डायबिटीज और हार्ट की बीमारियां आजकल दुनिया भर में सबसे कॉमन हेल्थ प्रॉब्लम्स में शामिल हैं। ये दोनों बीमारियां एक-दूसरे से भी संबंध रखती हैं और कई बार एक का इलाज दूसरे की समस्या को बढ़ा भी देता है। लेकिन हाल ही में एक नई स्टडी ने इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और उम्मीद भरी रिसर्च की है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि डायबिटीज की दवाएं न सिर्फ ब्लड शुगर को नियंत्रित करती हैं, बल्कि ये हार्ट की बीमारियों के इलाज में भी मददगार साबित हो सकती हैं।
यह खोज न सिर्फ डायबिटीज और हार्ट के मरीजों के लिए एक नई आशा की किरण है बल्कि यह मेडिकल साइंस द्वारा लिया गया महत्वपूर्ण कदम भी है। नए अध्ययन के अनुसार, सेमाग्लूटाइड एक आम एंटी-डायबिटीज दवा है जो दिल के दौरे और स्ट्रोक जैसी कंडीशन्स की संभावनाओं को कम कर सकती है।
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क्या कहती है स्टडी?
अमेरिका के उत्तरी कैरोलिना विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया कि सेमाग्लूटाइड का मौखिक रूप टाइप-2 डायबिटीज, एथेरोस्क्लेरोटिक कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (जिसमें वसा के जमाव के कारण धमनियां सख्त हो जाती हैं) और क्रोनिक किडनी डिजीज से पीड़ित लोगों में हृदय संबंधी घटनाओं को कम करने में मदद कर सकता है।
विश्वविद्यालय में मेडिसिन डिपार्टमेंट के प्रोफेसर और डायबिटीज केयर सेंटर के डायरेक्टर एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और स्टडी के प्रमुख लेखक जॉन ब्यूस बताते हैं कि शुगर के मरीजों में दिल के दौरे और स्ट्रोक को कम करने के लिए सेमाग्लूटाइड प्रमुख दवा के रूप में मौजूद थी।
शुगर और हृदय रोग का संबंध समझें
इन दोनों बीमारियों के बीच में गहरा नाता है। ये दोनों एक-दूसरे का कारण भी हैं और एक-दूसरे को बढ़ावा भी देती हैं। भारत, जहां शुगर को सबसे जटिल बीमारी माना जाता है, वहीं दिल की बीमारियां भी दूसरी सबसे जटिल और गंभीर बीमारी का रूप ले रही हैं। शुगर में ब्लड शुगर लेवल का स्तर लगातार अनियमित होने से ब्लड वेस्लस को नुकसान पहुंचता है। यह हार्ट की बीमारियों के रिस्क को बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाता है। मधुमेह रोगियों में कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और ओबेसिटी की समस्याएं आम होती हैं, जो एक और कारण है हार्ट अटैक आने का।
अध्ययन में शामिल थे कई लोग
इस अध्ययन को करने के लिए रिसर्च टीम ने 50 वर्ष और उससे अधिक आयु के 9,650 लोगों को शामिल किया था। इन लोगों पर टेस्टिंग करने से पहले यह पता लगाया गया है कि लोगों को कार्डियो प्रॉब्लम्स और किडनी डिजीज भी होते हैं या नहीं। सभी प्रतिभागियों को उनकी इच्छानुसार नियमित रूप से प्रतिदिन एक बार मौखिक 14 ग्राम सेमाग्लूटाइड या प्लेसबो एंटी-डायबिटिक मेडिसिन दी गई।
शोध के परिणाम
शोध के बाद टीम ने विस्तारित रूप से बताया कि टाइप-2 डायबिटीज के रोगियों में और एथेरोस्क्लेरोटिक हार्ट डिजीज, क्रोनिक किडनी डिजीज या दोनों से पीड़ित व्यक्तियों में सेमाग्लूटाइड के उपयोग का असर बहुत ही आशाजनक था। इन लोगों में हार्ट डिजीज के रिस्क को कम करने में काफी सहायता मिली है। वहीं, जिन्हें प्लेसबो मेडिसिन दी गई उनमें कम असर पाया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि इस दवा का असर नॉन फेटल मायोकार्डियल इन्फार्क्शन वाले दिल के अटैक के रिस्क को भी कम करता है। हालांकि, इस प्रकार के अटैक में जान जाने का जोखिम पहले से भी कम होता है।
मरीजों के लिए फायदेमंद
डायबिटीज और हृदय रोग वाले मरीजों के लिए यह राहत की बात हो सकती है। पहले, उन्हें अलग-अलग दवाइयां लेनी पड़ती थीं लेकिन अब एक ही दवा की मदद से दोनों समस्याओं का इलाज किया जा सकता है, जिससे इलाज की प्रक्रिया आसान और प्रभावी हो जाती है। इससे मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
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