Skanda Sashti 2026: कार्तिकेय भगवान को समर्पित स्कंद षष्ठी का व्रत हर महीने शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है. अप्रैल में वैशाख माह की स्कंद षष्ठी का व्रत आज 22 अप्रैल को मनाया जा रहा है. स्कंद षष्ठी पर भगवान शिव और माता पार्वती के बड़े बेटे कार्तिकेय की पूजा की जाती है. उनका एक नाम स्कंद है इसलिए इसे स्कंद षष्ठी कहते हैं. स्कंद षष्ठी व्रत करना संतान की प्राप्ति और पारिवारिक जीवन में सुख-शांति के लिए बेहद शुभ माना जाता है.
स्कंद षष्ठी व्रत शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:21 – 05:05
प्रातः सन्ध्या- सुबह 04:43 – 05:49
विजय मुहूर्त- दोपहर 02:30 – 03:22
गोधूलि मुहूर्त- शाम 06:50 – 07:12
सायाह्न सन्ध्या- शाम 06:51 – 07:57
अमृत काल – रात 12:57 – 02:26
स्कंद षष्ठी व्रत पूजा विधि
स्कंद षष्ठी व्रत पर सुबह उठने के बाद स्नान कर साफ वस्त्र पहनें. इसके बाद सूर्य को अर्घ्य दें. घर के पूजा स्थान की सफाई करें. चौकी स्थापित कर कपड़ा बिछाकर भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा लगाएं. पंचामृत से अभिषेक करें. इसके बाद कुमकुम, अक्षत और चंदन का तिलक कर फूलमाला अर्पित करें. भगवान के समक्ष घी का दीपक जलाएं. मंत्रों का जाप करें और आरती करें. कार्तिकेय भगवान को फलों और मिठाई का भोग लगाएं.
स्कंद षष्ठी मंत्र
ॐ शारवाना-भावाया नमः।
ज्ञानशक्तिधरा स्कंदा वल्लीईकल्याणा सुंदरा।
देवसेना मनः काँता कार्तिकेया नामोस्तुते।
ॐ सुब्रहमणयाया नमः।
ॐ तत्पुरुषाय विधमहे: महा सैन्या धीमहि तन्नो स्कन्दा प्रचोद्यात:
कार्तिकेय भगवान की आरती
जय जय आरती वेणु गोपाला
वेणु गोपाला वेणु लोला
पाप विदुरा नवनीत चोरा
जय जय आरती वेंकटरमणा
वेंकटरमणा संकटहरणा
सीता राम राधे श्याम
जय जय आरती गौरी मनोहर
गौरी मनोहर भवानी शंकर
सदाशिव उमा महेश्वर
जय जय आरती राज राजेश्वरि
राज राजेश्वरि त्रिपुरसुन्दरि
महा सरस्वती महा लक्ष्मी
महा काली महा लक्ष्मी
जय जय आरती आन्जनेय
आन्जनेय हनुमन्ता
जय जय आरति दत्तात्रेय
दत्तात्रेय त्रिमुर्ति अवतार
जय जय आरती सिद्धि विनायक
सिद्धि विनायक श्री गणेश
जय जय आरती सुब्रह्मण्य
सुब्रह्मण्य कार्तिकेय
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