प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हैदराबाद जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग रोधी कानून (PMLA), 2002 के तहत चल रही एक जांच में हस्तक्षेप करने की कोशिश करने वाले एक फर्जी व्यक्ति कल्याण बनर्जी को 10 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया है.
ईडी, नौहेरा शेख एवं अन्य के खिलाफ विभिन्न राज्यों की पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर जांच कर रही है. पुलिस जांच में सामने आया है कि नौहेरा शेख और उनके सहयोगियों ने अधिक मुनाफे (सालाना 36% से अधिक रिटर्न) का झांसा देकर भोले-भाले निवेशकों से करीब 5,978 करोड़ रुपये जुटाए, लेकिन न तो मुनाफा लौटाया गया और न ही मूलधन, जिससे निवेशकों के साथ धोखाधड़ी हुई.
ईडी की जांच में यह भी उजागर हुआ कि नौहेरा शेख ने अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) का इस्तेमाल अपने नाम, अपनी कंपनियों और रिश्तेदारों के नाम पर विभिन्न अचल संपत्तियां खरीदने में किया. अब तक ईडी ने लगभग 428 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की हैं. इस मामले में अभियोजन शिकायत और पूरक अभियोजन शिकायत माननीय विशेष PMLA न्यायालय, हैदराबाद में दाखिल की जा चुकी हैं.
पीएमएलए जांच और माननीय सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों के दौरान, ईडी ने पीड़ितों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से कुर्क की गई संपत्तियों की नीलामी का प्रस्ताव रखते हुए सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दिया. शीर्ष अदालत की अनुमति और आदेशों के अनुपालन में, मामले से जुड़ी कई संपत्तियों को MSTC के माध्यम से नीलामी के लिए रखा गया. हालांकि, नौहेरा शेख ने बार-बार सुप्रीम कोर्ट और तेलंगाना हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कर नीलामी प्रक्रिया को रोकने की कोशिश की.
5 जनवरी 2026 को हुई अंतिम नीलामी को रोकने के लिए नौहेरा शेख ने तेलंगाना हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर नीलामी प्रक्रिया में दुर्भावना का आरोप लगाया, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया. साथ ही, अदालत ने नौहेरा शेख पर 5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाते हुए यह राशि प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा करने का आदेश दिया.
कानूनी रूप से संपत्तियों को बचाने में विफल रहने के बाद, नौहेरा शेख ने मासिक वेतन और कमीशन के आधार पर कल्याण बनर्जी नामक एक फर्जी व्यक्ति की सेवाएं लीं. कल्याण बनर्जी ने ईडी अधिकारियों को संदेश और कॉल कर खुद को वरिष्ठ नौकरशाहों और राजनेताओं के करीबी के रूप में पेश किया और नीलामी प्रक्रिया में हेरफेर का दबाव बनाने की कोशिश की. जब अधिकारियों ने कानून के अनुसार प्रक्रिया अपनाने की बात कही, तो उसने धमकियां देना और दबाव बनाना शुरू कर दिया.
खुफिया जानकारी के आधार पर यह सामने आया कि कल्याण बनर्जी एक इंपोस्टर है, जो खुद को विभिन्न विभागों का सलाहकार बताकर वरिष्ठ अधिकारियों और राजनेताओं से नजदीकी का झूठा दावा कर रहा था. उसके मोबाइल सिम कार्ड के केवाईसी दस्तावेजों में पता भी अधूरा पाया गया. 10 जनवरी 2026 को ईडी ने पीएमएलए की धारा 17 के तहत सिकंदराबाद स्थित उसके ठिकाने पर तलाशी ली. उसके मोबाइल फोन से नौहेरा शेख और उसके सहयोगियों के साथ की गई आपत्तिजनक व्हाट्सएप चैट्स बरामद हुईं.
जांच में यह भी सामने आया कि वह जांच और न्यायिक प्रक्रिया को अनैतिक तरीकों से प्रभावित करने, अपराध की आय से खरीदी गई संपत्तियों को बेचने की कोशिश करने और अवैध सौदों से भारी कमीशन कमाने में शामिल था. पीएमएलए के तहत दर्ज बयान में कल्याण बनर्जी ने अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए फर्जी पहचान अपनाने और नौहेरा शेख व उसके सहयोगियों के निर्देश पर काम करने की बात स्वीकार की.
कल्याण बनर्जी को 11 जनवरी 2026 को माननीय विशेष PMLA न्यायालय (एमएसजे), नामपल्ली में पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे 23 जनवरी 2026 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया.
