Add News24 as a Preferred Source Add news 24 as a Preferred Source

---विज्ञापन---

देश

बस्तर में नक्सलवाद का ‘अंतिम अध्याय’, कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर 2000 जवानों की घेराबंदी

तेलंगाना - छत्तीसगढ़ सीमा पर स्थित कर्रेगुट्टा पहाड़ी को चारों ओर से घेरते हुए ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट-2’ लॉन्च किया गया है. इस ऑपरेशन में सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिलों से करीब 2000 जवानों की तैनाती की गई है.

Author
Written By: Kumar Gaurav Updated: Feb 21, 2026 20:37

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सल उन्मूलन की रणनीति अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है. एक तरफ व्यापक विकास और आत्मसमर्पण की नीति, तो दूसरी ओर सघन सैन्य दबाव- इन्हीं दो ध्रुवों के बीच अब सुरक्षा बलों ने सबसे बड़ा जमीनी अभियान शुरू किया है.

तेलंगाना – छत्तीसगढ़ सीमा पर स्थित कर्रेगुट्टा पहाड़ी को चारों ओर से घेरते हुए ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट-2’ लॉन्च किया गया है. इस ऑपरेशन में सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिलों से करीब 2000 जवानों की तैनाती की गई है, जो लगातार कॉम्बिंग और सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं.

---विज्ञापन---

खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, कर्रेगुट्टा लंबे समय से माओवादियों का सुरक्षित ठिकाना रहा है. हालिया इनपुट में यहां शीर्ष माओवादी नेताओं के साथ 100 से अधिक सशस्त्र कैडर की मौजूदगी की पुष्टि हुई है. यही वजह है कि इस बार रणनीति सिर्फ सर्च ऑपरेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि पहाड़ी की पूर्ण घेराबंदी कर भागने के रास्ते बंद करने पर फोकस किया गया है.

अधिकारियों के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक माओवादी हिंसा के समूल सफाए के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए इस ऑपरेशन को ‘डेडलाइन ड्रिवन’ मोड में चलाया जा रहा है. कर्रेगुट्टा के नीचे पहले से स्थापित अस्थायी कैंपों ने इस अभियान को लॉजिस्टिक बढ़त दी है – जहां से रसद, चिकित्सा और त्वरित सहायता की सप्लाई अब पहले से ज्यादा तेज और प्रभावी हो गई है.

---विज्ञापन---

यह कार्रवाई किसी एक ऑपरेशन का हिस्सा नहीं, बल्कि व्यापक ‘मिशन 2026’ रणनीति की कड़ी है, जिसके तहत बस्तर में नक्सल नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की योजना पर काम हो रहा है. पिछले दो वर्षों के आंकड़े इस बढ़ते दबाव की तस्वीर साफ करते हैं – 2024 में 217, 2025 में 256 और 2026 (अब तक) में 22 नक्सली मारे गए, जबकि गिरफ्तारियां और आत्मसमर्पण भी लगातार ऊंचे स्तर पर रहे हैं.

विशेष रूप से ‘पुना मार्गम’ अभियान ने नक्सल ढांचे को अंदर से कमजोर किया है. 2025 में रिकॉर्ड 1573 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जबकि 17 अक्टूबर 2025 को जगदलपुर में 210 नक्सलियों का सामूहिक सरेंडर इस रणनीति का सबसे बड़ा प्रतीक बना.

दूसरी ओर, सुरक्षा बलों की कार्रवाई ने संगठन के शीर्ष नेतृत्व को भी निशाने पर लिया है. 2024 से 2026 के बीच करीब 500 नक्सलियों के शव बरामद किए गए और कई CCM व DKSZCM स्तर के कमांडर या तो मारे गए या सरेंडर के लिए मजबूर हुए.

हालांकि, सिर्फ बंदूक के सहारे नहीं, बल्कि विकास को साथ लेकर चलना भी इस रणनीति का अहम हिस्सा है. 2025 में 58 और 2026 में 8 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं, जिन्हें ‘इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट सेंटर’ के रूप में विकसित किया जा रहा है. इन केंद्रों के जरिए शिक्षा, स्वास्थ्य, राशन, बैंकिंग और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं नक्सल प्रभावित इलाकों तक पहुंचाई जा रही हैं, ताकि स्थानीय आबादी का भरोसा जीता जा सके.

सामाजिक स्तर पर भी सरकार ने पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है. बस्तर ओलंपिक में 2024 में 1.65 लाख और 2025 में 3.91 लाख युवाओं की भागीदारी ने यह संकेत दिया है कि युवाओं को वैकल्पिक रास्ते दिए जा रहे हैं, वहीं ‘बस्तर पंडुम’ जैसे आयोजन सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत कर रहे हैं.

कर्रेगुट्टा ऑपरेशन को इसी व्यापक रणनीति का हार्ड पावर फेस माना जा रहा है. दरअसल, सुरक्षा एजेंसियों का आकलन है कि तेलंगाना और झारखंड में बढ़ते दबाव के बाद माओवादी अब सीमावर्ती दुर्गम इलाकों में सिमट गए हैं. ऐसे में कर्रेगुट्टा जैसे ठिकानों को खत्म करना उनके पुनर्गठन की संभावनाओं पर सीधा वार होगा.

गौरतलब है कि 2025 में इसी इलाके में हुए ऑपरेशन में 31 माओवादी मारे गए थे और भारी मात्रा में हथियार व विस्फोटक बरामद किए गए थे. इसके बावजूद यहां उनकी मौजूदगी बनी रहना इस बात का संकेत है कि अंतिम सफाया अभी बाकी है.

अब सवाल सिर्फ एक ऑपरेशन की सफलता का नहीं, बल्कि पूरे ‘मिशन 2026’ की विश्वसनीयता का है. अगर कर्रेगुट्टा जैसे मजबूत गढ़ ध्वस्त होते हैं, तो यह नक्सल नेटवर्क के लिए निर्णायक झटका साबित हो सकता है. फिलहाल, बस्तर में तस्वीर साफ है. एक तरफ 2000 जवानों की घेराबंदी, दूसरी तरफ विकास और पुनर्वास का मॉडल… और बीच में 31 मार्च की डेडलाइन. यानी, बंदूक और भरोसे के इस दोहरे दबाव के बीच बस्तर में नक्सलवाद के ‘अंतिम अध्याय’ की पटकथा लिखी जा रही है.

First published on: Feb 21, 2026 08:37 PM

संबंधित खबरें

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.