भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने हाल ही में रेपो रेट को 5.25% से बढ़ाकर 5.50% कर दिया है. गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ संकेत दिया है कि केंद्रीय बैंक कैलिब्रेटेड टाइटनिंग यानी नपे-तुले तरीके से ब्याज दरें बढ़ाने की तरफ बढ़ रहा है और फिलहाल आने वाले समय में ब्याज दरों में कटौती का कोई चांस नहीं है.
नवरात्रि और दिवाली का त्यौहारी सीजन चल रहा है, जब ज्यादातर लोग नया घर, फ्लैट या कार खरीदने का मन बनाते हैं. ऐसे में आरबीआई के इस फैसले से आम खरीदारों के मन में कई सवाल खड़े हो गए हैं.
होम और कार लोन पर क्या पड़ेगा असर?
अगर आपने फ्लोटिंग रेट पर होम लोन या कार लोन लिया है या लेने वाले हैं, तो बैंक जल्द ही अपनी ब्याज दरें बढ़ाएंगे. इसका मतलब है कि आपकी मासिक किश्त (EMI) बढ़ जाएगी या फिर आपको लोन की अवधि (Tenure) बढ़ानी होगी.
शेयर बाजार और फाइनेंस मामलों के विश्लेषक अविनाश गुप्ता का मानना है कि महंगाई और कच्चे तेल (Crude Oil) की अनिश्चितता को देखते हुए आने वाली तिमाहियों में दरें और बढ़ सकती हैं.
रियल एस्टेट सेक्टर और घर खरीदारों के लिए क्या है स्थिति?
अविनाश गुप्ता के मुताबिक, सिर्फ 25 बीपीएस (0.25%) की बढ़ोतरी से अचानक बहुत बड़ा फर्क नहीं पड़ता, लेकिन बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतों और ग्लोबल अनिश्चितता के बीच कई खरीदार अपना फैसला कुछ समय के लिए टाल सकते हैं.
अविनाश गुप्ता ने कहा कि रेपो रेट बढ़ने से लोन की दरें महंगी होती है, साथ ही इससे रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए कंस्ट्रक्शन फाइनेंस और वर्किंग कैपिटल महंगी हो जाती है. इसका सीधा असर आखिर में प्रॉपर्टी की कीमतों पर पड़ता है.
ऐसे में अविनाश कहते हैं कि अफॉर्डेबल हाउसिंग यानी किफायती मकान और रेंटल सेगमेंट में वास्तविक मांग बनी रहने की उम्मीद है, इसलिए वहां ज्यादा बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिलेगी.
एफडी (FD) बनाम प्रॉपर्टी: निवेशकों का बदला गणित
ब्याज दरें बढ़ने का एक दूसरा पहलू भी है जो फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराने वालों को फायदा पहुंचा सकता है. बैंक आने वाले दिनों में FD पर ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं. इससे शॉर्ट से मीडियम टर्म के लिए पैसे जमा करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है.
कमर्शियल रियल एस्टेट और REITs पर फाइनेंसिंग कॉस्ट बढ़ेगी, जिससे निवेशक रियल एस्टेट के बजाय फिक्स्ड-इनकम एसेट्स (जैसे FD या बॉन्ड्स) की तरफ आकर्षित हो सकते हैं.
तो अब आपको क्या करना चाहिए?
एक्सपर्ट अविनाश गुप्ता ने बताया कि अगर आपने अपनी डाउन पेमेंट का इंतजाम कर लिया है और आपके पास EMI देने की मजबूत क्षमता है, तो केवल दरें बढ़ने के डर से अपनी जरूरत न टालें. लोन लेने के बाद जैसे ही बोनस या अतिरिक्त पैसे आएं, आंशिक भुगतान (Partial Prepayment) करें ताकि बढ़ा हुआ ब्याज कम हो सके. सिर्फ ज्यादा ब्याज देखकर आंख मूंदकर सारा पैसा FD में न फंसाएं. अपनी लिक्विडिटी का भी ध्यान रखें.
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