UP Board 10th Topper: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) ने 25 अप्रैल को कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षा 2023 के परिणाम घोषित किए, जिसमें 89.78 प्रतिशत छात्रों ने कक्षा 10 की परीक्षा पास की, जबकि 75.52 प्रतिशत छात्रों ने कक्षा 12 की परीक्षा पास की।
यूपी बोर्ड 10वीं में 600 में से 590 अंक हासिल कर सीतापुर की प्रियांशी सोनी ने टॉप किया। वहीं 10वीं टॉपर प्रियांशी की कहानी काफी चुनौतियों से भरी है। काफी मुश्किलों के बावजूद प्रियांशी ने कभी हार नहीं मानी और अपने परिवार का नाम रोशन किया। आइए जानते हैं प्रियांशी की कहानी...
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5 साल में सिर से उठा पिता का साया
प्रियांशी जब 5 साल की थीं, तभी पिता दीप चंद्र सोनी का निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। इसके बाद बड़े भाई ने पूरे परिवार की जिम्मेदारी उठाई। घर के साथ-साथ प्रियांशी को भी संभाला और इस लायक बनाया कि आज प्रियांशी ने पूरे यूपी में टॉप करके परिवार का नाम रोशन कर दिया।
प्रियांशी बातचीत में हुईं भावुक
प्रियांशी ने बातचीत में बताया कि काफी कम उम्र में ही उनके सिर से पिता का साया उठ गया था। पापा हमेशा मुझे आगे बढ़ने के लिए कहा करते थे। वह कहते थे कि तुम्हें जो बनना है, वही बनना। घर का कभी दबाव नहीं रहेगा। तुम घर की लक्ष्मी ही नहीं, सरस्वती भी हो।
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आईएएस बनने का है सपना
सोनी का कहना है कि उसका बचपन से ही सपना था कि वह खूब पढ़ाई लिखाई करें और आईएएस बनें। जिसके लिए वह दिन-रात खूब मेहनत कर रही हैं।
भाई ने दिया हौसला
प्रियांशी सोनी इस मौके पर अपने उन दिनों को याद करते हुए भावुक हो गईं। पिता की मौत के बाद भाई ने कभी उनकी कमी नहीं महसूस होने दी। इसके बाद बड़े भाई शोभिद सोनी ने उसकी पढ़ाई का इंतजाम कराया। शोभिद ज्वैलरी शॉप चलाते हैं। प्रियांशी कहती हैं कि हमें सोशल मीडिया का कोई शौक नहीं है। हमने किसी भी सोशल मीडिया पर अपना अकाउंट नहीं बनाया है। सिर्फ किताबों से अपनी पढ़ाई को पूरा करती थी। प्रियांशी का यह भी कहना है कि उसने अभी तक कोई कोचिंग-ट्यूशन तक नहीं लिया है, सिर्फ स्कूल के बाद घर पर सुबह-शाम पढ़ाई करती थी।
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यूपी बोर्ड 10वीं में 600 में से 590 अंक हासिल कर सीतापुर की प्रियांशी सोनी ने टॉप किया। वहीं 10वीं टॉपर प्रियांशी की कहानी काफी चुनौतियों से भरी है। काफी मुश्किलों के बावजूद प्रियांशी ने कभी हार नहीं मानी और अपने परिवार का नाम रोशन किया। आइए जानते हैं प्रियांशी की कहानी…
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5 साल में सिर से उठा पिता का साया
प्रियांशी जब 5 साल की थीं, तभी पिता दीप चंद्र सोनी का निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। इसके बाद बड़े भाई ने पूरे परिवार की जिम्मेदारी उठाई। घर के साथ-साथ प्रियांशी को भी संभाला और इस लायक बनाया कि आज प्रियांशी ने पूरे यूपी में टॉप करके परिवार का नाम रोशन कर दिया।
प्रियांशी बातचीत में हुईं भावुक
प्रियांशी ने बातचीत में बताया कि काफी कम उम्र में ही उनके सिर से पिता का साया उठ गया था। पापा हमेशा मुझे आगे बढ़ने के लिए कहा करते थे। वह कहते थे कि तुम्हें जो बनना है, वही बनना। घर का कभी दबाव नहीं रहेगा। तुम घर की लक्ष्मी ही नहीं, सरस्वती भी हो।
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आईएएस बनने का है सपना
सोनी का कहना है कि उसका बचपन से ही सपना था कि वह खूब पढ़ाई लिखाई करें और आईएएस बनें। जिसके लिए वह दिन-रात खूब मेहनत कर रही हैं।
भाई ने दिया हौसला
प्रियांशी सोनी इस मौके पर अपने उन दिनों को याद करते हुए भावुक हो गईं। पिता की मौत के बाद भाई ने कभी उनकी कमी नहीं महसूस होने दी। इसके बाद बड़े भाई शोभिद सोनी ने उसकी पढ़ाई का इंतजाम कराया। शोभिद ज्वैलरी शॉप चलाते हैं। प्रियांशी कहती हैं कि हमें सोशल मीडिया का कोई शौक नहीं है। हमने किसी भी सोशल मीडिया पर अपना अकाउंट नहीं बनाया है। सिर्फ किताबों से अपनी पढ़ाई को पूरा करती थी। प्रियांशी का यह भी कहना है कि उसने अभी तक कोई कोचिंग-ट्यूशन तक नहीं लिया है, सिर्फ स्कूल के बाद घर पर सुबह-शाम पढ़ाई करती थी।
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