---विज्ञापन---

Bharat Ek Soch: क्या हमेशा जवान दिखने का जुनून जिंदगी पर भारी पड़ रहा है?

Bharat Ek Soch: ज्यादातर इंसान चाहते हैं कि वो इस धरती पर ज्यादा से ज्यादा दिनों तक जिंदा रहे, हमेशा के लिए अजर-अमर हो जाए। डॉक्टर और वैज्ञानिक कुदरत के नियमों को लगातार चुनौती देने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। जिसमें लोगों को मृत्यु के चक्र से छुटकारा दिलाया जा सके।

---विज्ञापन---

Bharat Ek Soch: आठ अरब से अधिक आबादी वाली दुनिया में तीन तरह के लोग मिलेंगे एक, जो इस धरती पर अधिक दिनों तक जीना चाहते हैं। यहां की सुख-सुविधाओं को भोगने की ख्वाहिश रखते हैं और अपने काम के जरिए नाम कमाना चाहते हैं।दूसरे, ऐसे लोग भी कम नहीं हैं जो रोजमर्रा की भागदौड़ और चुनौतियों से परेशान होकर सोचते हैं कि काश इस जीवनचक्र से छुटकारा मिल जाए। तीसरे, जो जिंदगी के हर लम्हे को कायनात की अमानत मानते हुए धरती पर अपना किरदार निभाते हुए फना हो जाना चाहते हैं। ऐसे लोगों के लिए मौत जिंदगी का अंत नहीं पूर्णता है। लेकिन, एक बड़ा सच ये भी है कि ज्यादातर इंसान चाहते हैं कि वो इस धरती पर ज्यादा से ज्यादा दिनों तक जिंदा रहे, हमेशा के लिए अजर-अमर हो जाए।

क्या मृत्यु को टालना संभव है?

ऐसे में डॉक्टर और वैज्ञानिक कुदरत के नियमों को लगातार चुनौती देने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। आधुनिक विज्ञान तेजी से उस दिशा में काम कर रहा है– जिसमें लोगों को मृत्यु के चक्र से छुटकारा दिलाया जा सके। मतलब, इंसान के जन्म की तारीख और समय तो तय होगा लेकिन, मृत्यु उसकी इच्छा पर निर्भर करेगी? एक सच ये भी है कि जेनेरेटिव एआई मौत, स्मृति और अमरत्व को नए तरीके से परिभाषित कर रहे हैं। ऐसे में आज समझने की कोशिश करेंगे कि Immortality यानी अमरत्व सिर्फ इंसान की कल्पना रही है या फिर मृत्यु को टालना संभव है? क्या भविष्य में विज्ञान इतनी तरक्की कर लेगा कि इंसान अपने भौतिक शरीर के अंत का समय खुद तय करेगा ? क्या बढ़ती उम्र के साथ होने वाली बड़ी बीमारियों को शरीर से दूर रखा जा सकेगा? तकनीक की मदद से एक इंसान की जिंदगी के कितने वर्ष बढ़ाए जा सकते हैं? एक इंसान के मरने के बाद उसके वर्चुअल जीवन का क्या होगा? किसी इंसान की मौत के बाद उसकी डिजिटल संपत्ति या जिंदगी का मालिक कौन होगा? आज ऐसे ही सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश करेंगे– अपने खास कार्यक्रम जिंदगी ना मिलेगी दोबारा में.

---विज्ञापन---

अगले 25 साल में लोग मरेंगे नहीं

ब्रिटेन के एक मशहूर भविष्यवक्ता यानी Futurologist है– डॉक्टर इयान पियर्सन। कुछ समय पहले डॉक्टर पियर्सन ने एक चौंकाने वाली भविष्यवाणी की। इनका आंकलन है कि अगले 25 साल में लोग मरेंगे नहीं। लोग अपना दिमाग कंप्यूटर या रोबोटिक शरीर में अपलोड कर अमर हो जाएंगे। इनके मुताबिक, कंप्यूटिंग, जेनेटिक इंजीनियरिंग और रोबोटिक्स में तेजी से हो रही तरक्की से ऐसा संभव होगा। इसी तरह अमेरिका के एक मशहूर कंप्यूटर साइंटिस्ट, कारोबारी, लेखक और भविष्यदृष्टा हैं– Reymond Kurzewil इनका दावा है कि 2030 तक यानी अगले पांच-छह वर्षों में इंसान अमर हो जाएगा। इनके दावों के सही साबित होने का ट्रैक-रिकॉर्ड बेहतर रहा है। कर्जबेल का दावा है कि एज-रिवर्सिंग नैनोबोट्स की मदद से इंसान अपनी कोशिकाओं को नष्ट होने से बचा सकेगा, इसे भी अमर होने का नाम दिया जा रहा है । सबसे पहले ये समझते हैं कि वैज्ञानिक और डॉक्टर किसी इंसान के अमर होने की सोच को किस तरह से देखते हैं?

