बच्चे के इन 4 बदलावों को न समझें सिर्फ नखरे या गुस्सा! जानिए कब बचपन पर हावी होने लगती है एंग्जायटी
Signs Of Anxiety In Children: क्या आपका भी बच्चा अचानक बहुत चुपचुप, परेशान और गुस्सा में रहने लगा है और साथ ही अपनी पसंदीदा एक्टिविटी भी नहीं कर रहे है? हो सकता है कि वह एंग्जायटी का शिकार हो गया हो, आइए NHS से जानते हैं आप कैसे अपने बच्चे को इस समस्या से निकाल सकते हैं?
आपका बच्चा एंग्जायटी का शिकार है, इसकी पहचान कैसे करें? (Image: AI/Pexels)
खबर की मुख्य बातें:
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लगभग 6 महीने से 3 साल की उम्र के बच्चों में ‘सेपरेशन एंग्जायटी’ आम है, जो आमतौर पर 2 से 3 साल की उम्र तक खत्म हो जाती है.
एंग्जायटी तब समस्या बन जाती है जब यह बच्चे के रोजमर्रा के जीवन को बाधित करे या उसे पसंद की चीजें करने से रोके.
छोटे बच्चों में चिड़चिड़ापन, नींद की समस्या, बिस्तर गीला करना और बुरे सपने आना एंग्जायटी के संकेत हो सकते हैं, जबकि बड़े बच्चों में आत्मविश्वास की कमी और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई इसके लक्षण हैं.
बच्चों से उनकी परेशानी के बारे में प्यार से बात करना, उनकी चिंताओं को समझना और समाधान खोजने में मदद करना एंग्जायटी को दूर करने के लिए जरूरी है.
बच्चों का ख्याल रखना हर माता-पिता के लिए जरूरी है, लेकिन ख्याल में सिर्फ उन्हें खाना खिलाना, पढ़ाई में मदद करना और बुखार में दवा देना तक ही सीमित नहीं है. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और पढ़ाई, दोस्त, परिवार का असर बच्चों की मेंटल हेल्थ पर भी पड़ता है, जिस कारण बच्चा परेशान रहने लगता है, अंदर ही अंदर घुटन सा महसूस करने लगते हैं, पहले के मुकाबले ज्यादा नखरे करना या बात-बात पर गुस्सा होने लगते हैं. आमतौर पर माता-पिता सोचते हैं कि बच्चा बढ़ा हो रहा है या फिर किसी दूसरी चीज से जोड़कर उसे नजरअंदाज कर देते हैं या फिर डांट देते हैं. लेकिन ये समझना भी जरूरी है कि जिस तरह एडल्ट यानी बड़ों को ऑफिस के काम आदि के कारण एंग्जायटी होती है, ऐसा ही कुछ बच्चों के साथ भी देखने को मिलता है. हम आपको इस स्टोरी में कुछ ऐसे संकेत बताएंगे, जिसकी मदद से आप इस बात का पता लगा सकेंगे कि कहीं आपका बच्चा भी तो एंग्जायटी का शिकार तो नहीं.
बच्चे अलग-अलग उम्र में अलग-अलग चीजों को लेकर बेचैन या परेशान हो सकते हैं. इनमें से कई चिंताएं बड़े होने का एक सामान्य हिस्सा हैं. NHS के अनुसार, लगभग 6 महीने से 3 साल की उम्र के छोटे बच्चों में ‘सेपरेशन एंग्जायटी’ {Separation anxiety} (माता-पिता या देखभाल करने वालों से अलग होने पर होने वाली बेचैनी) होना बहुत आम बात है. वे अपने माता-पिता या देखभाल करने वालों से अलग होने पर उनसे चिपके रह सकते हैं और रो सकते हैं. यह बच्चे के विकास का एक सामान्य चरण है और आमतौर पर 2 से 3 साल की उम्र तक यह खत्म हो जाता है. वहीं, प्री-स्कूल उम्र के बच्चों में कुछ खास तरह के डर या फोबिया (किसी चीज का बहुत ज्यादा डर) का होना भी आम बात है. ऐसी स्थितियों में जब उन्हें वह मदद नहीं मिल रही होती है, तो उनमें एंग्जायटी पैदा होने लगती है, जिस कारण वह गुस्सा या फिर बहुत ज्यादा चुप रहने लग सकते हैं.
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एंग्जायटी कब बन जाती है समस्या?
अब सवाल उठता है कि कब एंग्जायटी समस्या का रूप ले लेती है? NHS के अनुसार, एंग्जायटी की स्थिति में जब बच्चे की डेली-लाइफ पर असर डालने लगे या किसी तरह का रुकावट बनने लगे, तो यह समस्या बन जाती है. आपने अपने स्कूल टाइम पर गौर किया होगा कि परीक्षा के समय कुछ बच्चे घबराएं हुए होते हैं, लेकिन फिर भी वह परीक्षा दे देते हैं, लेकिन कुछ बच्चे ऐसे भी होते हैं, जो इतना ज्यादा डर जाते हैं कि स्कूल भी नहीं आते और बीमार पड़ जाते हैं.
