Earthquake क्यों आता है और क्या है इसके आने की वजह? दिल्ली-NCR में लगे जोरदार झटके

Earthquake Tremors: Earthquake Tremors: भूकंप के झटके आए दिन लग रहे हैं। आज दिल्ली-NCR समेत उत्तर भारत के कई शहरों भूकंप के जोरदार झटके लगे। भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है और यह लोगों की जान ले सकता है। दुनिया को तबाह करने की क्षमता रखता है। आइए इस भूकंप के पीछे की कहानी जानते हैं…

Earthquake in Delhi

Earthquake in Delhi

Earthquake Tremors Why Occured: दुनियाभर के देश आए दिन भूकंप के झटके झेल रहे हैं। आज दिल्ली-NCR में 4 से ज्यादा की तीव्रता वाला भूकंप आया, जिसके झटकों से लोगों में दहशत फैल गई। धरती पर पिछले एक साल से भूकंप का खतरा मंडरा रहा है। पिछले साल धरती पर जितने भूकंप आए, इतने अब से पहले कभी नहीं आए। ऐसे में यह भूकंप किसी बड़े खतरे का संकेत हो सकते हैं।

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भारत, पाकिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान, नेपाल समेत दुनियाभर के देश भूकंप के झटके खा चुके हैं और खा रहे हैं। समुद्र के बीच बसे देशों और द्वीपों में भी साल 2024 में भूकंप से तबाही देखने को मिली, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भूकंप क्यों आता है? इसके पीछे की वजह क्या है? भूकंप की तीव्रता कैसे मापी जाती है और कितनी तीव्रता वाला भूकंप खतरा बन सकता है? आइए इन सभी के बारे में विस्तार से जानते हैं…

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भूकंप के आने का कारण क्या है?

माना जाता है कि धरती की 7 प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती रहती हैं। इस दौरान इन प्लेट्स में घर्षण होता है और वे आपस में टकराती हैं। जहां प्लेट्स टकराती हैं, उस एरिया को जोन फॉल्ट लाइन कहते हैं। आपस में टकराने से प्लेट्स के किनारे मुड़ते हैं। दबाव बनने पर कई बार प्लेट्स टूट जाती हैं। इनके टूटने से जो तरंगें और ऊर्जा निकलती हैं, वे फैलती हैं तो धरती कांपती है।

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इसी कंपन को भूकंप कहते हैं। कंपन होने से कई बार धरती पर बनी चीजें हिल जाती हैं, गिरकर ध्वस्त हो जाती हैं। इससे जान माल का नुकसान होता है। भूकंप का केंद्र वह जगह होती है, जहां से प्लेट्स के टूटने पर तरंगें निकलती हैं। जहां से तरंगें निकलती हैं, वहां सबसे ज्यादा कंपन होता है। जैसे-जैसे तरंगें फैलती हैं, उनकी आवृत्ति कम होती जाती है। 40 किलोमीटर के दायरे में तरंगों की आवृत्ति सबसे ज्यादा होती है।

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भूकंप की तीव्रता कैसे मापी जाती है?

मिली जानकारी के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर मापी जाती है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल भी कहते हैं, जिसके स्तर एक से 9 तक होते हैँ। भूकंप को मापने के लिए इसका केंद्र (एपीसेंटर) देखा जाता है। जहां से तरंंगें निकलती हैं, वहां जितनी आवृत्ति होगी, वह भूकंप की तीव्रता कहलाएगी।

कितनी तीव्रता का भूकंप कितना खतरनाक?

  • 2 से 2.9 की तीव्रता से हल्का कंपन
  • 3 से 3.9 कोई ट्रक आपके नजदीक से गुजर जाए, ऐसा असर होता है।
  • 4 से 4.9 खिड़कियां टूट सकती हैं और दीवारों पर टंगी फ्रेम गिर सकती हैं।
  • 5 से 5.9 फर्नीचर हिल सकता है।
  • 6 से 6.9 इमारतों की नींव दरक सकती है। ऊपरी मंजिलों को नुकसान हो सकता है।
  • 7 से 7.9 इमारतें गिर जाती हैं। जमीन के अंदर पाइप फट जाते हैं।
  • 8 से 8.9 इमारतों सहित बड़े पुल भी गिर जाते हैं। सुनामी का खतरा।
  • 9 और उससे ज्यादा पूरी तबाही, कोई मैदान में खड़ा हो तो उसे धरती लहराते हुए दिखेगी। समंदर नजदीक हो तो सुनामी।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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