Rajesh Bharti
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Challenges For Working Mothers : जब कोई वर्किंग वुमन मां बनती है तो उसके लिए ऑफिस, बच्चे और घर के काम के बीच तालमेल बनाना काफी मुश्किल हो जाता है। वहीं अगर घर में बच्चे की देखभाल करने वाला कोईनहीं है तो यह परेशानी और ज्यादा बढ़ जाती है। कई बार बच्चे की देखभाल का असर काम पर पड़ता है। हालात ऐसे भी बन जाते हैं कि महिला को बच्चे की देखभाल के लिए जॉब भी छाेड़नी पड़ जाती है। कह सकते हैं कि मां बनने के बाद महिला के लिए अपनी जॉब बनाए रखना इतना आसान नहीं होता।
जब बच्चा हो जाता है तो महिला की नींद पूरी न होना सबसे बड़ी समस्या होती है। दरअसल, बच्चा अक्सर रात में किसी भी समय उठ जाता है। ऐसे में मां को भी उठना पड़ता है। साथ ही उसे समय-समय पर दूध भी पिलाना पड़ता है। इसके अलावा घर और ऑफिस के काम भी करने पड़ते हैं। यही कारण है कि मां की नींद पूरी नहीं हो पाती जिसका असर ऑफिस के कामकाज पर पड़ता है।
क्या करें… : अगर संभव हो तो किसी मेड को रख लें। घर के कई काम वह निपटा देगी। इससे आपको सिर्फ बच्चे और अपने ऑफिस के काम पर ध्यान देना है।

मां बनने के बाद बच्चे और ऑफिस के बीच तालमेल बनाना मुश्किल हो जाता है।
न्यूक्लियर फैमिली में सबसे बड़ी समस्या है कि बच्चे की देखभाल करने के लिए कोई अतिरिक्त सदस्य नहीं होता। अगर पति भी जॉब करता है तो बच्चे की देखभाल की समस्या और बढ़ जाती है। ऐसे में बच्चे की देखभाल और ऑफिस का काम, दोनों चीजें एक साथ करना संभव नहीं हो पाता। इस स्थिति में महिलाएं अपनी जॉब का त्याग करती हैं और पूरा समय बच्चे की देखभाल करने में लगाती हैं।
क्या करें… : अगर परिवार में कोई बड़ी महिला (मां, सास, ननद आदि) है तो उसे अपने घर बुला लें। इसका सबसे बड़ा फायदा होगा कि बच्चे की देखभाल करना आसान हो जा जाता है।
बच्चा होने पर कामकाजी महिलाओं का समय बच्चे की देखभाल और काम के बीच में ही निकल जाता है। ऐसे में वे अपने लिए समय नहीं निकाल पातीं। यही नहीं, ऐसी स्थिति होने पर ज्यादातर महिलाओं का हुनर भी खत्म हो जाता है। ऐसा होने पर कई बार महिलाएं डिप्रेशन में भी आ जाती हैं।
क्या करें… : ऐसी स्थिति से निकलने के लिए पति की मदद लें। पति को बच्चे की देखभाल से संबंधित चीजें सिखाएं। पति की भी जिम्मेदारी है कि वह बच्चे की देखभाल में पूरा सहयोग दे। ऐसे में आप अपने लिए समय निकाल सकेंगी।
कामकाज में ज्यादा घिरे होने के कारण वर्किंग वुमन की तबीयत खराब होने की भी आशंका बढ़ जाती है। दरअसल, महिला को कामकाज से अपनी सेहत का ध्यान रखने का समय ही नहीं मिल पाता है। दिन का बहुत सारा समय बच्चे की देखभाल और ऑफिस के काम में निकल जाता है। वहीं ऑफिस से थोड़ा सा जो समय मिलता है, उसमें घर के या दूसरे जरूरी काम निकल आते हैं।
क्या करें… : दिन का शेड्यूल कितना भी बिजी क्यों न हो, अपने सेहत के लिए सुबह या शाम में कम से कम 1 घंटा जरूर निकालें। एक साथ 1 घंटा नहीं निकाल सकते तो आधा-आधा घंटा सुबह-शाम में बांट लें। इसमें योग और ब्रिक्स वॉक करें।
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अगर किसी महिला के पहले से एक बच्चा है और वह छोटा (7-8 साल तक) है तो दूसरे बच्चे के जन्म के बाद बड़े बच्चे की देखभाल के लिए बमुश्किल ही समय मिल पाता है। छोटे बच्चे की देखभाल और ऑफिस व घर के काम के बीच उसके लिए समय ही नहीं मिल पाता। अगर वह बच्चा स्कूल जाता है तो सुबह का समय उसे स्कूल के लिए रेडी करना और लंच तैयार करने में ही निकल जाता है।
क्या करें… : ऐसी स्थिति में बिना सोचे-समझें सुबह के समय कोई मेड रख लें। वह सभी के लिए ब्रेकफास्ट और बच्चे के लिए लंच तैयार कर सकती है। इससे आपको बच्चे को स्कूल के लिए तैयार करने का काफी समय मिल जाएगा। इस दौरान बच्चे से ढेर सारी अच्छी बातें करें और उसे खूब सारा प्यार दें।
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