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बिजनेस

क्या है BRICS डिजिटल पेमेंट? डॉलर के बिना होगा अंतरराष्ट्रीय व्यापार! भारत, चीन और रूस ने निकाला तोड़

ब्रिक्स देश अब डॉलर की निर्भरता खत्म करने के लिए साझा डिजिटल पेमेंट सिस्टम ला रहे हैं. भारत, चीन और रूस अपनी डिजिटल करेंसी को जोड़कर आपसी व्यापार को सुरक्षित बनाएंगे.

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Written By: Raja Alam Updated: Jan 30, 2026 18:45

ब्रिक्स देशों ने अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता खत्म करने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है. भारत, चीन और रूस मिलकर एक साझा डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर काम कर रहे हैं जो सीधे तौर पर डॉलर को चुनौती देगा. इस सिस्टम के जरिए सदस्य देश अपनी खुद की डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल करके आपस में व्यापार कर सकेंगे. अमेरिका द्वारा रूस पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों और स्विफ्ट सिस्टम से बाहर किए जाने के बाद यह कदम उठाया गया है. अब ब्रिक्स देश किसी भी विदेशी दबाव के बिना अपनी शर्तों पर कारोबार करने की तैयारी में हैं.

ई-रुपया और युआन का होगा संगम

इस नए सिस्टम की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें नई करेंसी बनाने के बजाय मौजूदा डिजिटल करेंसी को जोड़ा जाएगा. भारत का ई-रुपया, चीन का डिजिटल युआन और रूस का डिजिटल रूबल एक ही तकनीकी प्लेटफॉर्म पर काम करेंगे. इससे हर देश का अपनी करेंसी पर पूरा कंट्रोल बना रहेगा और लेनदेन भी बेहद आसान हो जाएगा. इसके लिए अब दुनिया को डॉलर आधारित स्विफ्ट नेटवर्क की जरूरत नहीं पड़ेगी. भारत इस पूरे मॉडल को तैयार करने में अहम भूमिका निभा रहा है क्योंकि उसके पास यूपीआई जैसा सफल डिजिटल अनुभव पहले से मौजूद है.

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कैसे काम करेगा यह सिस्टम?

ब्रिक्स का यह पेमेंट सिस्टम मुख्य रूप से सेटलमेंट साइकिल और फॉरेक्स स्वैप लाइन पर आधारित होगा. इसका मतलब है कि हर छोटे लेनदेन का भुगतान तुरंत करने के बजाय एक तय समय के बाद केवल अंतर वाली रकम का हिसाब होगा. उदाहरण के तौर पर अगर भारत और चीन के बीच व्यापार होता है, तो महीने के आखिर में सिर्फ बकाया बैलेंस ही चुकाना होगा. इससे बार-बार होने वाले ट्रांजेक्शन का खर्च बचेगा और विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दबाव कम होगा. साथ ही अगर किसी देश को दूसरे की करेंसी की ज्यादा जरूरत होगी, तो सेंट्रल बैंक आपस में करेंसी बदल सकेंगे.

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ब्रिक्स ने निकाला बैकअप प्लान

रूस के 300 अरब डॉलर फ्रीज होने के बाद दुनिया भर के देशों में यह डर बैठ गया है कि अमेरिका कभी भी डॉलर को हथियार की तरह इस्तेमाल कर सकता है. रूस, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देशों के साथ जो हुआ, उसे देखते हुए ब्रिक्स देश अब अपना सुरक्षित बैकअप तैयार कर रहे हैं. यह डिजिटल सिस्टम न केवल व्यापार को आसान बनाएगा बल्कि किसी भी आर्थिक संकट की स्थिति में सुरक्षा कवच का काम करेगा. डोनाल्ड ट्रंप की वापसी और उनके आक्रामक रुख के बीच यह डिजिटल पेमेंट सिस्टम वैश्विक अर्थव्यवस्था में शक्ति संतुलन को बदलने की ताकत रखता है.

First published on: Jan 30, 2026 06:45 PM

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