Success story of Raj Sardana: आज, इनोवा सॉल्यूशंस दुनिया भर में 50000 से ज्यादा लोगों को रोजगार देता है. राज सरदाना, जो कभी सिर्फ 8000 रुपये लेकर अमेरिका पहुंचे थे, अब अनुमानित कुल संपत्ति 2 अरब डॉलर है. उनकी कहानी लचीलेपन, दूरदर्शिता और अमेरिकी सपने की ताकत का प्रमाण है.
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इनोवा सॉल्यूशंस का जन्म
1998 में, जब कंपनियां Y2K संकट की तैयारी कर रही थीं, सरदाना को एक अवसर नजर आया. उन्होंने भारत से H-1B वीजा पर 125 कुशल सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की भर्ती की और अपनी आईटी फर्म “इनोवा सॉल्यूशंस” की शुरुआत की. उनका समय बिल्कुल सही था और जल्द ही, उनकी कंपनी प्रमुख निगमों के लिए एक विश्वसनीय तकनीकी भागीदार बन गई.
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पहला व्यावसायिक उद्यम
सिर्फ 25,000 डॉलर की बचत से, सरदाना ने जॉर्जिया में एक छोटी सी प्रिंटिंग शॉप खरीदी. कुछ ही वर्षों में, उनके पास दो प्रिंटिंग शॉप, आठ पेट्रोल पंप और दो ड्राई-क्लीनिंग आउटलेट हो गए. इन उद्यमों ने उन्हें अपने असली जुनून, तकनीक को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय आधार दिया.
संकट को अवसर में बदलना
उस समय, सरदाना के पास एक नवजात बेटी, एक होम लोन और बुजुर्ग माता-पिता का भरण-पोषण करने की जिम्मेदारी थी. नौकरी छूटने से वह टूट सकते थे, लेकिन यह उनके लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ. हार न मानते हुए, उन्होंने अपने भविष्य की बागडोर अपने हाथ में लेने और अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया.
कॉर्पोरेट अमेरिका में प्रवेश
स्नातक होने के बाद, सरदाना को H-1 वीजा पर हाउमेट एयरोस्पेस में नौकरी मिल गई. कुछ ही वर्षों में, वे टेलीडाइन CAE में चले गए, जहां उन्होंने टॉमहॉक मिसाइल इंजनों पर काम किया. लेकिन साल 1990 में जब शीत युद्ध समाप्त हुआ, तो मिसाइल उत्पादन बंद हो गया और उनकी नौकरी भी बंद हो गई.
अमेरिका के लिए 100 डॉलर की छलांग
साल 1981 में, सरदाना जॉर्जिया टेक में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल करने के लिए जेब में मुश्किल से 100 डॉलर (8,300 रुपये) लेकर अमेरिका चले गए. अपने बिलों का भुगतान करने के लिए, उन्होंने अपने कॉलेज के कैफेटेरिया में नौकरी कर ली. उन्होंने एक बार कहा था कि मैंने अपनी जिंदगी यहीं से शुरू की थी और वह सचमुच ऐसा ही सोचते थे.
दिल्ली में साधारण शुरुआत
1960 में दिल्ली में पंजाबी माता-पिता के घर जन्मे राज सरदाना, जो विभाजन के दौरान पलायन कर गए थे, साधारण परिस्थितियों में पले-बढ़े. ऑथॉरिटी मैगज़ीन के साथ बातचीत में, सरदाना ने अपने परिवार के सामने आई आर्थिक कठिनाइयों के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने याद करते हुए कहा कि 20 साल तक, मैं और मेरा भाई नई दिल्ली में जीर्ण-शीर्ण सरकारी आवास में रहे, जहां न तो हीटिंग, एयर कंडीशनिंग, रेफ्रिजरेटर, फोन, टीवी या कार की सुविधा थी.
कैफे की नौकरी से कॉर्पोरेट दिग्गज तक
राज सरदाना की कहानी में अमेरिकी सपना जिंदा है – एक ऐसा व्यक्ति जो सिर्फ 100 डॉलर लेकर अमेरिका पहुंचा और अरबों डॉलर का साम्राज्य खड़ा कर दिया. कॉलेज के कैफेटेरिया में खाना परोसने से लेकर एक वैश्विक टेक कंपनी का नेतृत्व करने तक, उनका सफर प्रेरणादायी है.
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