एंग्जायटी आपके बच्चे के लिए तब समस्या बन सकती है जब:
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यह बहुत ज्यादा हो, या बदतर होती जा रही हो, और खत्म न हो रही हो
यह रोजमर्रा के कामों में रुकावट डाले और आपके बच्चे को उन चीजों को करने से रोके जो उन्हें पसंद हैं
इस तरह की गंभीर एंग्जायटी बच्चों की मानसिक और भावनात्मक सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे उनके आत्मविश्वास पर असर पड़ सकता है और वे लोगों से दूर-दूर रहने लग सकते हैं और उन चीजों या स्थितियों से बचने की पूरी कोशिश कर सकते हैं जिनसे उन्हें घबराहट होती है.
आपका बच्चा एंग्जायटी का शिकार है कैसे पहचानें?
अगर आपको बच्चे में नीचे दिए गई बदलाव दिखाई दे रहे हैं, तो हो सकता है कि वह भी एंग्जायटी का शिकार है और उसे आपकी बहुत जरूरत है. इसमें;
अगर बच्चा छोटा है, तो
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चिड़चिड़े हो जाते हैं, रोने लगते हैं या हर समय आपके साथ चिपके रहना चाहते हैं
उन्हें सोने में परेशानी होती है
वे रात में जाग जाते हैं
बिस्तर गीला करने लगते हैं
उन्हें बुरे सपने आते हैं
बड़े बच्चों में:
उनमें नई चीजें आजमाने का आत्मविश्वास नहीं होता या वे रोजमर्रा की आसान चुनौतियों का सामना करने से पीछे हट रहे हों
उन्हें ध्यान लगाने में मुश्किल होती है
उन्हें सोने या खाने-पीने का दिल नहीं करता है
उन्हें अचानक गुस्सा आ जाता है
उनके मन में बहुत सारे गलत (निगेटिव) विचार आते हैं, या वे सोचते रहते हैं कि कुछ बुरा होने वाला है
वे रोजमर्रा के काम से बचने लगते हैं, जैसे दोस्तों से मिलना, बाहर जाना या स्कूल जाना
अगर आपको इनमें से कोई भी संकेत अपने बच्चे में दिखाई दे रहा है, तो हो सकता है कि वह एंग्जायटी का शिकार है और उसे आपके साथ और मदद की काफी जरूरत है.
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कैसे अपने बच्चों को दूर करें एंग्जायटी से?
अब सवाल उठता है कि आखिर अपने बच्चे को कैसे एंग्जायटी की समस्या से बचा सकते हैं? इसका हल काफी आसान है, बस आपको नीचे दिए गए टिप्स को अपनाना होगा.
सबसे पहले बच्चे से उसकी परेशानी के बारे में प्यार से बात करें और उससे पूछे की वह क्यों इतना परेशान है.
कोशिश करें कि पहले से कोई अंदाजा न लगाएं या उनकी चिंताओं को नजरअंदाज न करें. उन्हें भरोसा दिलाएं कि समस्याओं को पहचानना और उनके बारे में बात करना अच्छी बात है.
अगर आपका बच्चा काफी बड़ा है, तो उसे यह समझाना मददगार हो सकता है कि एंग्जायटी क्या है और इसका हमारे शरीर पर क्या असर पड़ता है.
बच्चे को बताएं कि एंग्जायटी एक स्वाभाविक प्रक्रिया, जो हमारे विचारों, भावनाओं और व्यवहार को प्रभावित करती है.
अपने बच्चे से उनकी चिंताओं और एंग्जायटी के बारे में बात करने के साथ-साथ, उनकी चिंताओं का समाधान खोजने में उनकी मदद करना भी जरूरी है.
अगर बच्चा बहुत ज्यादा परेशान है और डरा हुआ रहता है, तो उसके स्कूल में जाकर उसके बारे में जानने की कोशिश करें और डॉक्टर से भी बात करें.
कोशिश करें कि आप खुद बहुत ज्यादा सुरक्षात्मक या परेशान न हों, क्योंकि इससे बच्चा और परेशान हो सकता है.
बच्चों को एंग्जायटी कैसे डील करते हैं, उसके बारे में बताएं.
अपने बच्चे के साथ आराम करने के आसान तरीके अपनाएं, जैसे कि 3 बार गहरी और धीमी सांस लेना,3 तक गिनते हुए सांस अंदर लेना और 3 तक गिनते हुए सांस बाहर छोड़ना.
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.