चुनाव आयोग के SIR, SSR और SR में क्या है अंतर? समझिए वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन की डिटेल जानकारी

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन, स्पेशल समरी रिवीजन, स्पेशल रिवीजन चुनाव आयोग की अलग अलग प्रकिया है, ये सुनने में एक जैसे लगते हैं, लेकिन इन सभी का प्रॉसेस और मकसद आपस में थोड़ा अलग है. आइए इसे डिटेल से समझने की कोशिश करते हैं.

SIR PTI

वोटर लिस्ट का रिवीजन (Photo-PTI)

Difference Between SIR SSR and SR: इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने 1 जनवरी 2027 की क्वालिफाइंग डेट को ध्यान में रखते हुए 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल समरी रिवीजन’ का आदेश दिया है. ये कदम ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ को लेकर चल रहे मौजूदा विवाद के बीच उठाया गया है. इस नई कवायद का मकसद ये एनश्योर करना है कि सभी एलिजिबल वोटर्स मतदाता सूची में शामिल हों. आपको याद होगा कि असम में ‘स्पेशल रिवीजन’ भी हुआ था.

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SIR, SSR और SR में फर्क

SIR, SSR और SR, ये सभी वोटर लिस्ट को अपडेट करने का प्रॉसेस हैं, लेकिन इनके तरीके, दायरे और वेरिफिकेशन की जरूरतों में अंतर होता है. आइए जानते हैं कि चुनाव आयोग की इन एक्सरसाइज का क्या मतलब, या मकसद क्या है और ये कैसे काम करती हैं.

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SIR: डिटेल वोटर वेरिफिकेशन

‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ एक एक्सटेंसिव एक्सरसाइज है, जिसे वोटर लिस्ट के वेरिफिकेशन और वोटर रिकॉर्ड में मौजूद गलतियों की पहचान करने के लिए चलाया जाता है. इस प्रॉसेस के तहत, बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) घर-घर जाकर मतदाताओं की डिटेल को चेक करते हैं. वो इन डिटेल्स को पिछले SIR (2002-2003) के पुराने डेटा से मैच करते हैं.

रूटीन रिवीजन की तुलना में SIR में वेरिफिकेशन प्रॉसेस ज्यादा डिटेल्ड है. ECI के निर्देशों के मुताबिक वोटर को अपनी एलिजिबिलिटी साबित करनी पड़ सकती है और जरूरी जानकारी या दस्तावेज देने पड़ सकते हैं. इस कवायद का मकसद एलिजिबल वोटर्स की पहचान करना, डुप्लिकेट या इनएलिजिबल एंट्रीज को हटाना और गलतियों को सुधारना है.

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वोटर्स को अपने BLO के जरिए या ECI के ऑफिशियस पोर्टल (voters.eci.gov.in) पर जाकर अपनी डिटेल को चेक कर लेना चाहिए. साथ ही रजिस्ट्रेशन में किसी भी तरह की परेशानी से बचने के लिए, इससे जुड़ी किसी भी जरूरत को लेकर वक्त रहते रिस्पॉन्ड करना चाहिए.

SSR: वोटर लिस्ट को अपडेट और सही करना

‘स्पेशल समरी रिवीजन’ का मकसद एलिजिबल वोटर्स को एड करते हुए और मौजूदा एंट्रीज में सुधार करके वोटर लिस्ट को अपडेट करना है. ये आमतौर पर सालाना रिवीजन साइकल का हिस्सा होता है. इसमें बड़े पैमाने पर इंटेसिव रिवीजन करने के बजाय, खास तौर से से दावों, आपत्तियों और मतदाता जानकारी में बदलावों पर ध्यान दिया जाता है.

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SSR प्रॉसेस के तहत वो एलिजिबल नागरिक जिनकी उम्र 18 साल हो गई है या जो क्वालिफाइंग डेट से जुड़ी शर्तों को पूरा करते हैं, वो वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए अप्लाई कर सकते हैं. मौजूदा मतदाता अपने डिटेल में सुधार या अपने पते में बदलाव के लिए गुजारिश कर सकते हैं. ये एक्सरसाइज खास तौर से पब्लिश हो चुकी मतदाता सूचियों, नागरिकों के आवेदनों और वेरिफिकेशन पर आधारित होती है, न कि SIR से जुड़ी घर-घर जाकर की जाने वाली एक्सटेंसिव एन्यूमरेशन पर.

17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मौजूदा एसएसआर को 4 जनवरी 2027 को पब्लिश किया जाना है. नागरिकों को वोटर लिस्ट की जांच करनी चाहिए और सही फॉर्म जमा करने चाहिए; जैसे नए मतदाता पंजीकरण के लिए ‘फॉर्म 6’ और सुधार या दूसरे जरूरी बदलावों के लिए ‘फॉर्म 8’. SSR प्रक्रिया इसलिए भी अहम है क्योंकि इसका मकसद उन एलिजिबल वोटर्स की मदद करना है, जो शायद SIR प्रक्रिया के दौरान छूट गए थे, ताकि वो अपना नाम वोटर लिस्ट में शामिल करवा सकें.

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SR: असम के लिए एक अलग रिवीजन प्रॉसेस

    ‘स्पेशल रिवीजन’ असम में चलाई गई एक अलग मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया है. इसे राज्य की खास हालात को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया, जिसमें ‘नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस’ (NRC) से जुड़ा डेमोग्राफिक वेरिफिकेशन का इतिहास भी शामिल है. दूसरे राज्यों में मौजूदा SIR प्रक्रिया के बजाय, असम में इस अलग प्रॉसेस को फॉलो किया गया था.

    SR के तहत BLO पहले से भरे हुए रजिस्टर्स से मौजूदा वोटर्स एंट्रीज की जांच करते हैं. इसमें उस एन्यूमरेशन प्रॉसेस को फॉलो नहीं किया जाता, जो मौजूदा SIR प्रक्रिया में पुराने वोटर्स के रिकॉर्ड के आधार पर की जाती है. इस एक्सरसाइज में मतदान केंद्रों का रेशनलाइजेशन भी शामिल है. इस पॉसेस के लिए तय व्यवस्था के अनुरूप, प्रति पोलिंग स्टेशंस वोटर्स की लिमिट 1500 से घटाकर 1200 कर दी गई है.

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    अलग-अलग एक्सरसाइज क्यों?

    चुनाव आयोग किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की जरूरत के आधार पर अलग-अलग रिवीजन के तरीके का इस्तेमाल करता है. SIR में एक्सटेंसिव वेरिफिकेशन शामिल होता है, SSR वोटर लिस्ट को अपडेट करने के रेगुलर साइकल को फॉलो करता है, और SR असम की स्पेशल सिचुएशन के लिए एक अलग नजरिया देता है. प्रॉसेस चाहे जो भी हो, मतदाताओं को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि वोटर लिस्ट में उनका नाम सही ढंग से दर्ज है. अगर किसी को कोई चूक या गलती मिलती है, तो उसे चुनाव में हिस्सा लेने का अपना अधिकार सुरक्षित रखने के लिए निर्धारित समय-सीमा के भीतर एप्लिकेशन जमा करना चाहिए.

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    लेखक के बारे में

    Shariqul Hoda

    Shariqul Hoda

    न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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