बिना नेटवर्क भी गाड़ियां करेंगी आपस में बात! क्या है V2V टेक्नोलॉजी जो 2026 में भारत ला रही सरकार
कोहरा हो या तेज रफ्तार, सड़क हादसों की बड़ी वजह अब खत्म होने वाली है. सरकार 2026 तक भारत में ऐसी तकनीक लाने जा रही है, जिसमें गाड़ियां बिना इंटरनेट के एक-दूसरे को खतरे की जानकारी देंगी. यह सिस्टम पीछे से टक्कर, कोहरे में भिड़ंत और हाईवे हादसों को काफी हद तक रोक सकता है.
2026 से बदल जाएगा भारत की सड़कों पर ड्राइविंग का तरीका. (Photo-News24 GFX)
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What Is Vehicle To Vehicle Technology: भारत में सड़क हादसों की बढ़ती संख्या लंबे समय से चिंता का विषय रही है. खासतौर पर कोहरा, तेज रफ्तार और अचानक ब्रेकिंग की वजह से हर साल हजारों जानें चली जाती हैं. अब इस समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार एक ऐसी तकनीक लाने की तैयारी में है, जो बिना मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट के भी गाड़ियों को आपस में “बात” करने लायक बना देगी. इस नई व्यवस्था का नाम है व्हीकल-टू-व्हीकल यानी V2V कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी, जिसे 2026 तक देशभर में लागू करने की योजना है.
क्या है व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) टेक्नोलॉजी
V2V टेक्नोलॉजी एक ऐसी प्रणाली है, जिसमें सड़क पर चल रही गाड़ियां एक-दूसरे से सीधे जानकारी साझा कर सकेंगी. इसमें गाड़ी की रफ्तार, दिशा, दूरी और अचानक हुए बदलाव जैसे ब्रेक लगाने की सूचना पास की दूसरी गाड़ियों तक तुरंत पहुंच जाएगी. इसका मकसद ड्राइवर को पहले ही सतर्क कर देना है, ताकि टक्कर या बड़ा हादसा होने से पहले ही बचाव हो सके.
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बिना नेटवर्क भी करेगा काम
इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे चलाने के लिए मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट की जरूरत नहीं होगी. गाड़ियों में एक छोटा सा डिवाइस लगाया जाएगा, जो देखने में सिम कार्ड जैसा हो सकता है. यह डिवाइस आसपास मौजूद दूसरी गाड़ियों से लगातार सिग्नल भेजेगा और लेगा, जिससे दूरदराज इलाकों में भी यह सिस्टम भरोसेमंद तरीके से काम कर सकेगा.
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Photo- Oleksandr Ponomarenko
कोहरे और खराब मौसम में ड्राइवरों को मिलेगा अलर्ट
सर्दियों में कोहरा और स्मॉग के कारण हाईवे पर विजिबिलिटी लगभग खत्म हो जाती है. ऐसे हालात में V2V टेक्नोलॉजी ड्राइवर को पहले ही अलर्ट कर देगी कि सामने या पीछे कोई गाड़ी बहुत पास आ रही है या सड़क किनारे कोई वाहन खड़ा है. इससे अचानक ब्रेकिंग और पीछे से होने वाली टक्करों को काफी हद तक रोका जा सकेगा.
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हादसों को कैसे कम करेगी यह तकनीक
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी पहले ही संकेत दे चुके हैं कि यह सिस्टम पीछे से होने वाली तेज रफ्तार टक्करों, कोहरे में कई गाड़ियों के एक साथ भिड़ने और खड़ी गाड़ियों से होने वाले हादसों को कम करने में मदद करेगा. खासकर हाईवे पर यह तकनीक ड्राइवर को समय रहते चेतावनी देकर जान बचाने का काम करेगी.
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चारों तरफ से मिलेगा रियल-टाइम अलर्ट
V2V सिस्टम की एक बड़ी ताकत इसका 360 डिग्री कम्युनिकेशन है. गाड़ी को आगे, पीछे और दोनों तरफ से आने वाली गाड़ियों की जानकारी मिलेगी. इसमें सुरक्षित दूरी बनाए रखने का अलर्ट, पास की गाड़ी के अचानक ब्रेक लगाने की सूचना, सड़क किनारे खड़े वाहनों की चेतावनी और पीछे से तेज रफ्तार में आती गाड़ियों का संकेत शामिल होगा. इससे शहर की भीड़भाड़ वाली सड़कों और हाईवे दोनों पर ड्राइविंग ज्यादा सुरक्षित हो सकेगी.
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Photo- itskrs
ADAS के साथ भी करेगा तालमेल
यह तकनीक एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम यानी ADAS के साथ मिलकर काम करेगी. फिलहाल कुछ महंगी SUVs में कैमरा और सेंसर आधारित सेफ्टी फीचर्स मिलते हैं. V2V उनके ऊपर एक और सुरक्षा परत जोड़ देगा, जिससे गाड़ियां आपस में सीधे संवाद कर पाएंगी और खतरे की जानकारी और जल्दी मिलेगी.
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कब से लागू होगी यह व्यवस्था
सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार, V2V टेक्नोलॉजी को 2026 के अंत तक अधिसूचित किया जा सकता है. शुरुआत में यह सिस्टम नई गाड़ियों में लगाया जाएगा, इसके बाद धीरे-धीरे बाकी वाहनों में भी इसे शामिल किया जाएगा. इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 5,000 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है, हालांकि आम लोगों को इसकी कीमत कितनी चुकानी होगी, इसका खुलासा अभी नहीं हुआ है.
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अन्य सुरक्षा उपायों पर भी काम
V2V के साथ-साथ सरकार बसों की सुरक्षा बढ़ाने पर भी जोर दे रही है. पुरानी बसों में फायर एक्सटिंग्विशर, इमरजेंसी हैमर और ड्राइवर की थकान पहचानने वाले सिस्टम लगाए जाएंगे. इन कदमों का मकसद यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना और सड़क हादसों में होने वाले नुकसान को कम करना है.
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V2V टेक्नोलॉजी भारतीय सड़कों पर ड्राइविंग का तरीका बदल सकती है. अगर यह योजना तय समय पर लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में सड़क हादसों में बड़ी कमी देखी जा सकती है.
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About the Author
Mikita Acharya
मिकिता आचार्यNews24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है.
अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया.
साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं.
कितने साल का अनुभव: 6+
योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी
पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत