एअर इंडिया की फ्लाइट 181 धरती से करीब 31000 फीट (9400 मीटर) की ऊंचाई पर फ्लाई कर रही थी। नीचे खूबसूरत अटलांटिक महासागर और उसके किनारे बसा आयरलैंड था। फ्लाइट को 45 मिनट बाद लंदन में स्टॉप लेना था कि अचानक विमान के अंदर भयानक विस्फोट हुआ और आग भड़क गई। आग की लपटों से गिरा विमान तेजी से नीचे गया और टुकड़ों में बिखरकर अटलांटिक महासागर में गिर गया। बचाव दल मौके पर पहुंचा तो समुद्र में तेल, शव और सामान तैर रहा था। विमान 6700 फीट की गहराई में समा चुका था।
खालिस्तानी आतंकियों की साजिश का शिकार हुई फ्लाइट
खौफनाक विमान हादसा आज से 40 साल पहले 23 जून 1985 को आयरलैंड में हुआ था। कनाडा के टोरंटो से उड़ी फ्लाइट को लंदन और दिल्ली होते हुए मुंबई जाना था, लेकिन फ्लाइट खालिस्तानी आतंकियों की साजिश का शिकार हो गई। भारत ने कनाडा में एक्टिव बब्बर खालसा और इसके खालिस्तानी आतंकियों पर साजिश रचने का आरोप लगाया, लेकिन कनाडा इससे इनकार करता रहा। अब कनाडा ने पहली बार आधिकारिक तौर पर कबूल किया है कि 1985 में हुए विमान हादसे के पीछे कनाडा के खालिस्तानी आतंकियों का हाथ था।
कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस की फेसबुक पोस्ट
कनाडा की खुफिया एजेंसी कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस( CSIS) ने फेसबुक पोस्ट लिखकर विमान हादसे में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी और हादसे को ‘जघन्य आतंकवादी हमला’ बताया। CSIS ने मान लिया है कि 23 जून 1985 को कनाडा में मौजूद खालिस्तानी आतंकियों ने एअर इंडिया के विमान को उड़ा दिया था, जिससे उसमें सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई थी। यह हमला एक आतंकी हमला था और कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला है, जिसने कनाडा के माथे पर कभी न धुलने वाला दाग लगाया।
टोरंटो से वाया लंदन-दिल्ली फ्लाइट मुंबई में लैंड होनी थी
23 जून 1985 को रात करीब 12 बजे एअर इंडिया के बोइंग 747 (कनिष्क) प्लेन में फ्लाइट 181 ने टोरंटो के मॉन्ट्रियल एअरपोर्ट से उड़ान भरी। फ्लाइट को एक बजे के करीब लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर स्टॉप लेना था। वहां से फ्लाइट 182 ने दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरनी थी और यहां से फ्लाई करके मुंबई के छत्रपति शिवाजी एयरपोर्ट पर लैंड करना था। विमान में भारत के 22 क्रू मेंबर्स और 307 यात्री थे। 307 यात्रियों में से 268 कनाडा के नागरिक थे, जिनमें 84 बच्चे शामिल थे। वहीं ब्रिटेन के 27 यात्री भी थे।
आयरलैंड में एंट्री करते ही कार्गो होल्ड में धमाका हुआ था
रिकॉर्ड के अनुसार, ज्यादातर यात्री भारतीय मूल के निवासी थे, जो अपने घर लौट रहे थे या रिश्तेदारों से मिलने जा रहे थे। आयरलैंड के स्पेस में एंट्री करते समय फ्लाइट के पायलट कैप्टन नरेंद्र सिंह हंस ने एअर ट्रैफिक कंट्रोलर से परमिशन मांगी। कॉकपिट में उनके साथ को-पायलट सतविंदर सिंह भिंडर थे। आयरिश ATC ने आसमान साफ बताते हुए आगे बढ़ने की परमिशन दी। इस बीच विमान के कार्गो होल्ड में एक जोरदार धमाका हुआ, जिसकी आवाज ATC अधिकारियों ने भी सुनी और फिर विमान उनके रडार से गायब हो गया।
329 लोगों में से सिर्फ 141 लोगों की लाशें बरामद हुई थीं
वहीं धमाका होने से विमान के पिछले और अगले हिस्से में दरारें आ गईं। विमान 2 टुकड़ों में बंट गया और आग की लपटों से घिरे लोग नीचे गिरने लगे। देखते ही देखते विमान नीचे समुद्र में गिर गया। जांच में पता चला कि सूटकेस वाला टाइम बम फटा था। बचाव दल को 329 में से 141 लाशें मिलीं। 188 शव समुद्र की गहराइयों में खो गए थे। कुछ लोगों की मौत आग में जलने, कुछ लोगों की मौत ऑक्सीजन की कमी से और कुछ लोगों की मौत पानी में डूबने ने कारण हुई थी। वहीं उस दिन आयरलैंड ने जो मंजर देखा, उसे वह आज तक नहीं भूला।
