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Surya Grahan 2026: क्यों लगता है सूर्य ग्रहण, कब, कहां और कैसा दिखेगा साल का पहला ग्रहण? जानें पूरा टाइम टेबल

Surya Grahan Date and Time: अगले कुछ दिनों में दुनिया साल के पहले सूर्य ग्रहण की साक्षी बनने जा रही है। नासा के अनुसार, साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण मंगलवार 17 फरवरी लग रहा है। आइए जानते हैं, सूर्य ग्रहण क्यों और कैसे लगता है और कब, कहां और कैसे दिखेगा। आइए जानते हैं पूरा टाइम टेबल।

Author Written By: Shyamnandan Updated: Feb 13, 2026 15:38
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Photo Credit: NASA's Goddard Space Flight Center

Surya Grahan Date and Time: अगले कुछ दिनों में दुनिया एक बार फिर आकाश के दुर्लभ नजारे की साक्षी बनने जा रही है। नासा (NASA) के अनुसार, मंगलवार 17 फरवरी, 2026 को सूर्य ग्रहण लग रहा है। यह साल 2026 का पहला ग्रहण है, जो एक एन्यूलर यानी वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse) होगा। यह घटना भारत में दिखाई नहीं देगी, लेकिन खगोलीय रूप से बेहद महत्वपूर्ण रहेगी। आइए जानते हैं, सूर्य ग्रहण क्यों और कैसे लगता है? भारत क्यों दिखाई नहीं देगा? कहां और कैसे दिखेगा? आइए जानते हैं पूरा टाइम टेबल।

कैसे लगता है सूर्य ग्रहण?

सूर्य ग्रहण एक विशेष खगोलीय संयोग है। यह तब होता है जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी लगभग एक सीधी रेखा में आ जाते हैं। इस स्थिति में चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है। चंद्रमा सूर्य की रोशनी को रोक देता है। उसकी छाया पृथ्वी पर गिरती है। जहां यह छाया पड़ती है, वहां से सूर्य का पूरा या कुछ हिस्सा छिपा हुआ दिखाई देता है। इसे ही सूर्य ग्रहण कहते हैं।

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सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या के दिन ही होता है। क्योंकि इसी दिन चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के एक ही ओर होता है। दिन के समय आकाश में मौजूद चंद्रमा जब सूर्य के सामने आता है, तब ग्रहण की स्थिति बनती है।

सूर्य ग्रहण के प्रकार

नासा (NASA) के अनुसार सूर्य ग्रहण चार प्रकार के होते हैं और हर प्रकार की अपनी अलग विशेषता है। ये हैं:

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1. पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse)

    यह सबसे रोमांचक रूप है। इसमें चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है। कुछ समय के लिए दिन में अंधेरा सा छा जाता है। जो लोग चंद्रमा की गहरी छाया के केंद्र में होते हैं, वे इसे देख पाते हैं। इस दौरान सूर्य का कोरोना भी दिख सकता है। कोरोना सूर्य का बाहरी वायुमंडल है, जो सामान्य दिनों में नजर नहीं आता।

    2. वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse)

      इस बार 17 फरवरी को यही ग्रहण लगेगा। इसमें चंद्रमा सूर्य के सामने आता तो है, लेकिन पृथ्वी से काफी दूर होता है। दूरी ज्यादा होने से वह आकार में छोटा दिखता है। वह सूर्य के बीच का हिस्सा ढक लेता है, लेकिन किनारे खुले रहते हैं। इससे सूर्य के चारों ओर आग की अंगूठी जैसा चमकदार घेरा बनता है। इसी कारण इसे रिंग ऑफ फायर भी कहा जाता है।

      3. आंशिक सूर्य ग्रहण (Partial Solar Eclipse)

        जब तीनों खगोलीय पिंड एकदम सीध में नहीं होते, तब चंद्रमा सूर्य का केवल कुछ भाग ढक पाता है। सूर्य का आकार कटा हुआ सा दिखाई देता है। जो लोग पूर्ण या वलयाकार ग्रहण के मुख्य मार्ग से बाहर होते हैं, उन्हें यही रूप दिखाई देता है।

        4. हाइब्रिड सूर्य ग्रहण (Hybrid Solar Eclipse)

          यह दुर्लभ घटना है। पृथ्वी गोल है और उसकी सतह वक्र है। ऐसे में कभी कभी ग्रहण का रूप स्थान के अनुसार बदल जाता है। कहीं यह पूर्ण दिखता है, तो कहीं वलयाकार। इसी मिश्रित रूप को हाइब्रिड ग्रहण कहा जाता है।

          Photo Credit: NASA’s Goddard Space Flight Center

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          17 फरवरी को कौन सा सूर्य ग्रहण है?

