Nitin Arora
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PMSMA: प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) द्वारा शुरू किया गया है। कार्यक्रम का लक्ष्य सभी गर्भवती महिलाओं को सार्वभौमिक रूप से निःशुल्क, सुनिश्चित, व्यापक और गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व देखभाल प्रदान करना है। यहां एक और अच्छी शुरुआत की गई है। दरअसल पहले केवल हर महीने की 9 तारीख को इन महिलाओं का इलाज सुनिश्चित होता था, लेकिन अब चार दिन निर्धारित किए गए हैं।
सरकारी आदेश में कहा गया है कि PMSMA अब किसी भी महीने के चार दिन 1, 9, 16 और 24 तारीख को राज्य भर में सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं पर आयोजित किया जाएगा, जहां गर्भवती महिलाओं को विशेष जांच और निदान और दवा सुविधाओं का लाभ मिल सकता है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार जांच के लिए जाने वाली गर्भवती महिलाओं पर स्कूली शिक्षा का सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। आंकड़े कहते हैं कि कुल 95.7% गर्भवती महिलाओं को पंजीकृत किया गया और जांच के लिए कार्ड दिए गए और 83.4% ने संस्थागत प्रसव कराया, लेकिन केवल 42.4% गर्भवती महिलाओं ने प्रसव पूर्व सभी चार जांचें कराईं।
गर्भवती महिलाओं को प्रसव से पहले और प्रसव के बाद अस्पताल से अपने स्थान तक निःशुल्क परिवहन सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही नवजात शिशुओं को उनके घर पर ही मासिक देखभाल की सुविधा मिलेगी। इस योजना के तहत सरकार द्वारा दी जाने वाली सभी सेवाएं शून्य लागत पर हैं।
गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी सामान्य होगी या सी-सेक्शन, इस योजना के अंतर्गत आने वाले अस्पताल किसी भी प्रकार के शुल्क की मांग नहीं कर सकते हैं। यदि कोई अस्पताल या कर्मचारी महिला या नवजात शिशु का समर्थन नहीं करेगा तो संबंधित व्यक्तियों पर ‘नो टॉलरेंस’ नीति लागू होगी।
इस योजना में दिहाड़ी मजदूरी करने वाली महिलाओं को कवर किया जा रहा है। हालांकि, सभी श्रेणियों और बीपीएल और एपीएल की सभी गर्भवती महिलाएं इस योजना का लाभ पाने के लिए पात्र हैं। इसके लिए गर्भवती महिलाओं को चिकित्सा केंद्र पर जाना होता है। नजदीकी चिकित्सा केंद्र पर जाकर खुद का पंजीकरण करवाएं।
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