इंसान के शरीर में नैनो बोट्स सेट होंगे 

दुनिया के जाने माने लेखक मैक्स टैगमार्क की एक किताब है- Life 3.0: Being Human in the Age of Artificial Intelligence इस किताब में टैगमार्क जीवन को तीन हिस्सों में बांटते है। पहला, बैक्टीरियल लाइफ…जिसमें विकसित होते प्राणियों को रखते हैं । दूसरे हिस्से में विकसित इंसानों की बात करते हैं । तीसरे हिस्से में इंसान को बायोलॉजिकल से अधिक टेक्निकल बताते हैं । इसमें हम मशीनों को अपने शरीर के अंगों की तरह इस्तेमाल करेंगे। अभी इंसान जीवन के विकास के तीसरे चरण से गुजर रहा है । मसलन, अगर दिल काम नहीं कर रहा है- तो आर्टिफिशियल हार्ट यानी पेसमेकर के जरिए जिंदगी चल रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में इंसान के शरीर में ऐसे नैनो बोट्स सेट किए जा सकते हैं– जो शरीर को बुड्ढा बनाने वाली प्रक्रिया रोक दे या कुछ समय के लिए टाल दे?

---विज्ञापन---

आबादी का बड़ा हिस्सा वर्चुअल वर्ल्ड में भी वजूद रखता है

अब मैं आपको थोड़ा फ्लैसबैक में लेकर चलती हूं । वो महीना जून का था और साल 2022 का होलोकास्ट कैंपेनर मरीना स्मिथ 87 साल की उम्र में इस दुनिया से चल बसी। ब्रिटेन के नॉर्टिंगघम में अंतिम संस्कार के लिए उनके परिवार के लोग और करीबी जुटे। इस मौके पर मरीना स्मिथ अपने खास अंदाज में परिवार और दोस्तों के साथ बातचीत करती दिखीं। अंतिम संस्कार में पहुंचे लोगों के लिए ये किसी चमत्कार से कम नहीं था। दरअसल, स्टोरीफाइल नाम की कंपनी ने AI तकनीक के जरिए मरीना स्मिथ को एक तरह से डिजिटली जिंदा कर दिया था यानी तकनीक इस कदर एडवांस होती जा रही है – जिसमें Near & Dear के दुनिया से चले जाने के बाद भी उनसे जुड़ाव महसूस करने का रास्ता निकाला जा रहा है। आज की तारीख में दुनिया की आबादी का बड़ा हिस्सा वर्चुअल वर्ल्ड में भी वजूद रखता है । ऐसे में सवाल उठता है कि एक इंसान के भौतिक शरीर के नष्ट होने के बाद उसकी वर्चुअल जिंदगी का क्या होगा ? उसके डिजिटल खातों का मालिक कौन होगा ? क्या भविष्य में डिजिटल खातों का जिक्र भी वसीयत में दिख सकता है?

---विज्ञापन---

यादें भावनात्मक लगावों को मजबूत बनाती है

यादें अनमोल होती है। अतीत को वर्तमान से जोड़ती है भावनात्मक लगावों को मजबूत बनाती है। जिसकी गवाही करीब साढ़े चार हजार साल से खड़े मिस्र के पिरामिड देते हैं। फिरौन शासकों ने अपनी विरासत को संरक्षित करने के मकसद से पिरामिड बनवाए। भारत के नक्शे पर कई ऐसे विशालकाय मंदिर खड़े हैं, जो समाज की तरक्की में ध्वजवाहक की भूमिका में रहे। दिल्ली में हुमायूं का मकबरा हो या आगरा का ताजमहल अपने दौर में मुगलिया सल्तनत की शान-ओ-शौकत, मोहब्बत और शिल्पकला की अमर कहानी बयां कर रहे हैं।

इतिहास की इन धरोधरों से कहीं अधिक समृद्ध और समावेशी कहानियों को संजोने का मौका हर शख्स को डिजिटल वर्ल्ड ने दिया है। आज के डिजिटल वर्ल्ड में अनगिनत ऐसी हस्तियां और उनकी सोच हैं– जो उनके जाने के बाद भी दुनिया को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में इंसान की वर्चुअल जिंदगी की longevity को लेकर भी नए सिरे से बहस शुरु हो गई है। विज्ञान और तकनीक की मदद से इंसान की औसत उम्र 20 साल 50 साल बढ़ सकती है लेकिन, एक इंसान के डिजिटली अमर होने के चांस अधिक हैं। लेकिन, क्या कभी आपके दिमाग में ये बात आई है कि अगर इंसान अमर हो जाएगा या फिर Life Expectancy 70 साल से बढ़कर 140 साल हो जाएगी तो क्या होगा ?

