चीफ इलेक्शन कमिश्नर को नियुक्त करने के कानून को केंद्र ने बताया सही, सुप्रीम कोर्ट ने फैसले को रखा सुरक्षित

Chief Election Commissioner Appointment: भारत के चीफ इलेक्शन कमिश्नर के अपॉइंटमेंट प्रॉसेस को लेकर विपक्ष पहले कई बार सवाल उठा चुका है, अब इस मसले पर सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा गया है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा है कि प्रधानमंत्री की भूमिका पर सवाल उठाने का बेस नहीं है.

Gyanesh Kumar Supreme Court ANI

Gyanesh Kumar and Supreme Court (ANI)

Centre Defends CEC Selection Process In SC: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) और इलेक्शन कमिश्नरों की नियुक्ति की मौजूदा प्रॉसेस को डिफेंड किया. सरकार ने कहा कि सिलेक्शन पैनल में प्रधानमंत्री के रोल पर सवाल उठाने का कोई आधार नहीं है. सरकार ने तर्क दिया कि संवैधानिक संस्थाओं को इस धारणा के आधार पर काम नहीं करना चाहिए कि कार्यपालिका लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ काम करेगी.

विज्ञापन

‘पीएम ऑफिस पर भरोसा’

केंद्र का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पीएम ऑफिस की संवैधानिक गरिमा और उस पर जनता का भरोसा है. उन्होंने कहा कि अपॉइंटमेंट प्रॉसेस में प्रधानमंत्री की भागीदारी पर संदेह करना अनुचित होगा. मेहता ने सिलेक्शन पैनल में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जैसे एक्सटर्नल अथॉरिटी को शामिल करने के तर्क पर भी सवाल उठाया और कहा कि यही तर्क कैबिनेट नियुक्तियों पर भी लागू हो सकता है.

विज्ञापन

अदालत ने आदेश को रखा सुरक्षित

इस मामले की सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने की. बेंच ने ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023’ की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया.

कानून के खिलाफ तर्क

इस कानून के तहत 3 सदस्यीय चयन समिति में CJI की जगह केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता भी शामिल होते हैं. याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इस कदम से नियुक्तियों पर सरकार का प्रभाव बढ़ जाता है और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता कमजोर होती है.

विज्ञापन

संविधान पीठ में भेजने की गुजारिश

केंद्र ने मामले को संविधान पीठ को भेजने का अनुरोध किया. सरकार का तर्क था कि इससे संविधान के अनुच्छेद 324 और संसद की विधायी शक्ति से जुड़े अहम सवाल उठते हैं. अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि इन संवैधानिक मुद्दों पर बड़ी बेंच की इंटरप्रेटेशन की जरूरत है.

कोर्ट का ऑब्जर्वेशन

सुनवाई के दौरान जस्टिस दत्ता ने साफ या कि कोर्ट की चिंता प्रधानमंत्री पर अविश्वास नहीं, बल्कि नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जनता का भरोसा सुनिश्चित करना है. बेंच ने दोनों पक्षों को लिखित दलीलें दाखिल करने की भी इजाजत दी, ताकि यह तय किया जा सके कि मामले को संविधान पीठ को भेजा जाए या नहीं.

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
... और पढ़ें
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