          17 फरवरी 2026 को वलयाकार सूर्य ग्रहण लगेगा। वैज्ञानिक भाषा में यह तब होता है जब चंद्रमा अपनी कक्षा के उस हिस्से के पास होता है जहां वह पृथ्वी से सबसे अधिक दूर होता है। इस बिंदु को ‘अपोजी’ (Apogee) कहा जाता है। दूरी अधिक होने से चंद्रमा का व्यास छोटा दिखता है। वह सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता। परिणामस्वरूप रिंग ऑफ फायर का मनमोहक दृश्य बनता है।

          भारत में क्यों नहीं दिखाई देगा सूर्य ग्रहण?

          इस बार भारत के लिए निराशा है। 17 फरवरी 2026 का ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। नासा (NASA) के विजिबिलिटी मैप के अनुसार ग्रहण का मुख्य मार्ग पृथ्वी के दक्षिणी छोर से गुजर रहा है। चंद्रमा की छाया भारत तक नहीं पहुंचेगी। भारत सहित एशिया और उत्तरी गोलार्ध के अधिकांश हिस्सों में यह घटना अदृश्य रहेगी। हालांकि खगोलीय समय भारतीय समय के अनुसार दर्ज रहेगा।

          कहां दिखाई देगा रिंग ऑफ फायर?

          अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसार यह ग्रहण दक्षिणी गोलार्ध के निचले हिस्सों से गुजरते हुए खास तौर पर अंटार्कटिका क्षेत्र में स्पष्ट दिखाई देगा। इस ग्रहण का सबसे शानदार दृश्य अंटार्कटिका में देखने को मिलेगा। बर्फ से ढका यह महाद्वीप रिंग ऑफ फायर का मुख्य साक्षी बनेगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि वहां इंसानों से ज्यादा पेंगुइन इस दृश्य को देखेंगे।

          सूर्य ग्रहण का वलयाकार रूप अंटार्कटिका और दक्षिणी महासागर के कुछ हिस्सों में साफ दिखेगा। जबकि, आंशिक ग्रहण दक्षिण अफ्रीका, चिली, अर्जेंटीना, मेडागास्कर और मॉरीशस के दक्षिणी इलाकों में नजर आएगा। वहां सूर्य का कुछ भाग ढका हुआ दिखेगा।

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          17 फरवरी 2026 सूर्य ग्रहण का टाइम टेबल

          हालांकि, भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, फिर भी भारतीय समयानुसार इसकी खगोलीय घटनाएं इस प्रकार रहेंगी:

          आंशिक ग्रहण की शुरुआत: दोपहर बाद 03:26 PM बजे
          वलयाकार ग्रहण की शुरुआत: शाम 05:12 PM बजे
          अधिकतम ग्रहण: शाम 05:42 PM बजे
          ग्रहण का अंत: रात 07:57 PM बजे

          कितनी देर रहेगा रिंग ऑफ फायर?

          17 फरवरी, 2026 के सूर्य ग्रहण के अधिकतम चरण में सूर्य का 96% भाग ढका रहेगा। फिर भी पूरी तरह अंधेरा नहीं होगा। इस सूर्य ग्रहण में ‘रिंग ऑफ फायर[ का दृश्य बहुत सीमित क्षेत्र में ही बन पाएगा। अलग-अलग स्थानों पर यह लगभग 2 मिनट 20 सेकंड तक बनी रहेगी। आपको बता दें, अंटार्कटिका में उस समय सूर्य क्षितिज से महज 5 से 10 डिग्री ऊपर रहेगा, जिससे बर्फीले मैदानों पर यह नजारा बेहद आकर्षक और लुभावना दिखेगा।

          कैसे देखें सूर्य ग्रहण?

          वलयाकार ग्रहण को कभी भी नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए। इसके बारे में नासा के नियम बहुत सख्त हैं। क्योंकि, सूर्य का किनारा खुला रहता है। उसकी तेज किरणें आंखों के रेटिना को नुकसान पहुंचा सकती हैं। देखने के लिए ISO 12312-2 प्रमाणित सोलर फिल्टर वाले चश्मे का उपयोग करना जरूरी है। साधारण काला चश्मा या एक्सरे फिल्म सुरक्षित नहीं होते हैं। टेलिस्कोप या कैमरे से देखने पर भी विशेष सोलर फिल्टर जरूरी है। बिना फिल्टर के देखने से स्थायी आंख क्षति हो सकती है।

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          First published on: Feb 13, 2026 03:38 PM

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