---विज्ञापन---

जिंदगी को लंबी करने के लिए नए प्रयोग जारी है

ये सच है कि धरती पर ज्यादातर लोगों की सोच है कि ये जिंदगी ना मिलेगी दोबारा। ऐसे में जिंदगी को किस तरह जिया जाए कि खुशहाल और लंबी हो, इसे लेकर तरह-तरह के रास्ते निकाले जा रहे हैं। कुदरत के बनाए हांड – मांस के शरीर की कमियों को मशीनों के जरिए ठीक कर जिंदगी को लंबी करने के लिए नए-नए प्रयोग जारी है । कोशिकाओं में छिपे उन रहस्यों को भी खोजने की कोशिश हो रही है, जो किसी इंसान के शरीर को समय के साथ कमजोर यानी बुढ़ा बनाते हैं। ऐसे में Anti Aging और Reverse Aging को लेकर दुनियाभर में नए-नए प्रयोग हो रहे हैं। लेकिन, एक सच ये भी है कि उम्र को हराने की जंग, इंसान को जिंदगी से ही दूर करने लगी है। लोग जिंदगी के मर्म को ही भूलने लगे हैं कि जिंदगी लंबी नहीं, बड़ी होनी चाहिए। कुछ इसी तरह लोगों की डिजिटल जिंदगी ने भी कई नए सवाल पैदा कर दिए हैं… पूछा जा रहा है कि क्या इंसान की मौत के साथ ही उसकी डिजिटल जिंदगी भी खत्म हो जाएगी या फिर विज्ञान इतना तरक्की कर लेगा कि लोग अपने Near & Dear को डिजिटली जिंदा रखने में खासी दिलचस्पी दिखाएंगे?

श्रीमद्भागवत गीता में कहा गया है कि इंसान का शरीर मरता है- आत्मा नहीं। इसलिए भारतीय परंपरा में इंसान की लंबी उम्र से अधिक अच्छे कर्मों पर जोर दिया गया है । बहुत हद तक संभव है कि आने वाले वर्षों में विज्ञान इतना तरक्की कर ले कि इंसान की मौजूदा उम्र दोगुनी हो जाए लेकिन, हमेशा के लिए अमर होना दूर की कौड़ी दिख रही है। 

---विज्ञापन---
First published on: Jun 28, 2025 09:29 PM

End of Article

About the Author

Anurradha Prasad

अनुराधा प्रसाद के लिए पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं...मिशन है। अपनी साढ़े तीन दशक की टेलीविजन पत्रकारिता में हर तरह का प्रयोग देखा...हर बदलाव की साक्षी रहीं... एक तेज-तर्रार रिपोर्टर से सफल मीडिया उद्यमी बनीं....अपनी तेज नज़र, दूरदर्शी सोच और कलम के दम पर मीडिया जगत में एक दमदार हस्ताक्षर हैं। अनुराधा प्रसाद जी न्यूज़ 24 की एडिटर-इन-चीफ और बीएजी नेटवर्क की सीएमडी हैं  । बतौर टेलीविजन पत्रकार हर भारतीय की आवाज बुलंद करने की ईमानदार कोशिश किया और हमेशा Think First के फलसफे पर आगे बढ़ने में यकीन करती हैं। न्यूज़ 24 पर इतिहास गवाह है...सीरीज के जरिए दर्शकों को अतीत के पन्नों से रू-ब-रू करवाती रही हैं.. तो भारत भाग्य विधाता जैसी सीरिज के जरिए उन संस्थाओं और व्यक्तियों से दर्शकों का परिचय कराया- जो आजाद भारत में लोकतंत्र को  मजबूत और गणतंत्र को बुलंद बनाने में खामोशी से कर्मयोगी की भूमिका में हैं। इसी तरह भारत एक सोच के जरिए वक्त से आगे की सोच से भी दर्शकों का साक्षात्कार कराती रही हैं । ये अनुराधा प्रसाद की मुखर और प्रखर सोच का ही नतीजा है कि न्यूज़ 24 पर माहौल क्या है-कार्यक्रम में आम आदमी की आवाज को  पूरी तवज्जो मिलती है...तो India’s Tiger जैसी टेली सीरीज के जरिए उन गुमनाम जासूसों के योगदान से भी दर्शकों तो मिलवाने का भगीरथ प्रयास हो रहा है, जो खामोशी से अपना काम कर नेपथ्य में चले गए । मंथन का मंच सजा कर समाज और सिस्टम के असरदार लोगों की सोच से दर्शकों का साक्षात्कार कराती रही हैं । 1990 के दशक में प्रसारित आपके The horse's mouth और Let’s Talk शो ने भारतीय टेलीविजन को चर्चित शख्सियतों के इंटरव्यू का नया अंदाज दिया...तो आमने-सामने में आपके तीखे सवालों का देश के ज्यादातर सियासतदानों ने सामना किया। आपकी अगुवाई में बीएजी नेटवर्क ने सामाजिक सरोकार और जागरूकता के संदेश वाले कई कार्यक्रम बनाए तो चुनावी मौसम में नेताओं के चाल, चरित्र और चेहरे को भी रोचक अंदाज में दर्शकों के सामने रखने का सफल प्रयोग किया । अनुराधा प्रसाद भारत में टेलीविजन पत्रकारिता में पहली पीढ़ी की पत्रकार हैं...जिन्होंने अपनी बुलंद सोच और नए-नए शोज से भारतीय टेलीविजन न्यूज़ का चेहरा बदला । अनुराधा प्रसाद भारत को समर्पित एक ऐसी शख्सियत हैं... जो पत्रकारिता के जरिए हमेशा समाज को कुछ नया देने के मिशन में पूरी शिद्दत से जुटी रहती हैं...जुटी हुई हैं और जुटी रहेंगी।