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हैदराबाद जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग रोधी कानून (PMLA), 2002 के तहत चल रही एक जांच में हस्तक्षेप करने की कोशिश करने वाले एक फर्जी व्यक्ति कल्याण बनर्जी को 10 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया है.
ईडी, नौहेरा शेख एवं अन्य के खिलाफ विभिन्न राज्यों की पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर जांच कर रही है. पुलिस जांच में सामने आया है कि नौहेरा शेख और उनके सहयोगियों ने अधिक मुनाफे (सालाना 36% से अधिक रिटर्न) का झांसा देकर भोले-भाले निवेशकों से करीब 5,978 करोड़ रुपये जुटाए, लेकिन न तो मुनाफा लौटाया गया और न ही मूलधन, जिससे निवेशकों के साथ धोखाधड़ी हुई.
ईडी की जांच में यह भी उजागर हुआ कि नौहेरा शेख ने अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) का इस्तेमाल अपने नाम, अपनी कंपनियों और रिश्तेदारों के नाम पर विभिन्न अचल संपत्तियां खरीदने में किया. अब तक ईडी ने लगभग 428 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की हैं. इस मामले में अभियोजन शिकायत और पूरक अभियोजन शिकायत माननीय विशेष PMLA न्यायालय, हैदराबाद में दाखिल की जा चुकी हैं.
पीएमएलए जांच और माननीय सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों के दौरान, ईडी ने पीड़ितों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से कुर्क की गई संपत्तियों की नीलामी का प्रस्ताव रखते हुए सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दिया. शीर्ष अदालत की अनुमति और आदेशों के अनुपालन में, मामले से जुड़ी कई संपत्तियों को MSTC के माध्यम से नीलामी के लिए रखा गया. हालांकि, नौहेरा शेख ने बार-बार सुप्रीम कोर्ट और तेलंगाना हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कर नीलामी प्रक्रिया को रोकने की कोशिश की.
5 जनवरी 2026 को हुई अंतिम नीलामी को रोकने के लिए नौहेरा शेख ने तेलंगाना हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर नीलामी प्रक्रिया में दुर्भावना का आरोप लगाया, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया. साथ ही, अदालत ने नौहेरा शेख पर 5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाते हुए यह राशि प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा करने का आदेश दिया.
कानूनी रूप से संपत्तियों को बचाने में विफल रहने के बाद, नौहेरा शेख ने मासिक वेतन और कमीशन के आधार पर कल्याण बनर्जी नामक एक फर्जी व्यक्ति की सेवाएं लीं. कल्याण बनर्जी ने ईडी अधिकारियों को संदेश और कॉल कर खुद को वरिष्ठ नौकरशाहों और राजनेताओं के करीबी के रूप में पेश किया और नीलामी प्रक्रिया में हेरफेर का दबाव बनाने की कोशिश की. जब अधिकारियों ने कानून के अनुसार प्रक्रिया अपनाने की बात कही, तो उसने धमकियां देना और दबाव बनाना शुरू कर दिया.
खुफिया जानकारी के आधार पर यह सामने आया कि कल्याण बनर्जी एक इंपोस्टर है, जो खुद को विभिन्न विभागों का सलाहकार बताकर वरिष्ठ अधिकारियों और राजनेताओं से नजदीकी का झूठा दावा कर रहा था. उसके मोबाइल सिम कार्ड के केवाईसी दस्तावेजों में पता भी अधूरा पाया गया. 10 जनवरी 2026 को ईडी ने पीएमएलए की धारा 17 के तहत सिकंदराबाद स्थित उसके ठिकाने पर तलाशी ली. उसके मोबाइल फोन से नौहेरा शेख और उसके सहयोगियों के साथ की गई आपत्तिजनक व्हाट्सएप चैट्स बरामद हुईं.
जांच में यह भी सामने आया कि वह जांच और न्यायिक प्रक्रिया को अनैतिक तरीकों से प्रभावित करने, अपराध की आय से खरीदी गई संपत्तियों को बेचने की कोशिश करने और अवैध सौदों से भारी कमीशन कमाने में शामिल था. पीएमएलए के तहत दर्ज बयान में कल्याण बनर्जी ने अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए फर्जी पहचान अपनाने और नौहेरा शेख व उसके सहयोगियों के निर्देश पर काम करने की बात स्वीकार की.
कल्याण बनर्जी को 11 जनवरी 2026 को माननीय विशेष PMLA न्यायालय (एमएसजे), नामपल्ली में पेश किया गया, जहां अदालत ने उसे 23 जनवरी 2026 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया.