When Pralhad Joshi Ride A Hydrogen Powered Car: दिसंबर 2025 में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी संसद में टोयोटा मिराई में पहुंचे, जो एक हाइड्रोजन फ्यूल-सेल इलेक्ट्रिक वाहन (FCEV) है. इस ब्लू रंग की कार को देखकर हर कोई चौंक गया था. हालांकि ये कदम 'नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' के तहत क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबल ट्रांसपोर्टेशन को बढ़ावा देने पर सरकार का फोकस को दिखा रहा था.
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कम कार्बन इमिशन
मीडिया से बात करते हुए प्रह्लाद जोशी ने कहा था कि हाइड्रोजन से चलने वाली ये गाड़ी कार्बन उत्सर्जन कम करने के भारत के संकल्प को दिखाती है. उन्होंने ग्रीन हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी में रिसर्च और डेवलपमेंट को सपोर्ट करने के लिए टोयोटा किर्लोस्कर मोटर और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोलर एनर्जी (NISE) के बीच एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर साइन करने का भी ऐलान किया था. उनके मुताबिक, ये पहल देश में क्लीन एनर्जी को अपनाने की स्पीड तेज करने के पीएम नरेंद्र मोदी के विजन को दिखाती है.
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हाइड्रोजन फ्यूल से चलती है
प्रह्लाद जोशी ने बताया था कि टोयोटा मिराई हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चलती है, जिससे ये जीरो-टेलपाइप-एमिशन गाड़ी बन जाती है. आम पेट्रोल या डीजल कारों के उलट, मिराई से निकास के तौर पर सिर्फ वाटर वेपर निकलता है, जिससे एयर पॉल्यूशन कम करने में मदद मिलती है. उन्होंने ये भी बताया कि जापानी शब्द 'मिराई' का मतलब 'फ्यूचर' है, जो एनवायरनमेंट फ्रेंडली मोबिलिटी की अगली पीढ़ी का प्रतीक है.
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टोयोटा मिराई की खासियत
टोयोटा मिराई दुनिया की लीडिंग हाइड्रोजन फ्यूल-सेल सेडान में से एक है और इसमें कई एडवांस्ड फीचर्स हैं, जैसे:-
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- आम इंजन के बजाय हाइड्रोजन फ्यूल-सेल इलेक्ट्रिक सिस्टम से चलती है.
- इससे कोई हार्मफुल टेलपाइप इमिशन नहीं होता, सिर्फ वाटर वेपर निकलता है.
- बहुत कम शोर के साथ शांत और स्मूथ ड्राइविंग का एक्सपीरिएंस देती है.
- पेट्रोल या डीजल गाड़ियों की तरह ही इसे कुछ मिनटों में रिफ्यूल किया जा सकता है.
- पूरे हाइड्रोजन टैंक पर तकरीबन 600–650 किलोमीटर की लंबी ड्राइविंग रेंज देती है.
- एडवांस्ड सेफ्टी टेक्नोलॉजी और प्रीमियम कम्फर्ट फीचर्स से लैस है.
- फॉसिल फ्यूल पर डिपेंडेंसी कम करने में योगदान देती है और क्लीन ट्रांसपोर्टेशन को सपोर्ट करती है.
गडकरी ने क्या कहा था?
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी वैकल्पिक ईंधन की अहमित पर जोर दिया था और बताया था कि भारत हर साल एनर्जी इम्पोर्ट पर तकरीबन 22 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है. उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास और एनर्जी सिक्योरिटी, दोनों के लिए इम्पोर्टेड फ्यूल पर डिपेंडेंसी कम करना जरूरी है.
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