---рд╡рд┐рдЬреНрдЮрд╛рдкрди---

рдХреНрдпрд╛ 70 рд╕рд╛рд▓ рдХреЗ рдЗрдВрд╕рд╛рди рдореЗрдВ рдЖ рдЬрд╛рдПрдЧреА 25 рд╕рд╛рд▓ рдХреЗ рдиреМрдЬрд╡рд╛рди рдЬреИрд╕реА рддрд╛рдХрдд?

Bharat Ek Soch : рдХреБрджрд░рддреА рдирд┐рдпрдореЛрдВ рдХреЛ рдЪреБрдиреМрддреА рджреЗрдиреЗ рдХреЗ рд▓рд┐рдП рд╡рд┐рдЬреНрдЮрд╛рди рджрд┐рди-рд░рд╛рдд рдХрд╛рдо рдХрд░ рд░рд╣рд╛ рд╣реИред рд▓реЛрдЧреЛрдВ рдХреЛ рдореГрддреНрдпреБ рдХреЗ рдЪрдХреНрд░ рд╕реЗ рдЫреБрдЯрдХрд╛рд░рд╛ рдорд┐рд▓ рд╕рдХреЗ, рдЗрд╕реЗ рд▓реЗрдХрд░ рдЖрдзреБрдирд┐рдХ рд╡рд┐рдЬреНрдЮрд╛рди рддреЗрдЬреА рд╕реЗ рд░рд┐рд╕рд░реНрдЪ рдХрд░ рд░рд╣рд╛ рд╣реИред

---рд╡рд┐рдЬреНрдЮрд╛рдкрди---

Bharat Ek Soch : हजारों साल से इंसान की दो अधूरी ख्वाहिशें रही हैं- एक पारस पत्थर हासिल करने की। कहा जाता है कि पारस पत्थर से किसी धातु का स्पर्श कराया जाता है- वो सोना बन जाती है। दूसरा- उस अमृत को हासिल करने की जिसे पीने के बाद इंसान अमर हो जाता है। ये दोनों चीजें इंसान को हजारों साल से रोमांचित करती रही हैं। लेकिन, विज्ञान कुदरत के नियमों को चुनौती देने के लिए दिन-रात काम कर रहा है। ऐसे में आधुनिक विज्ञान तेजी से उस दिशा में काम कर रहा है, जिसमें लोगों को मृत्यु के चक्र से छुटकारा दिलाया जा सके। मतलब, इंसान के जन्म की तारीख और समय तो तय होगा। लेकिन, मृत्यु उसकी इच्छा पर निर्भर करेगी?

अमेरिकी अरबपति ब्रायन जॉनसन भी मौत को मात देने की कोशिश कर रहे हैं- वो 47 साल की उम्र में 17 जैसा दिखना चाहते हैं। जॉनसन चाहते हैं कि उनके शरीर के सभी अंग ठीक उसी तरह काम करें- जैसा 17 साल की उम्र के किसी नौजवान के करते हैं। Immortality यानी अमर होना सिर्फ इंसान की कोरी कल्पना रही है या मृत्यु को टालना संभव है? क्या आने वाले वर्षों में विज्ञान इतनी तरक्की कर लेगा कि 70 साल के इंसान के शरीर में 25 साल के नौजवान जैसी ताकत आ जाएगी? क्या बढ़ती उम्र के साथ होने वाली गंभीर बीमारियों को शरीर से दूर रखा जा सकेगा? विज्ञान की मदद से किसी इंसान की जिंदगी कितनी लंबी की जा सकती है? अगर इंसानों की जिंदगी और लंबी होने लगी तो हमारे सामाजिक चक्र में किस तरह के बदलाव करने पड़ सकते हैं।

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें : कैसा होगा 2047 का विकसित भारत? कितने और क्यों अहम हैं अगले 23 साल?

