Vandana Bharti
BAG नेटवर्क के मालिकाना हक वाले News 24 में बतौर DNE नई शुरुआत करने से पहले मैं, News18 में कॉन्ट्रीब्यूटर रही. DU के खालसा कॉलेज और YMCA (2005-06) से पढ़ाई करने के बाद मैंने ...Read More
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पैसे बचाते समय सुरक्षा आमतौर पर सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है, खासकर छोटे निवेशकों के लिए जिनके पास अपनी पूंजी को जोखिम में डालने की ज्यादा गुंजाइश नहीं होती. जब सुरक्षा की बात आती है, तो पोस्ट ऑफिस (Post Office) और बैंक (Bank) दोनों ही काफी सुरक्षित माने जाते हैं, लेकिन दोनों की सुरक्षा का ‘आधार’ अलग-अलग है. यहां विस्तार से समझें कि आपका पैसा कहां और क्यों ज्यादा सुरक्षित है:
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पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाओं (जैसे PPF, NSC, MIS) को ‘सॉवरेन गारंटी’ (Sovereign Guarantee) प्राप्त होती है. यानी इनकी सुरक्षा का स्तर 100% होता है. क्योंकि सरकार खुद इसकी जिम्मेदारी लेती है. यहां आपके पूरे पैसे (मूलधन + ब्याज) की गारंटी सीधे भारत सरकार लेती है. इसके दिवालिया होने का जोखिम शून्य होता है. पोस्ट ऑफिस कभी दिवालिया नहीं हो सकता क्योंकि यह सरकार का ही हिस्सा है. अगर सीमा की बात करें तो यहां सुरक्षा की कोई अधिकतम सीमा नहीं है. आपने चाहे 10 लाख रुपये जमा किए हों या 50 लाख रुपये पूरा पैसा सरकारी सुरक्षा के दायरे में है.
बैंक डिपॉजिट कितना सुरक्षित
बैंकों में जमा पैसा DICGC (Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation) के तहत सुरक्षित होता है, जो RBI की एक संस्था है. इसकी सुरक्षा का स्तर बहुत अधिक (खासकर सरकारी बैंकों में), लेकिन एक कानूनी सीमा के साथ. बैंक डिपॉजिट पर बीमा कवर भी मिलता है. लेकिन बैंक में आपका केवल 5 लाख रुपये तक का डिपॉजिट (मूलधन और ब्याज मिलाकर) ही पूरी तरह सुरक्षित और इंश्योर्ड है.
अगर बैंक डूब जाता है या बैंक दिवालिया होता है, तो सरकार/DICGC आपको अधिकतम 5 लाख रुपये देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है, भले ही आपके खाते में 20 लाख रुपये क्यों न हों.
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आपके लिए क्या बेहतर है?
अगर सुरक्षा ही प्राथमिकता है तो पोस्ट ऑफिस नंबर-1 है. खासकर वरिष्ठ नागरिकों और उन लोगों के लिए जो जीवन भर की कमाई एक जगह रखना चाहते हैं.
अगर आपके पास बड़ी राशि है तो सारा पैसा एक ही बैंक में रखने के बजाय, उसे 5-5 लाख रुपये के टुकड़ों में अलग-अलग बैंकों में रखें ताकि पूरा पैसा बीमा के दायरे में रहे.
सरकारी बनाम निजी बैंक सुरक्षा के मामले में SBI, PNB जैसे सरकारी बैंकों को निजी बैंकों की तुलना में अधिक भरोसेमंद माना जाता है क्योंकि उनमें सरकार की हिस्सेदारी होती है.
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