स्कूटर के साथ कंपनी जो टायर देती है, उन्हें उस मॉडल के हिसाब से चुना जाता है. लेकिन जरूरी नहीं कि वही टायर आपकी ड्राइविंग कंडीशन के लिए भी सबसे बेहतर हों. ऐसे में नया टायर खरीदते समय कंपनी की ओर से बताए साइज को जरूर ध्यान में रखना चाहिए. इसके अलावा रबर कंपाउंड, ट्रेड पैटर्न और टायर के निर्माण जैसे कई दूसरे पहलू भी हैं, जो स्कूटर की ग्रिप, माइलेज और राइडिंग पर असर डालते हैं. अगर आप भी स्कूटर के टायर बदलने की तैयारी कर रहे हैं, तो इन बातों को जरूर समझ लें.
सबसे पहले समझें टायर का सही साइज
स्कूटर के लिए सही साइज का टायर चुनना काफी जरूरी है. इससे स्कूटर की परफॉर्मेंस और माइलेज दोनों पर असर पड़ता है. टायर का सही साइज जानने के लिए आपको नए टायर की तलाश में कहीं जाने की जरूरत नहीं है. मौजूदा टायर की साइडवल पर लिखे नंबरों को देखकर आप इसका साइज पता कर सकते हैं.
90/100-10 53J का क्या मतलब है?
मान लीजिए आपके स्कूटर के टायर पर 90/100-10 53J लिखा है. इसमें 90 टायर की चौड़ाई मिलीमीटर में बताता है, जबकि 100 इसकी ऊंचाई का अनुपात है, जो चौड़ाई के प्रतिशत के तौर पर होता है. 10 रिम का साइज इंच में बताता है. वहीं 53 लोड इंडेक्स है, यानी टायर कितना वजन उठा सकता है. 53 लोड इंडेक्स वाले टायर की अधिकतम लोड क्षमता 206 किलोग्राम होती है. आखिर में दिया गया J स्पीड रेटिंग को दर्शाता है. J रेटिंग वाले टायर की अधिकतम स्पीड 100 kmph होती है.
ट्यूबलेस टायर या ट्यूब वाला, कौन बेहतर?
आजकल ज्यादातर स्कूटर्स में ट्यूबलेस टायर देखने को मिलते हैं. इसका एक बड़ा फायदा ये है कि पंचर होने पर इनमें हवा अचानक पूरी तरह बाहर नहीं निकलती. हवा धीरे-धीरे कम होती है, जिससे राइडर को स्कूटर रोककर सुरक्षित जगह पहुंचने का समय मिल जाता है. दूसरी तरफ ट्यूब वाल टायर में अंदर एक अलग ट्यूब होती है और पंचर होने पर हवा तेजी से निकल सकती है. इसलिए रोजना इस्तेमाल के लिए ट्यूबलेस टायर ज्यादा सुविधाजनक और सुरक्षित विकल्प माने जाते हैं.
ट्रेड पैटर्न भी करता है बड़ा फर्क
टायर का ट्रेड पैटर्न सिर्फ डिजाइन के लिए नहीं होता, बल्कि सड़क पर ग्रिप और कंट्रोल में भी इसकी अहम भूमिका होती है. बाजार में सिमेट्रिकल, डायरेक्शनल और असिमेट्रिकल जैसे अलग-अलग ट्रेड पैटर्न मिलते हैं. सिमेट्रिकल पैटर्न वाले टायरों में दोनों तरफ डिजाइन लगभग एक जैसा होता है. ये सामान्य सड़कों पर रोजाना चलाने के लिए अच्छे रहते हैं और समान रूप से घिसते हैं.
बारिश में बेहतर ग्रिप के लिए क्या चुनें?
अगर आपके स्कूटर का इस्तेमाल बारिश या गीली सड़कों पर ज्यादा होता है, तो डायरेक्शनल और असिमेट्रिकल ट्रेड पैटर्न वाले टायर बेहतर ग्रिप और कंट्रोल दे सकते हैं. असिमेट्रिकल टायर में अंदर और बाहर का पैटर्न अलग होता है, जिससे खासकर मोड़ लेते समय स्कूटर को बेहतर तरीके से संभालने में मदद मिलती है.
रेडियल या बायस-प्लाई टायर?
टायर के निर्माण की बात करें तो रेडियल और बायस-प्लाई दो प्रमुख ऑप्शन हैं. बायस प्लाई टायर की साइडवॉल मोटी होती है. ये ज्यादा वजन उठाने में सक्षम होते हैं और सड़क के झटकों को अच्छी तरह सोखते हैं. कम स्पीड पर इनकी ग्रिप भी अच्छी रहती है. वहीं रेडियल टायर चलते समय कम रोलिंग रेजिस्टेंस पैदा करत हैं, जिससे माइलेज बेहतर हो सकता है. ये टायर चलते समय कम रोलिंग रेजिस्टेंस पैदा करते हैं, जिससे माइलेज बेहतर हो सकता है. ये जल्दी गर्म भी नहीं होते, इसलिए इनकी लाइफ भी अच्छी रहती है.
टायर खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
नया टायर खरीदते समय सबसे पहले अपन स्कूटर के लिए कंपनी द्वारा बताए गए साइज को चेक करें. इसके बाद यह देखें कि आपका इस्तेमाल किस तरह का है. रोजाना शहर में चलाने के लिए सामान्य ट्रेड वाला टायर पर्याप्त हो सकता है, जबकि बारिश और गीली सड़कों पर ज्यादा चलाने वालों को बेहतर ग्रिप वाले पैटर्न पर ध्यान देना चाहिए. टायर का सही चुनाव सिर्फ माइलेज ही नहीं, बल्कि स्कूटर की राइडिंग और आपकी सुरक्षा के लिए भी जरूरी है.