अमेरिका में जन्मजात नागरिकता यानी बर्थराइट सिटिजनशिप को लेकर ट्रंप सरकार को सुप्रीम कोर्ट से उस समय बड़ा झटका मिला, जब न्यायालय ने नागरिकता खत्म करने के फैसले को रद्द कर दिया. अब डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से सुप्रीम कोर्ट को उसके फैसले पर पुनर्विचार करने की याचिका दायर करने का फैसला किया है. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 30 जून को छह-तीन के बहुमत से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश को असंवैधानिक करार देते हुए खारिज कर दिया था. अमेरिका में इस विवाद के बाद अब लोग भारत की नागरिकता पर भी रिसर्च करने लगे हैं. क्या भारत में भी बर्थराइट सिटिजनशिप जैसे कोई प्रावधान है?
क्या है अमेरिका की बर्थराइट सिटिजनशिप?
अमेरिका में जन्मजात नागरिकता यानी बर्थराइट सिटिजनशिप का आधार वहां के संविधान का 14वां संशोधन है, जो 1868 में गृह युद्ध के बाद जोड़ा गया था. इस संशोधन की नागरिकता धारा में साफ लिखा है कि अमेरिका में जन्मा या नेचुरली नागरिकता पाने वाला हर व्यक्ति, जो अमेरिकी अधिकार क्षेत्र के अधीन है, अमेरिका और उस राज्य का नागरिक होगा जहां वह रहता है. आसान भाषा में कहें तो अमेरिकी धरती पर जन्म लेने वाला लगभग हर बच्चा अपने आप वहां का नागरिक बन जाता है, चाहे उसके माता-पिता की नागरिकता या कानूनी स्थिति कुछ भी हो.
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क्या भारत में भी है बर्थराइट सिटिजनशिप?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में कई शर्तें पूरी होने के बाद ही जन्मजात नागरिकता मिलती है. भारत में नागरिकता अधिनियम 1955 इस प्रावधान को कंट्रोल करता है, लेकिन समय के साथ इसमें कई बड़े बदलाव किए जा चुके हैं. शुरुआती दौर में भारत में भी अमेरिका जैसी व्यवस्था थी, यानी भारतीय भूमि पर जन्म लेने वाला हर व्यक्ति नागरिक माना जाता था. लेकिन बढ़ती अवैध घुसपैठ की चिंताओं के बीच 1986 में कानून में संशोधन कर यह प्रावधान जोड़ा गया कि नागरिकता के लिए माता-पिता में से कम से कम एक का भारतीय नागरिक होना जरूरी है.
2003 में हुआ हम संशोधन
इसके बाद 2003 में एक और महत्वपूर्ण संशोधन हुआ, जिसके तहत नियम और कड़े कर दिए गए. अब स्थिति यह है कि अगर किसी बच्चे का जन्म भारत में हुआ है, तो नागरिकता तभी मिलेगी जब या तो उसके माता-पिता दोनों भारतीय नागरिक हों, या फिर एक माता-पिता भारतीय नागरिक हो और दूसरा उस समय अवैध प्रवासी न हो. यानी भारत ने भी अमेरिका से पहले ही अपने नागरिकता कानूनों को माता-पिता की स्थिति से जोड़ते हुए काफी सख्त बना लिया है.
यह भी पढ़ें: 15 दस्तावेज़ दिखाने के बाद भी नागरिकता नहीं साबित कर पाया असम का शख्स, आपको भी जान लेनी चाहिए वजह
अमेरिका में जन्मजात नागरिकता यानी बर्थराइट सिटिजनशिप को लेकर ट्रंप सरकार को सुप्रीम कोर्ट से उस समय बड़ा झटका मिला, जब न्यायालय ने नागरिकता खत्म करने के फैसले को रद्द कर दिया. अब डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से सुप्रीम कोर्ट को उसके फैसले पर पुनर्विचार करने की याचिका दायर करने का फैसला किया है. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 30 जून को छह-तीन के बहुमत से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश को असंवैधानिक करार देते हुए खारिज कर दिया था. अमेरिका में इस विवाद के बाद अब लोग भारत की नागरिकता पर भी रिसर्च करने लगे हैं. क्या भारत में भी बर्थराइट सिटिजनशिप जैसे कोई प्रावधान है?
क्या है अमेरिका की बर्थराइट सिटिजनशिप?
अमेरिका में जन्मजात नागरिकता यानी बर्थराइट सिटिजनशिप का आधार वहां के संविधान का 14वां संशोधन है, जो 1868 में गृह युद्ध के बाद जोड़ा गया था. इस संशोधन की नागरिकता धारा में साफ लिखा है कि अमेरिका में जन्मा या नेचुरली नागरिकता पाने वाला हर व्यक्ति, जो अमेरिकी अधिकार क्षेत्र के अधीन है, अमेरिका और उस राज्य का नागरिक होगा जहां वह रहता है. आसान भाषा में कहें तो अमेरिकी धरती पर जन्म लेने वाला लगभग हर बच्चा अपने आप वहां का नागरिक बन जाता है, चाहे उसके माता-पिता की नागरिकता या कानूनी स्थिति कुछ भी हो.
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क्या भारत में भी है बर्थराइट सिटिजनशिप?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में कई शर्तें पूरी होने के बाद ही जन्मजात नागरिकता मिलती है. भारत में नागरिकता अधिनियम 1955 इस प्रावधान को कंट्रोल करता है, लेकिन समय के साथ इसमें कई बड़े बदलाव किए जा चुके हैं. शुरुआती दौर में भारत में भी अमेरिका जैसी व्यवस्था थी, यानी भारतीय भूमि पर जन्म लेने वाला हर व्यक्ति नागरिक माना जाता था. लेकिन बढ़ती अवैध घुसपैठ की चिंताओं के बीच 1986 में कानून में संशोधन कर यह प्रावधान जोड़ा गया कि नागरिकता के लिए माता-पिता में से कम से कम एक का भारतीय नागरिक होना जरूरी है.
2003 में हुआ हम संशोधन
इसके बाद 2003 में एक और महत्वपूर्ण संशोधन हुआ, जिसके तहत नियम और कड़े कर दिए गए. अब स्थिति यह है कि अगर किसी बच्चे का जन्म भारत में हुआ है, तो नागरिकता तभी मिलेगी जब या तो उसके माता-पिता दोनों भारतीय नागरिक हों, या फिर एक माता-पिता भारतीय नागरिक हो और दूसरा उस समय अवैध प्रवासी न हो. यानी भारत ने भी अमेरिका से पहले ही अपने नागरिकता कानूनों को माता-पिता की स्थिति से जोड़ते हुए काफी सख्त बना लिया है.
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