Read More

Anurradha Prasad

अनुराधा प्रसाद के लिए पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं...मिशन है। अपनी साढ़े तीन दशक की टेलीविजन पत्रकारिता में हर तरह का प्रयोग देखा...हर बदलाव की साक्षी रहीं... एक तेज-तर्रार रिपोर्टर से सफल मीडिया उद्यमी बनीं....अपनी तेज नज़र, दूरदर्शी सोच और कलम के दम पर मीडिया जगत में एक दमदार हस्ताक्षर हैं। अनुराधा प्रसाद जी न्यूज़ 24 की एडिटर-इन-चीफ और बीएजी नेटवर्क की सीएमडी हैं  । बतौर टेलीविजन पत्रकार हर भारतीय की आवाज बुलंद करने की ईमानदार कोशिश किया और हमेशा Think First के फलसफे पर आगे बढ़ने में यकीन करती हैं। न्यूज़ 24 पर इतिहास गवाह है...सीरीज के जरिए दर्शकों को अतीत के पन्नों से रू-ब-रू करवाती रही हैं.. तो भारत भाग्य विधाता जैसी सीरिज के जरिए उन संस्थाओं और व्यक्तियों से दर्शकों का परिचय कराया- जो आजाद भारत में लोकतंत्र को  मजबूत और गणतंत्र को बुलंद बनाने में खामोशी से कर्मयोगी की भूमिका में हैं। इसी तरह भारत एक सोच के जरिए वक्त से आगे की सोच से भी दर्शकों का साक्षात्कार कराती रही हैं । ये अनुराधा प्रसाद की मुखर और प्रखर सोच का ही नतीजा है कि न्यूज़ 24 पर माहौल क्या है-कार्यक्रम में आम आदमी की आवाज को  पूरी तवज्जो मिलती है...तो India’s Tiger जैसी टेली सीरीज के जरिए उन गुमनाम जासूसों के योगदान से भी दर्शकों तो मिलवाने का भगीरथ प्रयास हो रहा है, जो खामोशी से अपना काम कर नेपथ्य में चले गए । मंथन का मंच सजा कर समाज और सिस्टम के असरदार लोगों की सोच से दर्शकों का साक्षात्कार कराती रही हैं । 1990 के दशक में प्रसारित आपके The horse's mouth और Let’s Talk शो ने भारतीय टेलीविजन को चर्चित शख्सियतों के इंटरव्यू का नया अंदाज दिया...तो आमने-सामने में आपके तीखे सवालों का देश के ज्यादातर सियासतदानों ने सामना किया। आपकी अगुवाई में बीएजी नेटवर्क ने सामाजिक सरोकार और जागरूकता के संदेश वाले कई कार्यक्रम बनाए तो चुनावी मौसम में नेताओं के चाल, चरित्र और चेहरे को भी रोचक अंदाज में दर्शकों के सामने रखने का सफल प्रयोग किया । अनुराधा प्रसाद भारत में टेलीविजन पत्रकारिता में पहली पीढ़ी की पत्रकार हैं...जिन्होंने अपनी बुलंद सोच और नए-नए शोज से भारतीय टेलीविजन न्यूज़ का चेहरा बदला । अनुराधा प्रसाद भारत को समर्पित एक ऐसी शख्सियत हैं... जो पत्रकारिता के जरिए हमेशा समाज को कुछ नया देने के मिशन में पूरी शिद्दत से जुटी रहती हैं...जुटी हुई हैं और जुटी रहेंगी।

Read More
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola