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क्या गर्मी में सफेद कार के मुकाबले काली कार ज्यादा गर्म होती है? जान लें सही फैक्ट

गर्मी में धूप में खड़ी कार में बैठते ही पसीना क्यों छूट जाता है? क्या काली कार सच में सफेद कार से ज्यादा गर्म होती है या यह सिर्फ लोगों की सोच है? जानिए रंग, ग्रीनहाउस इफेक्ट और कार के इंटीरियर का तापमान पर क्या असर पड़ता है, साथ ही गर्मियों में कार को ठंडा रखने के आसान उपाय.

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Black vs White Car Heat: जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, वैसे-वैसे धूप में खड़ी कार में बैठना किसी सजा से कम नहीं लगता. ऐसे में अक्सर लोगों के मन में एक सवाल उठता है क्या काली कार सच में सफेद कार से ज्यादा गर्म होती है? या यह सिर्फ एक आम धारणा है? अगर आप भी नई कार खरीदने की सोच रहे हैं या अपनी कार के रंग को लेकर असमंजस में हैं, तो रंग और तापमान के बीच का यह सीधा संबंध समझना जरूरी है.

क्या काली कारें सच में ज्यादा गर्म होती हैं?

सरल शब्दों में कहें तो हां, काली कारें आमतौर पर ज्यादा गर्म होती हैं. इसकी वजह वैज्ञानिक है. काला रंग सूरज की रोशनी और इंफ्रारेड किरणों को ज्यादा मात्रा में सोख लेता है. जब धूप कार की बॉडी पर पड़ती है, तो काला रंग ज्यादातर ऊर्जा को एब्जॉर्ब करके उसे गर्मी में बदल देता है. इसके उलट, सफेद या हल्के रंग की कारें सूरज की किरणों का बड़ा हिस्सा वापस रिफ्लेक्ट कर देती हैं. यही कारण है कि एक जैसी परिस्थितियों में काली कार की बाहरी सतह सफेद कार से ज्यादा गर्म महसूस होती है.

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केबिन का तापमान क्यों बढ़ जाता है?

कार के अंदर का तापमान सिर्फ बाहरी रंग से तय नहीं होता. असली खेल ग्रीनहाउस इफेक्ट का है. जब धूप कार की खिड़कियों से अंदर जाती है, तो डैशबोर्ड, सीट और बाकी सतहें गर्म हो जाती हैं. ये गर्मी अंदर ही फंसी रहती है, जिससे केबिन का तापमान तेजी से बढ़ता है. रिसर्च बताती है कि समान हालात में काली कार का इंटीरियर सफेद कार से कुछ डिग्री ज्यादा गर्म हो सकता है. हालांकि, अंदर इस्तेमाल किए गए मटीरियल और रंग का भी बड़ा असर पड़ता है. अगर केबिन में गहरे रंग की सीटें और डैशबोर्ड हैं, तो वे हल्के रंग की तुलना में ज्यादा गर्मी सोखते और देर तक संभालकर रखते हैं.

रंग से ज्यादा क्या मायने रखता है?

अक्सर लोग सिर्फ बाहरी पेंट को दोष देते हैं, लेकिन कई बार केबिन का डिजाइन और मटीरियल ज्यादा फर्क डालते हैं. अगर कार के अंदर का इंटीरियर हल्के रंग का है और अच्छी क्वालिटी का फैब्रिक या लेदर इस्तेमाल हुआ है, तो तापमान थोड़ा कम महसूस हो सकता है. यानी सिर्फ कार का रंग ही नहीं, बल्कि अंदर की बनावट भी अहम भूमिका निभाती है.

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गर्मी में कार को ठंडा रखने के आसान तरीके

अगर आपकी कार धूप में ज्यादा गर्म हो जाती है, तो कुछ आसान उपाय मदद कर सकते हैं. कोशिश करें कि गाड़ी को छांव में पार्क करें. विंडशील्ड पर सनशेड लगाएं ताकि सीधी धूप अंदर न जाए. टिंटेड ग्लास भी तापमान कम करने में मददगार होते हैं. कार में बैठने से पहले कुछ मिनट के लिए खिड़कियां खोल दें, ताकि अंदर की गर्म हवा बाहर निकल सके. इसके अलावा, अच्छा एयर कंडीशनिंग सिस्टम और वेंटिलेटेड सीटें भी सफर को आरामदायक बना सकती हैं.

आखिर में, यह कहना गलत नहीं होगा कि काली कार धूप में ज्यादा गर्म होती है, लेकिन सही देखभाल और कुछ समझदारी भरे कदम उठाकर आप किसी भी रंग की कार में गर्मी का असर कम कर सकते हैं.

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First published on: Mar 03, 2026 02:46 PM

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About the Author

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत

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