एंटी एजिंग एक्सपेरिमेंट्स के लिए जाने जाते हैं ब्रायन जॉनसन

ब्रायन जॉनसन पूरी दुनिया में अपनी एंटी एजिंग एक्सपेरिमेंट्स (Anti Ageing Experiments) के लिए जाने जाते हैं। यहां तक की उन्होंने यंग ब्लड थेरेपी (Young Blood Therapy) के लिए अपने बेटे और पिता के साथ प्लाज्मा की अदला-बदली की। जॉनसन के बेटे की उम्र 17 साल और पिता की 70 साल है। वो रोजाना 100 से अधिक स्पलीमेंट्स लेते हैं, भरपूर मात्रा में सब्जियां खाते हैं। दुनिया में जहां भी जाते हैं- अपना खाना-पानी साथ लेकर चलते हैं। उनके सोने, उठने-बैठने, खाने-पीने सबका टाइम तय है, जिसका वो बहुत ही कड़ाई से पालन करते हैं। ये अमेरिकी बिजनेस टायकून का Don’t Die मिशन को लेकर जुनून ही है कि अगर किसी शहर की हवा खराब हुई यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स (Air Quality Index) गंभीर है- वो अपनी यात्रा टाल देते हैं। ऐसे में सबसे पहले समझते हैं कि ब्रायन जॉनसन मौत को मात देने के लिए किन-किन तरीकों को अपना रहे हैं।

---विज्ञापन---

अपनी सेहत और उम्र को लेकर एक्टिव रहते हैं ब्रायन जॉनसन

ब्रायन जॉनसन बहुत पैसे वाले हैं- वो हमेशा अपनी सेहत और उम्र के बारे सोचते रहते हैं। खुद को जवान बनाए रखने के लिए हर महीने करोड़ों रुपये खर्च कर सकते हैं। अपनी दिनचर्या और खानपान का रिकॉर्ड मेंटेन करने के लिए मोटी तनख्वाह पर कई कर्मचारी रखे होंगे। सेहत से जुड़े हर मसले पर सलाह के लिए उसके सामने हमेशा डॉक्टरों का एक्सपर्ट पैनल तैयार रहता होगा। लेकिन, एक सवाल ये भी जवान रहने के जुनून में कहीं जॉनसन अपनी जिंदगी जीना ही तो नहीं भूल गए हैं? लेकिन, एक बड़ा सच ये भी है कि वैज्ञानिक कुछ ऐसा खोजने में लगे हैं- जो हमारी उम्र को आज के मुकाबले कई गुना बढ़ा दे। दुनिया के जाने माने लेखक मैक्स टैगमार्क की एक किताब है- Life 3.0: Being Human in the Age of Artificial Intelligence… इस किताब में टैगमार्क जीवन को तीन हिस्सों में बांटते हैं। पहला- बैक्टीरियल लाइफ…जिसमें विकसित होते प्राणियों को रखते हैं। दूसरे हिस्से में विकसित इंसानों की बात करते हैं। तीसरे हिस्से में इंसान को बायोलॉजिकल से अधिक टेक्निकल बताते हैं। इसमें हम मशीनों को अपने शरीर के अंगों की तरह इस्तेमाल करेंगे। अभी इंसान जीवन के विकास के तीसरे चरण से गुजर रहा है। मसलन, अगर दिल काम नहीं कर रहा है- तो आर्टिफिशियल हार्ट यानी पेसमेकर के जरिए जिंदगी चल रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में इंसान के शरीर में ऐसे नैनो बोट्स सेट किए जा सकते हैं- जो शरीर को बुड्ढा बनाने वाली प्रक्रिया रोक दे या कुछ समय के लिए टाल दे?

‘2030 तक अमर हो जाएगा इंसान’ 

अमेरिका के एक मशहूर कंप्यूटर साइंटिस्ट, कारोबारी, लेखक और भविष्यदृष्टा हैं- Reymond Kurzewil… इनका दावा है कि 2030 तक यानी अगले पांच-छह वर्षों में इंसान अमर हो जाएगा। इनके दावों के सही साबित होने का ट्रैक-रिकॉर्ड बहुत बेहतर रहा है। कर्जबेल का दावा है कि एज-रिवर्सिंग नैनोबोट्स की मदद से इंसान अपनी कोशिकाओं को नष्ट होने से बचा सकेगा। इसे भी Immortality का ही नाम दिया जा रहा है। इसी तरह कुछ वैज्ञानिक इस प्रयोग में जुटे हैं- जिससे बढ़ती उम्र के साथ होने वाली बीमारियों को ठीक किया जा सके? जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) को डबल किया जा सके। सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की बुनियादी पहुंच और जीवन स्तर में बदलाव का ही नतीजा है कि आजादी के समय जहां देश में लोगों की जीवन प्रत्याशा 32 साल थी, वो अब 70 साल पार कर गई है।

