Railway Women Protect Law: ट्रेनों में अकेले सफर करने वाली महिलाओं के लिए बड़ा ऐलान! सुरक्षा का मामला
Edited By Nitin Arora

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Railway Women Protect Law: क्या आप जानते हैं कि एक कानून है जो ट्रेनों में अकेले यात्रा करने वाली महिलाओं की सुरक्षा करता है? कुछ समझ नहीं आया? आइए इस पर आपको जानकारी देते हैं। 1989 में, भारतीय रेलवे ने एक कानून बनाया जो एकल महिला यात्रियों की सुरक्षा करता है।
उदाहरण के लिए, भारतीय रेलवे अधिनियम 1989 की धारा 139 के अनुसार, यदि कोई महिला बिना पुरुष यात्री के अकेले यात्रा कर रही है और अपने बच्चे के साथ है, तो उसे रात में ट्रेन से उतरने का आदेश नहीं दिया जा सकता है। फिर चाहे उसके पास कोई रेल पास या टिकट भी न हो। एक महिला को तभी जाने के लिए कहा जा सकता है जब अधिकारियों के पास एक महिला कांस्टेबल हो उसके साथ भेजने को।
भारतीय रेलवे अधिनियम 1989 की धारा 311 के अनुसार, यदि सैन्य कर्मी महिलाओं के लिए आरक्षित डिब्बों में प्रवेश करते हैं, तो उन्हें ऐसे अपार्टमेंट में प्रवेश करने से रोका जाना चाहिए। उन्हें सामान्य अपार्टमेंट में यात्रा करने की सलाह दी जानी चाहिए।
भारतीय रेलवे अधिनियम 1989 की धारा 162 के अनुसार केवल एक लड़का जिसकी उम्र 12 वर्ष से कम है, को महिलाओं के लिए आरक्षित डिब्बे में यात्रा करने की अनुमति दी जा सकती है। महिला कोच में प्रवेश करने वाले पुरुष यात्रियों पर कानून द्वारा मुकदमा चलाया जा सकता है।
इन बातों के अलावा, महिलाओं को 24*7 सुरक्षा प्रदान करने के लिए सीसीटीवी और निगरानी कक्ष स्थापित किए जा रहे हैं। इसके अलावा, रेलवे ने कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए भी उपाय किए हैं। उदाहरण के लिए, गांधी नगर रेलवे स्टेशन (जयपुर) को पूरी तरह से एक महिला दल द्वारा संभाला जाता है। इस रेलवे स्टेशन को 28 महिला कर्मचारियों द्वारा संचालित किया जाता है। इसी तरह, माटुंगा रेलवे स्टेशन (मुंबई) भी पूरी तरह से महिला कर्मचारियों द्वारा संचालित है।
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