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चंद्रयान-3, विक्रम लैंडर, प्रज्ञान रोवर… क्या-क्या हो चुका है 2 साल में? पढ़ें ISRO के मिशन की टाइमलाइन

Chandrayaan-3 Mission: इसरो के चंद्रयान-3 मिशन को 2 साल पूरे हो चुके हैं, जिसका विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर तो निष्क्रिय है, लेकिन प्रोपल्शन मोड्यूल एक्टिव है। आइए जानते हैं कि मिशन के तहत क्या-क्या डेटा जुटाया गया और क्या-क्या रिसर्च हो चुकी हैं?

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Written By: News24 हिंदी Updated: Aug 23, 2025 10:55
Chandrayaan-3 | Vikram Lander | Pragyan Rover
चंद्रयान-3 मिशन ने 23 अगस्त को ही चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग की थी।

Chandrayaan-3 Memoir: इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) के मिशन चंद्रयान-3 के 2 साल पूरे हो गए हैं। चंद्रयान-3 भारत का तीसरा चंद्र मिशन था, जो 14 जुलाई 2023 को लॉन्च किया गया था। 23 अगस्त 2023 को मिशन चंद्रमा की सतह पर लैंड हुआ था। इस उपलब्ध के साथ ही चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र मिशन लैंड कराने वाला पहला देश और चंद्रमा पर मिशन की लैंडिंग कराने वाला चौथा देश बन गया था। विक्रम लैंडर चंद्रमा पर उतरा था, जिससे प्रज्ञान रोवर निकला था, जो इस समय निष्क्रिय है।

चंद्रयान-3 का प्रोपल्शन मॉड्यूल है एक्टिव

वहीं रोवर द्वारा 14 दिन में कलेक्ट करके भेजा गया चंद्रमा का डेटा वैज्ञानिकों द्वारा चंद्रमा की सतह की रिसर्च और विश्लेषण के लिए उपयोग किया जा रहा है। वहीं चंद्रयान-3 मिशन का प्रोपल्शन मॉड्यूल आज भी चंद्रमा की कक्षा में एक्टिव है, जो SHAPE पेलोड के जरिए डेटा जुटा रहा है। इसरो का कहना है कि चंद्रयान-3 का डेटा आगामी मून मिशन LUPEX (लनर पोलर एक्सप्लोरेशन मिशन) का आधार बनेगा, जो जापान की JAXA (जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी) के साथ मिलकर साल 2028 में लॉन्च किया जाएगा।

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क्या है चंद्रयान-3 मिशन की ताजा स्थिति?

बता दें चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर 14 दिन के लिए डिजाइन किया गया था। 14 दिन चंद्रमा का एक दिन होता है। 23 अगस्त 2023 लैंडर और रोवर ने चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग की। 3 सितंबर 2023 तक दोनों एक्टिव रहे और चंद्रमा की सतह से डेटा कलेक्ट किया, लेकिन रात में चंद्रमा का तापमान -200 डिग्री तक पहुंच गया और लैंडर-रोवर में बिजली भी कम हेा गई तो इसरो ने लैंडर और रोवर को स्लीप मोड में डाल दिया, जिन्हें सितंबर 2023 में री-एक्टिव करने की कोशिश की गई, लेकिन वे एक्टिव नहीं हो पाए।

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वहीं चंद्रयान-3 मिशन का प्रोपल्शन मॉड्यूल चंद्रमा के 150 किलोमीटर के दायरे में परिक्रमा कर रहा है। स्पेस पोलरीमेट्री ऑफ हैबिटेबल प्लनेट अर्थ (SHAPE) के जरिए चंद्रमा की सतह का डेटा कलेक्ट कर रहा है। विक्रम लैंडर चंद्रमा की सतह का तापमान माप चुका है, जिसके अनुसार चंद्रमा की सतह का तापमान दिन में 50 डिग्री तक पहुंच जाता है। वहीं रात में -10 डिग्री तक गिर जाता है। यह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव का तापमान है, जहां बर्फ से ढका है। वहीं लैंडर और रोवर ने चंद्रमा की सतह के पास मिले प्लाज्मा का घनत्व भी मापा है।

लैंडर-रोवर ने रिकॉर्ड किया यह सब

लैंडर और रोवर ने प्लाज्मा का घनत्व मापकर जो डेटा भेजा है, उससे चंद्रमा के वायुमंडल की स्टडी होगी। दोनों ने चंद्रमा पर होने वाली भूकंपीय गतिविधियों को भी रिकॉर्ड किया है। 26 अगस्त 2023 को चंद्रमा पर आया छोटा भूकंप लैंडर-रोवर ने रिकॉर्ड किया था। दोनों को चंद्रमा की सतह पर सल्फर, एल्यूमीनियम, कैल्शियम, आयरन, टाइटेनियम और अन्य रासायनिक तत्व होने के संकेत भी मिले हैं। चंद्रमा पर सल्फर मिलने की खोज सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की रासायनिक संरचना का अध्ययन संभव हो सकेगा।

विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर ने चांद की सतह पर मिली मिट्टी और चट्टानों का विश्लेषण किया। लैंडर से निकले रोवर ने चंद्रमा पर 10 मीटर की दूरी तय की। साथ ही चंद्रमा की सतह पर अशोक स्तंभ और ISRO के लोगो की छाप छोड़ी। साल 2024 में ISRO ने मिशन के तहत जुटाए गए डेटा का अध्ययन किया। अपने ऑफिशियल पोर्टल के जरिए वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय को उपलब्ध कराया। इसरो के वैज्ञानिकों ने मिशन के तहत की गई रिसर्च पर आधारित कई शोध पत्र भी लिखे हैं, जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पानी-बर्फ की खोज पर केंद्रित हैं।

First published on: Aug 23, 2025 10:48 AM

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