Deeksha Priyadarshi
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Bollywood actors who flopped in politics: बॉलीवुड के कई सेलेब्स ऐसे हैं जिनका पॉलिटिकल करियर शुरू होने के कुछ समय बाद ही पूरी तरह फ्लॉप हो गया। कई बार पॉलिटिकल पार्टी फेमस सेलिब्रिटी का चेहरा महज इसलिए इस्तेमाल करती हैं, ताकि एक जाना-माना चेहरा होने के बाद उन्हें फायदा मिले। क्या फ्लॉप पॉलिटिकल करियर के लिए के जाने जाने वाले सेलेब्स ने पार्टी की तरकीब के लिए राजनिती ज्वाइन की थी। आखिर जीत हासिल करने के बाद भी क्यों इन सेलेब्स पर राजनीति के दाव पेंच भारी पड़ गए और उन्होंने इससे दूरी बना ली। आइए जानते हैं कैसा रहा उन सेलेब्स का राजनीतिक सफर।
बॉलीवुड के शहनशाह कहे जाने वाले अमिताभ बच्चन ने 1984 में अपने एक्टिंग करियर से ब्रेक लिया और दोस्त राजीव गांधी के कहने पर राजनीति में कदम रखा। उन्होंने कांग्रेस पार्टी के टिकट पर इलाहाबाद यानी प्रयागराज सीट से चुनाव लड़े और जीत हासिल की। हालांकि, 3 साल बाद ही अमिताभ ने बोफोर्स घोटाले विवाद की वजह से 1987 में सांसद और राजनेता के पद से इस्तीफा दे दिया।
अमिताभ बच्चन ने 1998 में सिमी गरेवाल के टॉक शो के दौरान बताया था कि वो कभी भी एक राजनेता नहीं थे। पॉलिटिक्स में एंट्री लेना एक इमोशनल फैसला थ। राजीव गांधी और हमारे परिवार के दोस्ती ने उन्हें दोस्त के साथ खड़े होने के लिए प्रेरित किया।
बॉलीवुड में अपनी वर्सटाइल परफॉर्मेंस के लिए पहचाने जाने वाले गोविंदा ने साल 2004 में कांग्रेस पार्टी की उत्तर मुंबई सीट से बड़ी जीत हासिल की थी। मगर, गोविंदा ने अगले लोकसभा चुनाव के दौरान राजनीति छोड़ने का फैसला लिया था। साल 2013 में एक इंटरव्यू में गोविंदा ने राजनीति से जुड़ने को अपने करियर की सबसे बड़ी गलती बताई। दरअसल, गोविंदा को उस दौरान मीडिया की तरफ से अनुपस्थित रहने के लिए बहुत ट्रोल किया जाता था। यही वो वजह थी, जिसके कारण गोविंदा ने पॉलिटिक्स से दूरी बना ली।\
साल 2019 में बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्मिला मातोंडकर ने कांग्रेस पार्टी की टिकट पर मुंबई नॉर्थ सीट से चुनाव लड़ा थ। हालांकि, एक्ट्रेस को चुनाव में बड़े आंकड़ों से हार का सामना करना पड़ा। चुनाव हारने के कुछ ही दिनों बाद उर्मिला ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उर्मिला ने इस्तीफा देने की वजह बताते हुए कहा कि वहां परिवारवाद है, जिसके कारण वो कुछ खास काम नहीं कर पा रही हैं।
साउथ के सुपरस्टार रजनीकांत ने साल 2017 में ‘रजनी मक्कल मंडराम’ नाम की पॉलिटिकल पार्टी की घोषणा की थी। मगर, साल 2021 में उन्होंने खुद बयान जारी कर कहा कि स्वास्थ्य खराब रहने की वजह से पॉलिटिक्स में आगे आना उनके लिए मुमकिन नहीं है। इसलिए वे अब पॉलिटिक्स में नहीं आएंगे।
2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार सुनील जाखड़ को हराकर सनी ने गुरदासपुर में बड़ी जीत हासिल की थी। हालांकि, सनी सांसद बनने के बाद अपने क्षेत्र में सक्रिय नहीं रहे जिसकी वजह से लोगों ने उनकी बहुत आलोचनाएं की। यहां तक की गुमशुदगी के पोस्टर छपवा दिए। यही कारण है कि सनी ने इस बार चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा की।
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