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मनोज कुमार को ‘मास्टर ऑफ नेशनलिज्म’ क्यों कहते थे शत्रुघन सिन्हा? खास है वजह

मनोज कुमार सच्चे देशभक्त थे और वो भारत के हर युवा के लिए आशा का प्रतीक थे। शत्रुघन सिन्हा तो उन्हें 'मास्टर ऑफ नेशनलिज्म' कहते थे।

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आज पूरा देश मातम मना रहा है क्योंकि एक सच्चा देशभक्त इस दुनिया को अलविदा कह गया है। मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में आज सुबह 3:30 बजे दिग्गज एक्टर मनोज कुमार का निधन हो गया। अब हर कोई उन्हें याद कर भावुक हो रहा है। उनके साथ काम कर चुके कलाकार मनोज कुमार को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। वहीं, क्या आप जानते हैं एक्टर शत्रुघन सिन्हा ने मनोज कुमार को ‘मास्टर ऑफ नेशनलिज्म’ का टाइटल दिया था?

‘क्रांति’ में शत्रुघ्न सिन्हा ने मनोज कुमार संग किया था काम

साल 1981 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘क्रांति’ में शत्रुघ्न सिन्हा ने मनोज कुमार के साथ काम किया था। इसके बाद से ही वो उन्हें ‘मास्टर ऑफ नेशनलिज्म’ कहा करते थे। शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा था, ‘भारत बनकर मनोज कुमार ने अपनी फिल्मों में जो किरदार निभाए हैं, वो हर युवा भारतीय के लिए आशा का प्रतीक बन गए। ‘रोटी कपड़ा और मकान’ में उन्होंने बेरोजगारी का मुद्दा सामने लाया। ‘पूरब और पश्चिम’ में उन्होंने दिमागी ब्रेन ड्रेन की बात की।’

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सच्चे देशभक्त थे मनोज कुमार

उन्होंने आगे कहा, ‘महंगाई मार गई’ और बाद में ‘है प्रीत जहां की रीत सदा’ गानों ने मनोज कुमार को राष्ट्रवाद को दर्शाता ब्रांड बना दिया। वो आजकल के झूठे देशभक्तों की तरह नहीं थे, मनोज कुमार एक सच्चे देशभक्त थे। हमारी बंटी हुई फिल्म इंडस्ट्री में मैं उन्हें राष्ट्रवाद के प्रतीक के रूप में सलाम करता हूं।’ आपको बता दें, डायरेक्टर संजय लीला भंसाली भी मनोज कुमार के बाद फैन रहे हैं।

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संजय लीला भंसाली भी थे मनोज कुमार के फैन

संजय लीला भंसाली ने मनोज कुमार को लेकर कहा था, मनोज साब फिल्ममेकिंग की टेक्स्ट बुक थे। जिस जुनून के साथ उन्होंने अपनी फिल्मों की शूटिंग की, वो उनके सिनेमा के हर फ्रेम में दिखाई देता है। मैंने मनोज कुमार से हर शॉट में अपना 100% देना सीखा। देश के लिए उनका प्यार सच्चा था। मनोज कुमार एक सच्चे देशभक्त थे।’ ‘उपकार’, ‘पूरब और पश्चिम’ और ‘रोटी कपड़ा और मकान’ जैसी उनकी फिल्में काफी कुछ सिखाती हैं।

First published on: Apr 04, 2025 03:01 PM

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About the Author

Subhash K Jha

सुभाष के झा आजीवन लता मंगेशकर, हिंदी सिनेमा और विश्व सिनेमा के प्रशंसक रहे हैं। उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया से लेकर E24 तक लगभग हर प्रमुख अंग्रेजी भाषा के प्रकाशन में अपना योगदान दिया है। लेखन के अवसरों की उनकी तलाश जारी है। उनके आदर्श पर उनकी जीवनी पर काम चल रहा है।

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Ishika Jain

सुभाष के झा आजीवन लता मंगेशकर, हिंदी सिनेमा और विश्व सिनेमा के प्रशंसक रहे हैं। उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया से लेकर E24 तक लगभग हर प्रमुख अंग्रेजी भाषा के प्रकाशन में अपना योगदान दिया है। लेखन के अवसरों की उनकी तलाश जारी है। उनके आदर्श पर उनकी जीवनी पर काम चल रहा है।

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