Pakeezah Movie Special Screening: मीना कुमारी की ‘पाकीजा’ हिंदी सिनेमा की क्लासिक फिल्म है. साल 1972 में रिलीज हुई इस रोमांटिक म्यूजिकल फिल्म को ऑडियंस ने खूब पसंद किया था और इसकी कहानी हर किसी के दिल में छप गई थी. अब एक बार फिर ये आइकॉनिक फिल्म बड़े पर्दे पर लौटने जा रही है. सेंट्रल लंदन के बीएफआई आईमैक्स में इस फिल्म की स्क्रीनिंग होने जा रही है. वहीं एक महीने पहले ही इस फिल्म के टिकट ‘सोल्ड आउट’ हो गए थे, जिससे पता चलता है कि आज भी इस फिल्म का जादू ऑडियंस के बीच बरकरार है. 54 साल बाद भी इस फिल्म का क्रेज ऑडियंस के बीच कम नहीं हुआ है. चलिए आपको भी बताते हैं इस फिल्म की स्क्रीनिंग कब और कहां होने वाली है.
कब और कहां होगी स्क्रीनिंग?
18 अक्टूबर 2026 को सेंट्रल लंदन में ‘बीएफआई लंदन फिल्म फेस्टिवल’ में इस फिल्म को दिखाया जाएगा. नए 4K रेस्टोरेशन के साथ इस फिल्म की स्क्रीनिंग की जाएगी. मीना कुमारी के फैंस इस खबर से काफी खुश हैं कि वो एक बार फिर इस आइकॉनिक फिल्म को बड़ी स्क्रीन पर देख सकेंगे. कमाल अमरोही के डायरेक्शन में बनी इस क्लासिक फिल्म को 54 साल पूरे हो गए हैं, लेकिन वक्त के साथ इस फिल्म की चमक अभी भी बरकरार है. लेकिन क्या आपको पता है कि इस फिल्म को बनने में 15 साल लगे थे.
फिल्म को बनने में लगे 15 साल
‘पाकीजा’ फिल्म को बनने में 15 साल लगे हैं. इस फिल्म की शूटिंग में हुई देरी के कई कारण रहे हैं. इस फिल्म की शुरुआत साल 1957 में हुई थी. ‘महल’ फिल्म के ब्लॉकबस्टर होने के बाद कमल अमरोही बॉलीवुड के बड़े डायरेक्टर बन गए थे. वहीं मीना कुमारी उस दौरान एक उभरता सितारा थीं और वो बचपन से ही फिल्मों में काम कर रही थीं. कमाल अमरोही और मीना कुमारी के बीच प्यार हुआ और दोनों ने साल 1952 में शादी कर ली थी. कमाल उम्र में मीना से बड़े थे और उनकी 2 शादियां भी हो चुकी थी. वहीं प्यार में कमाल अमरोही मीना कुमारी के लिए ‘पाकीजा’ मूवी बनाना चाहते थे.
तकनीकी बदलाव
कमाल अमरोही की इस फिल्म को पहले तकनीकी बदलाव का सामना करना पड़ा. दरअसल ये फिल्म पहले ब्लैक एंड व्हाइट में बनने जा रही थी. लेकिन कमाल अमरोही ने इस फिल्म को रंगीन फिल्म बनाने का मन बनाया. इसके लिए उन्होंने इस फिल्म को सिनेमास्कोप लेंस में बनाने का फैसला किया. जब फिल्म शुरू की गई तो उन्हें लेंस का फोकस ठीक नहीं लगा जिसके लिए लेंस को रिसर्च के लिए भेजा गया और फिल्म की शूटिंग में देरी हुई.
दोनों के बीच अलगाव
वहीं इसके बाद फिल्म को बनते-बनते इतना टाइम लगा कि साल 1964 आ गया. इस दौरान कमाल और मीना कुमार के बीच अनबन हो गई थी और दोनों अलग हो गए थे. जिसके बाद इस फिल्म को पूरी तरह से रोक दिया गया. वहीं निजी जीवन के तनाव की वजह से मीना कुमारी को शराब की लत लग गई और इसके बाद लगातार उनकी हालत बिगड़ी चली गई. इसके बाद उन्हें लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी भी हो गई थी.
आपसी मतभेद
साल 1968 में कमाल अमरोही ने अपनी अलग रह रही पत्नी मीना कुमारी को एक चिट्ठी भेजी और लिखा कि अब ‘पाकीजा’ को पूरा करना ही बाकी है. लेकिन मीना कुमारी ने कहा कि जब तक उन्हें तलाक नहीं मिलता वो इस फिल्म को नहीं करेंगी. वहीं कमाल भी इस शर्त पर मान गए थे, लेकिन मीना की बीमारी के चलते वो इस फिल्म की शूटिंग नहीं कर पा रही थीं. वहीं इस दौरान कमाल और मीना कुमारी के बीच बातचीत भी नहीं हो रही थी. मीना कुमारी की खास दोस्त नरगिस ने मीना को समझाया था कि कमाल आपका इंतार करते-करते थक गए हैं और वो किसी दूसरी एक्ट्रेस की तलाश में हैं.
संगीतकार का निधन
वहीं इसी बीच फिल्म के मूल संगीतकार गुलाम मोहम्मद का भी निधन हो गया था. जिसके बाद फिल्म का संगीत और बैकग्राउंड म्यूजिक भी अधूरा रह गया था. इसके बाद तो मानों कमाल अमरोही ने इस फिल्म को बनाने की उम्मीद छोड़ ही दी थी. लेकिन बाद में इस फिल्म के म्यूजिक को संगीतकार नौशाद ने पूरा किया.
सुनीत दत्त और नरगिस ने कराई सुलह
सुनीत दत्त और नरगिस की वजह से ही फिल्म पर काम शुरू हो पाया. दरअसल साल 1969 में सुनील दत्त और नरगिस ने कमाल अमरोही और मीना कुमारी की सुलह कराई थी. कमाल और मीना कुमारी को सुनील दत्त और नरगिस ने समझाया था, जिसके बाद इस फिल्म की शूटिंग आगे बढ़ी. मीना कुमारी इस दौरान बेहद कमजोर हो गई थीं और वो काफी बीमार भी थीं, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने इस फिल्म की शूटिंग पूरी की. हालांकि कुछ सीन्स में उनकी ‘बॉडी डबल’ का भी इस्तेमाल किया गया, तब कहीं जाकर फिल्म पूरी हुई.