---विज्ञापन---

इंसान की उम्र 140 हो जाएगी तो फिर क्या होगा

क्या कभी आपके दिमाग में ये बात आई है कि अगर इंसान अमर हो जाएगा या जीवन प्रत्याशा 70 साल से बढ़कर 140 साल हो जाएगी तो क्या होगा? क्या विज्ञान हमें महाभारत के किरदार भीष्म की तरह बना देगा, जिन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान था यानी जिनमें मौत का समय खुद तय करने की शक्ति थी। अगर ऐसा हुआ तो दुनिया में नौकरी से रिटायरमेंट की जगह धरती पर जिंदगी जीने की सीमा तय करनी पड़ सकती है। बड़ी आबादी की भूख मिटाने के लिए और अन्न की जरूरत होगी? ऐसे में अधिक अनाज उत्पादन के साथ-साथ ऐसी टैबलेट के आविष्कार पर भी जोर होगा- जिन्हें लोग नाश्ता, लंच या डिनर की जगह ले सकेंगे। सौर मंडल में ऐसे ग्रह भी खोजने पड़ सकते हैं, जहां इंसानी आबादी के रहने लायक आबोहवा मौजूद हो।

यह भी पढ़ें : Indian’s Health And Fitness: जब खुद नहीं रहेंगे फिट तो विकसित कैसे बनेगा भारत?

---विज्ञापन---

अमरत्व और अमृत पाने की लालसा पुरानी है

एक बड़ा सच ये भी है कि उम्र को हराने की जंग, इंसान को जिंदगी से ही दूर करने लगी है। लोग जिंदगी के मर्म को ही भूलने लगे हैं कि जिंदगी लंबी नहीं, बड़ी होनी चाहिए। पूरी दुनिया में अमरत्व और अमृत पाने की लालसा बहुत रोमांचक और पुरानी है। हिंदू पौराणिक ग्रंथों में हनुमान, बाली, व्यास, विभीषण, परशुराम, कृपाचार्य, अश्वत्थामा को अमर बताया गया है। कहा जाता है कि आज भी अश्वत्थामा इस दुनिया में भटक रहे हैं। परशुराम का जिक्र त्रेतायुग की रामायण में भी और महाभारत में भी। इसी तरह हनुमानजी का जिक्र रामायण में भी है महाभारत में भी। ऐसे में एक सवाल ये भी उठता है कि कहीं लंबी उम्र को हमारे पौराणिक ग्रंथों में अमरत्व तो नहीं कहा गया और जिंदगी बढ़ाने वाले संतुलित खान-पान को अमृत।

अमर होने के लिए भारत आया था सिकंदर

हिमालय घाटी में हजारों साल से एक कहावत मशहूर है- यूनान से लड़ते हुए सिकंदर भारत आया था- एक ऐसे सरोवर की तलाश में, जिसका पानी पीते ही इंसान अमर हो जाता था। बहुत खोजबीन के बाद सिकंदर उस सरोवर तक पहुंचा। जैसे ही उसने पानी पीने की कोशिश की। एक बहुत ही कर्कश आवाज में कौआ चिल्लाया। इस पानी को मत पीओ। सिकंदर ने देखा- उस कौए की चोंच सोने की थी, शरीर ब्रज की तरह दमक रहा था। सिकंदर को ऐसा लगा, जैसे कौए का चक्रवर्ती राजा उसके सामने है। सिकंदर ने सवाल किया- इस सरोवर का पानी क्यों न पिएं। कौए ने जवाब दिया- तुम भी मेरी तरह हो जाओगे। अमर… हमेशा के लिए अमर। जिंदगी से परेशान। मैं हजारों साल से इस सोने की चोंच, वज्र जैसे शरीर और कर्कश आवाज के साथ धरती पर हूं। कोई बदलाव नहीं, ये भी कोई जीवन है।

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें : Parliament Winter Session: संसद में हंगामे का जिम्मेदार कौन, क्या ऐसे बनेगा 2047 का विकसित भारत?

इंसान का शरीर मरता है, आत्मा नहीं : श्रीमद्भागवत गीता

दरअसल, इस कहावत के जरिए संदेश देने की कोशिश होती रही है कि कुदरत ने जीवन और मृत्यु का जो चक्र बनाया है, उसमें हर किसी को अपना किरदार निभाना है। श्रीमद्भागवत गीता में कहा गया है कि इंसान का शरीर मरता है- आत्मा नहीं। इसलिए भारतीय परंपरा में इंसान की लंबी उम्र से अधिक अच्छे कर्मों पर जोर दिया गया है। बहुत हद तक संभव है कि आने वाले वर्षों में विज्ञान इतना तरक्की कर ले कि इंसान की मौजूदा उम्र दोगुनी हो जाए। लेकिन, हमेशा के लिए अमर होना दूर की कौड़ी दिख रही है।

