आटे के बाद अब दाल पर मचा हाहाकार, पाक‍िस्‍तान की थाली से गायब हुआ प्रोटीन, 80% आयात पर निर्भरता ने बढ़ाई टेंशन

पड़ोसी देश पाकिस्तान इन दिनों एक ऐसे संकट से जूझ रहा है जिसने आम आदमी की थाली का स्वाद छीन लिया है. महंगाई के मोर्चे पर पहले से ही पस्त पाकिस्तान में अब दाल की भारी कमी ने हाहाकार मचा दिया है. स्थिति यह है कि देश अपनी जरूरत की 80% दाल विदेशों से मंगाने को मजबूर है.

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पाक‍िस्‍तान की बदहाली

एक समय कृषि प्रधान देश कहलाने वाला पाकिस्तान आज अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए पाई-पाई को मोहताज दिख रहा है. आटा और बिजली के बाद अब दालों के संकट ने वहां की सरकार और जनता की नींद उड़ा दी है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट देश को एक बड़े अकाल की ओर धकेल सकता है.

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उत्पादन कम, आयात ज्यादा

पाकिस्तान में दालों की खपत और उत्पादन के बीच की खाई बहुत बड़ी हो गई है. आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति काफी भयावह नजर आती है. पाक‍िस्‍तान में दालों की सालाना खपत करीब 16.2 लाख टन है. जरूरत पूरी करने के लिए हर साल 10.7 लाख टन दाल विदेश से मंगानी पड़ रही है. इस आयात पर पाकिस्तान को सालाना लगभग 98 करोड़ डॉलर यानी करीब 275 अरब पाकिस्तानी रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं.

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क्यों खाली हो रही है पाकिस्तान की थाली?
दालों की इस भारी कमी के पीछे कई बड़े कारण सामने आए हैं. इसमें से एक कारण है उत्पादन में भारी गिरावट. पाकिस्तान में दलहन (Pulses) की खेती का रकबा लगातार कम हो रहा है. किसानों को खाद, बीज और सिंचाई की सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं. ल‍िहाजा वो दलहन की खेती नहीं कर रहे हैं. दूसरा कारण है, वहां की आर्थ‍िक बदहाली. विदेशी मुद्रा भंडार की कमी के कारण आयात करना महंगा हो गया है. डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपया लगातार गिर रहा है, जिससे आयातित दालों की कीमतें आसमान छू रही हैं.

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इसके अलावा जलवायु परिवर्तन भी एक बड़ी वजह है. बेमौसम बारिश और बढ़ती गर्मी ने स्थानीय फसलों को बर्बाद कर दिया है.

गहरा सकता है आर्थिक संकट
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान अपनी कुल जरूरत का 80% हिस्सा आयात कर रहा है, जो किसी भी देश की खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है. अगर स्थानीय उत्पादन बढ़ाने के लिए तत्काल निवेश नहीं किया गया, तो आने वाले समय में आम जनता के लिए दाल खरीदना लग्जरी (अमीरों का शौक) बन जाएगा. विदेशी मुद्रा भंडार पूरी तरह खाली हो सकता है और कुपोषण की समस्या गंभीर रूप ले सकती है.

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भारत के लिए क्या है सबक?
पाकिस्तान का यह संकट दुनिया के लिए एक उदाहरण है कि कृषि और स्थानीय उत्पादन की अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है. जहां भारत आत्मनिर्भर होने की दिशा में बढ़ रहा है, वहीं पाकिस्तान की आयात पर निर्भरता उसे कर्ज के दलदल में और गहरे धकेल रही है.

पाकिस्तान के लिए अब यह केवल खाद्य संकट नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई बन गई है. जब तक वह अपनी कृषि नीतियों में बड़े बदलाव नहीं करता, दाल-रोटी का जुगाड़ करना वहां की जनता के लिए एक सपना ही बना रहेगा.

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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