एअर इंडिया की फ्लाइट 181 धरती से करीब 31000 फीट (9400 मीटर) की ऊंचाई पर फ्लाई कर रही थी। नीचे खूबसूरत अटलांटिक महासागर और उसके किनारे बसा आयरलैंड था। फ्लाइट को 45 मिनट बाद लंदन में स्टॉप लेना था कि अचानक विमान के अंदर भयानक विस्फोट हुआ और आग भड़क गई। आग की लपटों से गिरा विमान तेजी से नीचे गया और टुकड़ों में बिखरकर अटलांटिक महासागर में गिर गया। बचाव दल मौके पर पहुंचा तो समुद्र में तेल, शव और सामान तैर रहा था। विमान 6700 फीट की गहराई में समा चुका था।
खालिस्तानी आतंकियों की साजिश का शिकार हुई फ्लाइट
खौफनाक विमान हादसा आज से 40 साल पहले 23 जून 1985 को आयरलैंड में हुआ था। कनाडा के टोरंटो से उड़ी फ्लाइट को लंदन और दिल्ली होते हुए मुंबई जाना था, लेकिन फ्लाइट खालिस्तानी आतंकियों की साजिश का शिकार हो गई। भारत ने कनाडा में एक्टिव बब्बर खालसा और इसके खालिस्तानी आतंकियों पर साजिश रचने का आरोप लगाया, लेकिन कनाडा इससे इनकार करता रहा। अब कनाडा ने पहली बार आधिकारिक तौर पर कबूल किया है कि 1985 में हुए विमान हादसे के पीछे कनाडा के खालिस्तानी आतंकियों का हाथ था।
कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस की फेसबुक पोस्ट
कनाडा की खुफिया एजेंसी कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस( CSIS) ने फेसबुक पोस्ट लिखकर विमान हादसे में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी और हादसे को ‘जघन्य आतंकवादी हमला’ बताया। CSIS ने मान लिया है कि 23 जून 1985 को कनाडा में मौजूद खालिस्तानी आतंकियों ने एअर इंडिया के विमान को उड़ा दिया था, जिससे उसमें सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई थी। यह हमला एक आतंकी हमला था और कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला है, जिसने कनाडा के माथे पर कभी न धुलने वाला दाग लगाया।
टोरंटो से वाया लंदन-दिल्ली फ्लाइट मुंबई में लैंड होनी थी
23 जून 1985 को रात करीब 12 बजे एअर इंडिया के बोइंग 747 (कनिष्क) प्लेन में फ्लाइट 181 ने टोरंटो के मॉन्ट्रियल एअरपोर्ट से उड़ान भरी। फ्लाइट को एक बजे के करीब लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर स्टॉप लेना था। वहां से फ्लाइट 182 ने दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरनी थी और यहां से फ्लाई करके मुंबई के छत्रपति शिवाजी एयरपोर्ट पर लैंड करना था। विमान में भारत के 22 क्रू मेंबर्स और 307 यात्री थे। 307 यात्रियों में से 268 कनाडा के नागरिक थे, जिनमें 84 बच्चे शामिल थे। वहीं ब्रिटेन के 27 यात्री भी थे।
आयरलैंड में एंट्री करते ही कार्गो होल्ड में धमाका हुआ था
रिकॉर्ड के अनुसार, ज्यादातर यात्री भारतीय मूल के निवासी थे, जो अपने घर लौट रहे थे या रिश्तेदारों से मिलने जा रहे थे। आयरलैंड के स्पेस में एंट्री करते समय फ्लाइट के पायलट कैप्टन नरेंद्र सिंह हंस ने एअर ट्रैफिक कंट्रोलर से परमिशन मांगी। कॉकपिट में उनके साथ को-पायलट सतविंदर सिंह भिंडर थे। आयरिश ATC ने आसमान साफ बताते हुए आगे बढ़ने की परमिशन दी। इस बीच विमान के कार्गो होल्ड में एक जोरदार धमाका हुआ, जिसकी आवाज ATC अधिकारियों ने भी सुनी और फिर विमान उनके रडार से गायब हो गया।
329 लोगों में से सिर्फ 141 लोगों की लाशें बरामद हुई थीं
वहीं धमाका होने से विमान के पिछले और अगले हिस्से में दरारें आ गईं। विमान 2 टुकड़ों में बंट गया और आग की लपटों से घिरे लोग नीचे गिरने लगे। देखते ही देखते विमान नीचे समुद्र में गिर गया। जांच में पता चला कि सूटकेस वाला टाइम बम फटा था। बचाव दल को 329 में से 141 लाशें मिलीं। 188 शव समुद्र की गहराइयों में खो गए थे। कुछ लोगों की मौत आग में जलने, कुछ लोगों की मौत ऑक्सीजन की कमी से और कुछ लोगों की मौत पानी में डूबने ने कारण हुई थी। वहीं उस दिन आयरलैंड ने जो मंजर देखा, उसे वह आज तक नहीं भूला।