Diganta Das: सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी छोड़कर बनाया खुद का परांठा ब्रांड, आज कमा रहे हैं 50 लाख हर महीने

असम के दिगांता दास की कहानी मेहनत और लगन की जीती जागती मिसाल है, पहले वो एक दिहाड़ी मजदूर और सिक्योरिटी गार्ड का काम करते थे, लेकिन बाद में उन्होंने अपने सेविंग्स के जरिए खुद का परांठा ब्रांड बनाया और हर महीने 50 लाख की कमाई करते हैं.

_Diganta Das Paratha @mrinaltalukdar8 AI

दिगांता दास (Photo-X/@mrinaltalukdar8 and AI)

Diganta Das Success Story: असम के रहने वाले एंटरप्रेन्योर दिगांता दास ने सालों के स्ट्रगल और फूड इंडस्ट्री के अपने एक्सपीरिएंस को एक कामयाब फ्रोजन परांठा बिजनेस में बदल दिया है. इससे उन्हें हर महीने तकरीबन 50 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई होती है. हालांकि उनके लिए ये सफर इतना आसान नहीं था.

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दिहाड़ी मजदूर और सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की

असम के बिस्वनाथ जिले के गोहपुर के रहने वाले दिगांता दास आर्थिक तंगी में पले-बढ़े और 2001 में 10वीं क्लास पास करने के तुरंत बाद काम करना शुरू कर दिया. शुरुआत में उन्होंने अरुणाचल प्रदेश सीमा के पास बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के साथ कंस्ट्रक्शन का काम किया, जहां उन्हें महीने में तकरीबन 1200 रुपये मिलते थे.

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बाद में उन्होंने सिक्किम में काम किया और फिर 2011 में बेंगलुरु चले गए. वहां उन्होंने लगभग 4500 रुपये महीने की सैलरी पर सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर काम किया और होटल में रूम-सर्विस की नौकरी भी की. कम सैलरी और पेमेंट में देरी की वजह से उन्होंने दूसरे मौकों की तलाश शुरू की.

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परांठा बनाने की कला सीखी

साल 2012 में दिगांता दास बेंगलुरु के होसकोटे में एक होटल में कुक के तौर पर नौकरी शुरू की. वहां काम करते हुए उन्हें ऑर्गनाइज्ड फूड प्रोडक्शन के बारे में पता चला और उन्होंने लेयर्ड मालाबार परांठा बनाने का तरीका सीखा. इसके बाद उन्होंने परांठा बनाने वाले के तौर पर और ज्यादा तजुर्बा हासिल किया और प्रोडक्शन की ऐसी तकनीकें सीखीं जो आगे चलकर उनके अपने बिजनेस की नींव बनीं. साल 2017 में उनकी तरक्की में रुकावट आई जब उन पर हाई-वोल्टेज केबल गिर गई, जिससे वो पैरालाइज्ड हो गए. ठीक होने में उन्हें तकरीबन 2 साल लगे.

7 लाख का शुरुआती इंवेस्टमेंट

हादसे से ठीक होने के बाद उनके एक दोस्त ने उनसे कॉन्टैक्ट किया जो असम में परांठा बनाने की फैक्ट्री शुरू करना चाहते थे. 2022 में उन्होंने अपनी 7 लाख रुपये की पूरी सेविंग लगाकर ‘डेली फ्रेश फूड’ शुरू किया. उनके दोस्त ने मशीनरी का इंतजाम करने में मदद की.

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शुरुआत में ये बिजनेस लोकल दुकानों को फ्रोजन मालाबार परोटा सप्लाई करता था. लगातार अच्छी क्वालिटी, स्वाद और साफ-सफाई बनाए रखकर ‘डीएफएफ’ ने धीरे-धीरे अपने कस्टमर बेस को बढ़ाया. आज कंपनी रोजाना 20 हजार से ज्यादा परांठा बनाती है, जो दिगांता दास के लिए बेशुमार कमाई का जरिया बनता है.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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