2030 तक 30% ईवी अपनाने से तेल आयात में 60 अरब डॉलर की बचत हो सकती है: TERI
वैश्विक संकट और महंगा तेल EV की ओर रुख बढ़ा रहे हैं। तेजी से बढ़ती मांग के बीच इलेक्ट्रिक वाहन भारत को कम खर्च, कम आयात और ज्यादा आत्मनिर्भरता की राह पर ले जा रहे हैं।
Edited By : Ankit Dubey|Updated: Apr 29, 2026 18:53
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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तनाव के चलते भले ही सरकार ने पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और गैस की सप्लाई को सामान्य बताकर लोगों को शांत कर दिया हो, लेकिन घबराहट का माहौल अभी भी देखने को मिल रहा है। इतना ही नहीं, नितिन गडकरी भी साफ कह चुके हैं कि भारत में भविष्य पेट्रोल-डीजल वाहनों का नहीं है। ऐसे में साफ है कि अब ऑटो इंडस्ट्री और सरकार दोनों तेजी से पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों पर काम कर रही हैं। साथ ही रेटिंग एजेंसी ICRA और द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट (TERI) की तरफ से भी बयान कुछ बयान सामने आए हैं।
इतना ही नहीं, रेटिंग एजेंसी ICRA के सीनियर अधिकारी प्रशांत वशिष्ठ ने बताया कि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद पेट्रोल-डीजल के दाम ज्यादा नहीं बढ़ाए गए। इससे तेल कंपनियों (OMCs) की कमाई पर असर पड़ रहा है और अगर कच्चे तेल की कीमत 120–125 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो पेट्रोल पर 14 रुपये और डीजल पर 18 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान हो सकता है।
ऐसे में सवाल यही है कि जो लोग इलेक्ट्रिक गाड़ियों को खरीदने से कतरा रहे हैं, क्या उन्हें अब इलेक्ट्रिक कारों की तरफ ध्यान देने की जरूरत है? तो इसका जवाब है - हां। क्योंकि अब लोग इलेक्ट्रिक गाड़ियों के प्रति जागरूक हो रहे हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि Vahan की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इलेक्ट्रिक कारों का मार्केट शेयर 3.5 प्रतिशत से बढ़कर फरवरी में 5.1 प्रतिशत हो गया है और साल-दर-साल के हिसाब से इलेक्ट्रिक वाहनों के रजिस्ट्रेशन में करीब 68 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है।
द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट (TERI) के निदेशक अलेख्या दत्ता ने कहा, “हालिया वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति झटके (पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण) इस बात की याद दिलाते हैं कि भारत को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। परिवहन क्षेत्र का विद्युतीकरण एक रणनीतिक और व्यावहारिक दोनों ही दृष्टि से आवश्यक है, क्योंकि यह जीवाश्म ईंधन आयात पर निर्भरता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अध्ययनों के अनुसार, 2030 तक 30% ईवी अपनाने से हर साल लगभग 60 अरब अमेरिकी डॉलर के तेल आयात की बचत हो सकती है। इस ईवी ग्रोथ को अधिक स्मार्ट और स्वच्छ बिजली प्रणालियों के साथ समर्थन देना जरूरी है। सौर ऊर्जा से जुड़े ईवी चार्जिंग सिस्टम पीक ग्रिड लोड में 28–35% तक कमी और ग्रिड उपयोग में 40–70% तक सुधार ला सकते हैं। इसके अलावा, ईवी अतिरिक्त सौर ऊर्जा के कारण होने वाली कम खपत की समस्या को कम करने में मदद कर सकते हैं और V2G के माध्यम से ग्रिड को लचीलापन भी प्रदान कर सकते हैं।
https://www.youtube.com/watch?v=w_8QhesnlCk
भारत के पास ईवी ट्रांजिशन को वितरित नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के साथ जोड़ने का एक अनोखा अवसर है। यही रास्ता कम लागत, अधिक मजबूती और वास्तविक ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर ले जाता है।”
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तनाव के चलते भले ही सरकार ने पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और गैस की सप्लाई को सामान्य बताकर लोगों को शांत कर दिया हो, लेकिन घबराहट का माहौल अभी भी देखने को मिल रहा है। इतना ही नहीं, नितिन गडकरी भी साफ कह चुके हैं कि भारत में भविष्य पेट्रोल-डीजल वाहनों का नहीं है। ऐसे में साफ है कि अब ऑटो इंडस्ट्री और सरकार दोनों तेजी से पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों पर काम कर रही हैं। साथ ही रेटिंग एजेंसी ICRA और द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट (TERI) की तरफ से भी बयान कुछ बयान सामने आए हैं।
इतना ही नहीं, रेटिंग एजेंसी ICRA के सीनियर अधिकारी प्रशांत वशिष्ठ ने बताया कि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद पेट्रोल-डीजल के दाम ज्यादा नहीं बढ़ाए गए। इससे तेल कंपनियों (OMCs) की कमाई पर असर पड़ रहा है और अगर कच्चे तेल की कीमत 120–125 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो पेट्रोल पर 14 रुपये और डीजल पर 18 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान हो सकता है।
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ऐसे में सवाल यही है कि जो लोग इलेक्ट्रिक गाड़ियों को खरीदने से कतरा रहे हैं, क्या उन्हें अब इलेक्ट्रिक कारों की तरफ ध्यान देने की जरूरत है? तो इसका जवाब है – हां। क्योंकि अब लोग इलेक्ट्रिक गाड़ियों के प्रति जागरूक हो रहे हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि Vahan की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इलेक्ट्रिक कारों का मार्केट शेयर 3.5 प्रतिशत से बढ़कर फरवरी में 5.1 प्रतिशत हो गया है और साल-दर-साल के हिसाब से इलेक्ट्रिक वाहनों के रजिस्ट्रेशन में करीब 68 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है।
द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट (TERI) के निदेशक अलेख्या दत्ता ने कहा, “हालिया वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति झटके (पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण) इस बात की याद दिलाते हैं कि भारत को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। परिवहन क्षेत्र का विद्युतीकरण एक रणनीतिक और व्यावहारिक दोनों ही दृष्टि से आवश्यक है, क्योंकि यह जीवाश्म ईंधन आयात पर निर्भरता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अध्ययनों के अनुसार, 2030 तक 30% ईवी अपनाने से हर साल लगभग 60 अरब अमेरिकी डॉलर के तेल आयात की बचत हो सकती है। इस ईवी ग्रोथ को अधिक स्मार्ट और स्वच्छ बिजली प्रणालियों के साथ समर्थन देना जरूरी है। सौर ऊर्जा से जुड़े ईवी चार्जिंग सिस्टम पीक ग्रिड लोड में 28–35% तक कमी और ग्रिड उपयोग में 40–70% तक सुधार ला सकते हैं। इसके अलावा, ईवी अतिरिक्त सौर ऊर्जा के कारण होने वाली कम खपत की समस्या को कम करने में मदद कर सकते हैं और V2G के माध्यम से ग्रिड को लचीलापन भी प्रदान कर सकते हैं।
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भारत के पास ईवी ट्रांजिशन को वितरित नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार के साथ जोड़ने का एक अनोखा अवसर है। यही रास्ता कम लागत, अधिक मजबूती और वास्तविक ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर ले जाता है।”