिव बात की. उन्होंने News 24 के लीगल कॉरेस्पोंडेंट प्रभाकर मिश्रा को दिए इंटरव्यू में न्यायपालिका, मीडिया, सरकार, वायु प्रदूषण और अपने कार्यकाल से संबंधित फैसलों से जुड़े कई सवालों पर बड़ी बातें कही.

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सवाल- क्या आपको लगता है कि जजों के रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाई जानी चाहिए?

जवाब - मुझे नहीं लगता कि इसकी जरूरत है. हां हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों के रिटायरमेंट की उम्र एक समान जरूर होनी चाहिए.

सवाल- आप ये शुरू से ही कहते रहे हैं कि आप कोई सरकारी पद नहीं लेंगे ? ऐसा क्यों ? लोग तो पोस्ट रिटायरमेंट के बाद पद पाने के लिए तमाम तरह के जुगत लगाते हैं?

जवाब- मैं शुरू से ही तय कर चुका था कि रिटायरमेंट के बाद कोई पद नहीं लूंगा. मैं बाकि लोगों के बारे में कुछ नहीं कह सकता.

सवाल- करीब दो दशक से मैं सुप्रीम कोर्ट रिपोर्ट कर रहा हूं. सुप्रीम कोर्ट के सामने से गुजरते लोगों को कोर्ट के सामने मंदिर की तरह माथा झुकाते देखा है. प्रार्थना स्थल की तरह कोर्ट रूम में जाने से पहले जूता चप्पल निकाल कर जाते देखा है. कोर्ट रूम में हाथ जोड़कर प्रार्थना के मुद्रा में प्लेंटीफ ( वादी) लोगों को देखा है. आज उसी कोर्ट के बारे में और जजों के बारे में लोग तमाम अभद्र टिप्पणियां करते हैं, इसके पीछे आप क्या कारण मानते हैं?

जवाब- सोशल मीडिया को मैं इसके पीछे जिम्मेदार मानता हूं. एक लॉबी भी है जो जजों को ट्रॉल करती है जो सही नहीं है. कोर्ट के फैसले की आलोचना की जा सकती है. लेकिन ट्रॉल करना ठीक नहीं है.

सवाल- सर आप जब ST SC reservation में क्रीमी लेयर की बात करते हैं तो यह भी बताते हैं कि ऐसा करने से उसी समाज के जरूरत मंद लोगों तक आरक्षण का लाभ पहुंचेगा. फिर भी लोग इसका विरोध करते हैं ! एक सीनियर ias अधिकारी ने तो यहां तक कह दिया कि जबतक उसके बेटे को ब्राह्मण अपनी बेटी दान नहीं करता उसे तबतक आरक्षण मिलते रहना चाहिए ?

जवाब- मैंने देखा है कि दलित समुदाय के अधिकारियों की शादी सवर्ण लड़कियों से हुई है. मेरा मानना है कि ST SC reservation में क्रीमी लेयर जैसी व्यवस्था होनी चाहिए. ऐसा करने से SC ST समाज के जरूरत मंद लोगों तक आरक्षण का लाभ पहुंचेगा. अपने फैसले में भी कहा था.

सवाल- जस्टिस यशवंत वर्मा के मामले में अब तक कुछ नहीं हुआ? जजों के मामले में इतनी और ऐसी देरी आपको नहीं लगता कि न्यायपालिका की साख पर सवाल खड़ा करता है ?

जवाब- सुप्रीम कोर्ट को संविधान की व्यवस्था के मुताबिक चलना होता है. सुप्रीम कोर्ट ने वही प्रक्रिया अपनाया. अगर सरकार को लगता है कि वह प्रक्रिया ठीक नहीं है तो उसमें बदलाव कर सकती है. लेकिन इस बात का भी ख्याल रखना होगा कि न्यायपालिका की स्वायत्तता बरकार रहे.

इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक जज ( जस्टिस शेखर यादव के कठमुल्ला वाले बयान ) ने संविधान के विरुद्ध बयान दिया, देश ने सुना. लोगों को उम्मीद थी कि सुप्रीम कोर्ट कोई कार्रवाई करेगा, लेकिन कुछ नहीं हुआ ?

कॉलेजियम ने इस सरकार को कार्रवाई की सिफारिश की थी. उस पर कार्रवाई होनी चाहिए थी. जो नहीं हुई. मेरे विचार में कार्रवाई होनी चाहिए थी.

दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री और एक नेता को जमानत देते समय आपने कहा था कि Bail is rule, Jail is exeption के सिद्धांत को अदालतें भूल गई हैं. .. सर आज भी लोग पांच पांच साल से जेल में बंद हैं और जमानत का इंतज़ार कर रहे हैं!

प्रत्येक केस के तथ्य अलग अलग होते हैं. जजों की राय भी अलग अलग होती है. यह केस कोर्ट में है, इसपर सुनवाई चल रही है, इस पर मैं अधिक नहीं बोल सकता.

सवाल- जजों की नियुक्ति में सरकार का दखल होता है क्या ?

जवाब - सरकार का दखल नहीं होता. लेकिन कॉलेजियम को सरकार की आपत्तियों पर विचार जरूर करना होता है.

सुप्रीम कोर्ट के एक जज की नियुक्ति में ( जस्टिस पंचोली ) में कॉलेजियम की एक मेंबर की असहमति के बावजूद नियुक्ति हुई.

हां, उसपर विचार हुआ. कॉलेजियम के बाकी सदस्यों की राय नियुक्ति के पक्ष में थी. तो बहुमत से फैसला हुआ. यही व्यवस्था है.

लीगल कॉरेस्पोंडेंट- सर , आपका कोई एक फैसला जो आपके दिल के सबसे क़रीब हो ?

पूर्व सीजेआई - बुल्डोजर एक्शन से जुड़ा फैसला. SC ST आरक्षण में सब क्लासिफिकेशन से जुड़ा फैसला.

ज्यूडिशियरी पर सरकार का किसी तरह का दबाव होता है ? मैं जानता हूं कि आप का उत्तर होगा नहीं! लेकिन लोगों को लगता है कि दबाव तो होता है !

दबाव नहीं होता. मेरे फैसले देख लीजिए. मैंने ऐसे फैसले भी दिए हैं जो विपक्ष के पक्ष में थे. विपक्ष के एक सांसद की सदस्यता के मामले में मैने फैसला दिया. कई फैसले मेरे सरकार के खिलाफ थे. सभी फैसले सरकार के खिलाफ हों यह जरूरी नहीं.

प्रभाकर मिश्रा - सर रिटायर होने के बाद कैसी चल रही है जिंदगी ?

पूर्व सीजेआई - अच्छी चल रही है।

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लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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