संभल में 250 फीट गहरी बावड़ी! धरती फिर उगल रही पुराना इतिहास, जानें अब तक क्या कुछ मिल चुका?

UP Sambha Rani Ki Bawdi: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में 2 मंदिरों के बाद रानी की बावड़ी मिली है, जो करीब 250 फीट गहरी और 3 मंजिला इमारत है। मंदिर मिलने के बाद नक्शे के आधार पर खुदाई चल रही है, जिसमें नक्शे में दिखी चीजें मिल भी रही हैं।

Sambhal Rani Ki Bawdi

संभल में मिली रानी की बावड़ी के बारे में बताते अधिकारी।

Rani Ki Bawdi Discovered in Sambhal: उत्तर प्रदेश के संभल जिले की धरती आए दिन इतिहास के राज उगल रही है। आए दिन धरती के नीचे से सालों पुरानी चीजे बरामद हो रही हैं। पहले शिव मंदिर मिला, फिर राधा कृष्ण मंदिर मिला और अब 250 फीट गहरी करीब 3 मंजिला विशालकाय और ऐतिहासिक रानी की बावड़ी मिली है। जिसमें एक सुरंग और 4 कमरे अभी तक मिल चुके हैं।

विज्ञापन

JCB से खुदाई चंदौसी इलाके में लक्ष्मण गंज क्षेत्र में चल रही है, जिसके बारे में कहा जाता है कि साल 1857 से पवहले हिंदू बहुल इलाका था और सैनी समाज के लोग यहां रहते थे, लेकिन आजकल यह मुस्लिम बहुल इलाका है। इसलिए माना जा रहा है कि संभल में हिंदुओं के जो धार्मिक स्थल, महल, घर, बावड़ियां थीं, उन्हें मिट्टी भरकर बंद कर दिया गया था और मुस्लिमों ने अपनी बस्ती बसा लिया।

विज्ञापन

नक्शे के अनुसार खुदाई की तो बावड़ी मिली

भारतीय पुरातत्व विभाग- ASI आजकल संभल के प्राचीन मंदिरों और तीर्थों का सर्वे कर रही है, इसी दौरान एक प्लॉट की खुदाई में यह बावड़ी मिली। शनिवार केा राजस्व विभाग के नायब तहसीलदार धीरेंद्र सिंह इलाके का नक्शा लेकर आए और उस जगह खुदाई शुरू की, जहां नक्शे में बावड़ी दिखाई गई है। उन्होंने बताया कि एक शिकायती पत्र मिलने के बाद उन्होंने नक्शा तलाशा और इसके अनुसार इलाके की खुदाई कराने का फैसला लिया।

विज्ञापन

लेटर में बताया गया कि यह बावड़ी सहसपुर के राजा की महारानी सुरेंद्र बाला देवी की रियासत का हिस्सा थी। पहली खुदाई सफल साबित हुई और बावड़ी मिल गई। 2 मंजिला इमारत दिखी है, जिसमें एक सुरंग नजर आ रही और कमरे भी हैं। यह बावड़ी काफी गहरी और विशाल है। नक्शे में जहां तक इस बावड़ी का एरिया नजर आ रहा है, वहां तक खुदाई की जाएगी। यह खोज उत्तर प्रदेश के इतिहास और संस्कृति के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।

विज्ञापन

14 दिसंबर से जारी इतिहास खंगालने का सिलसिला

बता दें कि 14 दिसंबर दिन शनिवार से ही संभल में इतिहास खंगालने का सिलसिला जारी है। मस्जिद के सर्वे से विवाद शुरू हुआ था। कोर्ट ने संभल में शाही जामा मस्जिद की वीडियो और फोटोग्राफी का आदेश दिया। हिंदू कहते हैं कि यह मस्जिद नहीं, श्रीहरिहर का मंदिर है। 19 नवंबर को पुलिस की मौजूदगी में सर्वे कराया गया। इससे मुस्लिम भड़क गए। 22 नवंबर को जुमे की नमाज के दिन इलाके में तनाव के चलते पुलिस बल तैनात किया गया।

24 नवंबर को फिर जामा मस्जिद में सर्वे करने टीम गई। इस दौरान जुटी भीड़ और पुलिस में टकराव हो गया। पत्थरबाजी और हिंसा में 4 लोगों की मौत हो गई थी। उपद्रवियों की तलाश में पुलिस को बिजली चोरी का मामला मिला। 14 दिसंबर को खग्गुसराय के दीपा राय इलाके में चेकिंग के समय एक मंदिर मिल गया, जो 46 साल पुराना शिव मंदिर था। इसके आंगन में एक कुंआ मिला। संभल के ही सरायतरीन इलाके में राधा कृष्ण का मंदिर मिला और अब बावड़ी मिली है।

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
... और पढ़ें
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