---विज्ञापन---

First published on: Jan 06, 2025 09:18 PM

End of Article

About the Author

Anurradha Prasad

рдЕрдиреБрд░рд╛рдзрд╛ рдкреНрд░рд╕рд╛рдж рдХреЗ рд▓рд┐рдП рдкрддреНрд░рдХрд╛рд░рд┐рддрд╛ рд╕рд┐рд░реНрдл рдкреЗрд╢рд╛ рдирд╣реАрдВ...рдорд┐рд╢рди рд╣реИред рдЕрдкрдиреА рд╕рд╛рдврд╝реЗ рддреАрди рджрд╢рдХ рдХреА рдЯреЗрд▓реАрд╡рд┐рдЬрди рдкрддреНрд░рдХрд╛рд░рд┐рддрд╛ рдореЗрдВ рд╣рд░ рддрд░рд╣ рдХрд╛ рдкреНрд░рдпреЛрдЧ рджреЗрдЦрд╛...рд╣рд░ рдмрджрд▓рд╛рд╡ рдХреА рд╕рд╛рдХреНрд╖реА рд░рд╣реАрдВ... рдПрдХ рддреЗрдЬ-рддрд░реНрд░рд╛рд░ рд░рд┐рдкреЛрд░реНрдЯрд░ рд╕реЗ рд╕рдлрд▓ рдореАрдбрд┐рдпрд╛ рдЙрджреНрдпрдореА рдмрдиреАрдВ....рдЕрдкрдиреА рддреЗрдЬ рдирдЬрд╝рд░,┬арджреВрд░рджрд░реНрд╢реА рд╕реЛрдЪ рдФрд░ рдХрд▓рдо рдХреЗ рджрдо рдкрд░ рдореАрдбрд┐рдпрд╛ рдЬрдЧрдд рдореЗрдВ рдПрдХ рджрдорджрд╛рд░ рд╣рд╕реНрддрд╛рдХреНрд╖рд░ рд╣реИрдВред рдЕрдиреБрд░рд╛рдзрд╛ рдкреНрд░рд╕рд╛рдж рдЬреА рдиреНрдпреВрдЬрд╝┬а24┬ардХреА рдПрдбрд┐рдЯрд░-рдЗрди-рдЪреАрдл рдФрд░ рдмреАрдПрдЬреА рдиреЗрдЯрд╡рд░реНрдХ рдХреА рд╕реАрдПрдордбреА рд╣реИрдВ┬а┬аред рдмрддреМрд░ рдЯреЗрд▓реАрд╡рд┐рдЬрди рдкрддреНрд░рдХрд╛рд░ рд╣рд░ рднрд╛рд░рддреАрдп рдХреА рдЖрд╡рд╛рдЬ рдмреБрд▓рдВрдж рдХрд░рдиреЗ рдХреА рдИрдорд╛рдирджрд╛рд░ рдХреЛрд╢рд┐рд╢┬ардХрд┐рдпрд╛┬ардФрд░ рд╣рдореЗрд╢рд╛┬аThink First┬ардХреЗ рдлрд▓рд╕рдлреЗ рдкрд░ рдЖрдЧреЗ рдмрдврд╝рдиреЗ рдореЗрдВ рдпрдХреАрди рдХрд░рддреА рд╣реИрдВред рдиреНрдпреВрдЬрд╝┬а24┬ардкрд░ рдЗрддрд┐рд╣рд╛рд╕ рдЧрд╡рд╛рд╣ рд╣реИ...рд╕реАрд░реАрдЬ рдХреЗ рдЬрд░рд┐рдП рджрд░реНрд╢рдХреЛрдВ рдХреЛ рдЕрддреАрдд рдХреЗ рдкрдиреНрдиреЛрдВ рд╕реЗ рд░реВ-рдм-рд░реВ рдХрд░рд╡рд╛рддреА рд░рд╣реА┬ард╣реИрдВ..