CM विजय फ्लोर टेस्ट की 'अग्निपरीक्षा' में पास हुए या फेल? क्या सभी नए मुख्यमंत्री के लिए जरूरी होता है विश्वास मत

फ्लोर टेस्ट के दौरान मतदान दो तरीकों से हो सकता है. पहला तरीका वॉयस वोट यानी ध्वनि मत का होता है जिसमें विधायक अपने पक्ष में ‘हां’ या ‘ना’ कहकर रुख जाहिर करते हैं. दूसरा तरीका डिविजन वोट होता है जिसमें विधायकों की गिनती अलग-अलग की जाती है या इलेक्ट्रॉनिक तरीके से मतदान कराया जाता है.

CM Vijay

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद प्रदेश में सरकार बनाने की जद्दोजहद उस समय खत्म हुई जब टीवीके प्रमुख और एक्टर से राजनेता बने जोसेफ विजय (थलापति विजय) को कांग्रेस समेत कई छोटी पार्टियों का समर्थन मिला. 10 मई को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद सीएम विजय को विधानसभा में आज (13 मई) फ्लोर टेस्ट की ‘अग्निपरीक्षा’ से गुजरना पड़ा. एक समय समर्थन के लिए दर-दर की ठोकर खाने वाले विजय को फ्लोर टेस्ट में प्रचंड बहुमत मिला और उनके समर्थन में 144 वोट पड़े. वहीं, 22 विधायकों ने विश्वास प्रस्वात के विरोध में वोट डाला है.

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क्यों जरूरी होता है फ्लोर टेस्ट?


फ्लोर टेस्ट की अग्निपरीक्षा पास करने के बाद अब जोसेफ विजय तमिलनाडु के पूर्ण रूप से संवैधानिक मुख्यमंत्री बन गए हैं. हालांकि उनके फ्लोर टेस्ट के बाद कई लोगों के मन में ये सवाल भी उठ रहा है कि आखिर राज्यपाल की अनुमति और सीएम पद की शपथ लेने के बाद भी आखिर मुख्यमंत्री विजय को प्रदेश की विधानसभा में विश्वास मत हासिल करना क्यों करना पड़ा? क्या सभी नए मुख्यमंत्री को विश्वास मत हासिल करना जरूरी होता है? अगर आप इन सवालों का जवाब नहीं जानते तो आज आपकी ये दुविधा भी दूर हो जाएगी.

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क्या सभी नए सीएम के लिए फ्लोर टेस्ट जरूरी?


नहीं ऐसा जरूरी नहीं है. तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिति पर नजर डालें तो राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने एक नहीं बल्कि कई बार विजय का सरकार बनाने का प्रस्ताव इसलिए खारिज कर दिया, क्योंकि उनके पास बहुमत के लिए अनिवार्य 118 विधायकों के हस्ताक्षर नहीं थे. ऐसे में विजय की टीवीके सरकार को अन्य पार्टियों से समर्थन लेना पड़ा, जिसके बाद तमिलनाडु में मिली-जुली सरकार का गठन हुआ, जिसे गठबंधन की सरकार भी कहा जा सकता है.

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फ्लोर टेस्ट क्या होता है और क्यों है अहम?


गठबंधन सरकार में मुख्यमंत्री और मंत्रियों की शपथ के बाद भी विपक्ष को अगर विधानसभा में बहुमत को लेकर संदेह होता है, तो वह सरकार या सरकार बनाने का दावा करने वाले दल को फ्लोर टेस्ट के लिए कह सकता है. यह वही प्रक्रिया है, जिसके जरिए विधानसभा में यह तय किया जाता है कि किसके पास वास्तव में बहुमत है.

फ्लोर टेस्ट को आसान भाषा में विश्वास मत भी कहा जाता है. इसमें सरकार बनाने का दावा करने वाले नेता को विधानसभा में यह साबित करना होता है कि उसके पास सदस्यों का पर्याप्त समर्थन है. यह स्थिति आम तौर पर तब बनती है जब सरकार अल्पमत में आ जाती है, गठबंधन टूटने लगता है या विपक्ष बहुमत पर सवाल उठाता है. ऐसे में सदन के भीतर मतदान के जरिए स्थिति साफ की जाती है.

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क्या होता है कंपोजिट फ्लोर टेस्ट?


इस प्रक्रिया का एक और रूप कंपोजिट फ्लोर टेस्ट है. यह तब कराया जाता है जब एक से अधिक पक्ष सरकार बनाने का दावा करते हैं और यह स्पष्ट नहीं होता कि किसके पास ज्यादा समर्थन है. ऐसे मामलों में राज्यपाल विशेष सत्र बुलाकर सदन में यह जांचने का निर्देश दे सकते हैं कि किस दल या गठबंधन के पक्ष में अधिक विधायक हैं.

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कैसे होता फ्लोर टेस्ट के लिए वोट?


आपको बता दें कि फ्लोर टेस्ट के दौरान मतदान दो तरीकों से हो सकता है. पहला तरीका वॉयस वोट यानी ध्वनि मत का होता है जिसमें विधायक अपने पक्ष में ‘हां’ या ‘ना’ कहकर रुख जाहिर करते हैं. दूसरा तरीका डिविजन वोट होता है जिसमें विधायकों की गिनती अलग-अलग की जाती है या इलेक्ट्रॉनिक तरीके से मतदान कराया जाता है. कई बार पर्ची के जरिए भी वोटिंग होती है. अगर मत बराबर पड़ जाते हैं, तो विधानसभा अध्यक्ष निर्णायक वोट डाल सकते हैं.

फ्लोर टेस्ट में फेल हो गए तो क्या?


अगर फ्लोर टेस्ट में कोई भी दल बहुमत साबित नहीं कर पाता, तो राज्यपाल के पास राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करने का विकल्प रहता है. हालांकि यह आखिरी उपाय माना जाता है. राजनीतिक संकट की स्थिति में अक्सर दल अंतिम समय पर गठबंधन या समर्थन जुटाकर बहुमत साबित करने की कोशिश करते हैं, ताकि सरकार गिरने से बच सके.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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