┬арддреЛ рднрд╛рд░рдд рднрд╛рдЧреНрдп рд╡рд┐рдзрд╛рддрд╛ рдЬреИрд╕реА рд╕реАрд░рд┐рдЬ рдХреЗ рдЬрд░рд┐рдП рдЙрди рд╕рдВрд╕реНрдерд╛рдУрдВ рдФрд░ рд╡реНрдпрдХреНрддрд┐рдпреЛрдВ рд╕реЗ┬арджрд░реНрд╢рдХреЛрдВ┬ардХрд╛ рдкрд░рд┐рдЪрдп рдХрд░рд╛рдпрд╛-┬ардЬреЛ рдЖрдЬрд╛рдж рднрд╛рд░рдд рдореЗрдВ рд▓реЛрдХрддрдВрддреНрд░ рдХреЛ┬а┬ардордЬрдмреВрдд рдФрд░ рдЧрдгрддрдВрддреНрд░ рдХреЛ рдмреБрд▓рдВрдж рдмрдирд╛рдиреЗ рдореЗрдВ рдЦрд╛рдореЛрд╢реА рд╕реЗ рдХрд░реНрдордпреЛрдЧреА рдХреА рднреВрдорд┐рдХрд╛ рдореЗрдВ рд╣реИрдВред┬ардЗрд╕реА рддрд░рд╣ рднрд╛рд░рдд рдПрдХ рд╕реЛрдЪ рдХреЗ рдЬрд░рд┐рдП рд╡рдХреНрдд рд╕реЗ рдЖрдЧреЗ рдХреА рд╕реЛрдЪ рд╕реЗ рднреА рджрд░реНрд╢рдХреЛрдВ рдХрд╛ рд╕рд╛рдХреНрд╖рд╛рддреНрдХрд╛рд░ рдХрд░рд╛рддреА рд░рд╣реА рд╣реИрдВ ред рдпреЗ┬ардЕрдиреБрд░рд╛рдзрд╛ рдкреНрд░рд╕рд╛рдж рдХреА┬ардореБрдЦрд░ рдФрд░ рдкреНрд░рдЦрд░ рд╕реЛрдЪ рдХрд╛ рд╣реА рдирддреАрдЬрд╛ рд╣реИ рдХрд┐ рдиреНрдпреВрдЬрд╝ 24 рдкрд░ рдорд╛рд╣реМрд▓ рдХреНрдпрд╛ рд╣реИ-рдХрд╛рд░реНрдпрдХреНрд░рдо рдореЗрдВ рдЖрдо рдЖрджрдореА рдХреА рдЖрд╡рд╛рдЬ рдХреЛ┬а┬ардкреВрд░реА рддрд╡рдЬреНрдЬреЛ рдорд┐рд▓рддреА рд╣реИ...рддреЛ┬аIndiaтАЩs Tiger┬ардЬреИрд╕реА рдЯреЗрд▓реА рд╕реАрд░реАрдЬ рдХреЗ рдЬрд░рд┐рдП рдЙрди рдЧреБрдордирд╛рдо рдЬрд╛рд╕реВрд╕реЛрдВ рдХреЗ рдпреЛрдЧрджрд╛рди рд╕реЗ рднреА рджрд░реНрд╢рдХреЛрдВ рддреЛ рдорд┐рд▓рд╡рд╛рдиреЗ рдХрд╛ рднрдЧреАрд░рде рдкреНрд░рдпрд╛рд╕ рд╣реЛ рд░рд╣рд╛ рд╣реИ, рдЬреЛ рдЦрд╛рдореЛрд╢реА рд╕реЗ рдЕрдкрдирд╛ рдХрд╛рдо рдХрд░ рдиреЗрдкрдереНрдп рдореЗрдВ рдЪрд▓реЗ рдЧрдП ред┬ардордВрдерди рдХрд╛ рдордВрдЪ рд╕рдЬрд╛ рдХрд░ рд╕рдорд╛рдЬ рдФрд░ рд╕рд┐рд╕реНрдЯрдо рдХреЗ рдЕрд╕рд░рджрд╛рд░ рд▓реЛрдЧреЛрдВ рдХреА рд╕реЛрдЪ рд╕реЗ рджрд░реНрд╢рдХреЛрдВ рдХрд╛ рд╕рд╛рдХреНрд╖рд╛рддреНрдХрд╛рд░ рдХрд░рд╛рддреА┬ард░рд╣реА┬ард╣реИрдВ ред 1990┬ардХреЗ рджрд╢рдХ рдореЗрдВ рдкреНрд░рд╕рд╛рд░рд┐рдд рдЖрдкрдХреЗ┬аThe horse's mouth┬ардФрд░┬аLetтАЩs Talk┬ард╢реЛ рдиреЗ рднрд╛рд░рддреАрдп рдЯреЗрд▓реАрд╡рд┐рдЬрди рдХреЛ рдЪрд░реНрдЪрд┐рдд рд╢рдЦреНрд╕рд┐рдпрддреЛрдВ рдХреЗ рдЗрдВрдЯрд░рд╡реНрдпреВ рдХрд╛ рдирдпрд╛ рдЕрдВрджрд╛рдЬ рджрд┐рдпрд╛...рддреЛ рдЖрдордиреЗ-рд╕рд╛рдордиреЗ рдореЗрдВ рдЖрдкрдХреЗ рддреАрдЦреЗ рд╕рд╡рд╛рд▓реЛрдВ рдХрд╛ рджреЗрд╢ рдХреЗ рдЬреНрдпрд╛рджрд╛рддрд░ рд╕рд┐рдпрд╛рд╕рддрджрд╛рдиреЛрдВ рдиреЗ рд╕рд╛рдордирд╛ рдХрд┐рдпрд╛ред рдЖрдкрдХреА рдЕрдЧреБрд╡рд╛рдИ рдореЗрдВ рдмреАрдПрдЬреА рдиреЗрдЯрд╡рд░реНрдХ рдиреЗ рд╕рд╛рдорд╛рдЬрд┐рдХ рд╕рд░реЛрдХрд╛рд░ рдФрд░ рдЬрд╛рдЧрд░реВрдХрддрд╛ рдХреЗ рд╕рдВрджреЗрд╢ рд╡рд╛рд▓реЗ рдХрдИ рдХрд╛рд░реНрдпрдХреНрд░рдо рдмрдирд╛рдП рддреЛ рдЪреБрдирд╛рд╡реА рдореМрд╕рдо рдореЗрдВ рдиреЗрддрд╛рдУрдВ рдХреЗ рдЪрд╛рд▓,┬ардЪрд░рд┐рддреНрд░ рдФрд░ рдЪреЗрд╣рд░реЗ рдХреЛ рднреА рд░реЛрдЪрдХ рдЕрдВрджрд╛рдЬ рдореЗрдВ рджрд░реНрд╢рдХреЛрдВ рдХреЗ рд╕рд╛рдордиреЗ рд░рдЦрдиреЗ рдХрд╛ рд╕рдлрд▓ рдкреНрд░рдпреЛрдЧ рдХрд┐рдпрд╛ ред рдЕрдиреБрд░рд╛рдзрд╛ рдкреНрд░рд╕рд╛рдж рднрд╛рд░рдд рдореЗрдВ рдЯреЗрд▓реАрд╡рд┐рдЬрди рдкрддреНрд░рдХрд╛рд░рд┐рддрд╛ рдореЗрдВ рдкрд╣рд▓реА рдкреАрдврд╝реА рдХреА рдкрддреНрд░рдХрд╛рд░ рд╣реИрдВ...рдЬрд┐рдиреНрд╣реЛрдВрдиреЗ рдЕрдкрдиреА рдмреБрд▓рдВрдж рд╕реЛрдЪ рдФрд░ рдирдП-рдирдП рд╢реЛрдЬ рд╕реЗ рднрд╛рд░рддреАрдп рдЯреЗрд▓реАрд╡рд┐рдЬрди рдиреНрдпреВрдЬрд╝ рдХрд╛ рдЪреЗрд╣рд░рд╛ рдмрджрд▓рд╛ ред рдЕрдиреБрд░рд╛рдзрд╛ рдкреНрд░рд╕рд╛рдж рднрд╛рд░рдд рдХреЛ рд╕рдорд░реНрдкрд┐рдд рдПрдХ рдРрд╕реА рд╢рдЦреНрд╕рд┐рдпрдд рд╣реИрдВ... рдЬреЛ рдкрддреНрд░рдХрд╛рд░рд┐рддрд╛ рдХреЗ рдЬрд░рд┐рдП рд╣рдореЗрд╢рд╛ рд╕рдорд╛рдЬ рдХреЛ рдХреБрдЫ рдирдпрд╛ рджреЗрдиреЗ рдХреЗ рдорд┐рд╢рди рдореЗрдВ рдкреВрд░реА рд╢рд┐рджреНрджрдд рд╕реЗ рдЬреБрдЯреА рд░рд╣рддреА рд╣реИрдВ...рдЬреБрдЯреА рд╣реБрдИ рд╣реИрдВ рдФрд░ рдЬреБрдЯреА рд░рд╣реЗрдВрдЧреАред

Read More
---рд╡рд┐рдЬреНрдЮрд╛рдкрди---
рд╕рдВрдмрдВрдзрд┐рдд рдЦрдмрд░реЗрдВ
Sponsored Links by Taboola