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Kudali Reading Tips: कुंडली में हैं यदि ये योग, आप भी बन सकते हैं मशहूर तांत्रिक और गुप्त विद्या एक्सपर्ट

Kudali Reading Tips: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली के कुछ खास ग्रह योग ग्रह-नक्षत्रों का प्रभाव व्यक्ति को गुप्त विद्या और तंत्र साधना की ओर आकर्षित करते हैं. आइए जानते हैं, कुंडली के किस योग योग से व्यक्ति तांत्रिक बनते हैं?

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Kudali Reading Tips: वैदिक ज्योतिष एक विलक्षण शास्त्र है, विशेष कर अध्ययन और विद्या प्राप्ति की भविष्यवाणी के संबंध में यह लाजवाब है. कुंडली देखकर यह बहुत से प्रीडिक्ट यानी बताया जा सकता है कि किसी व्यक्ति को किस विषय में रुचि होगी या वह किस विषय में पारंगत यानी एक्सपर्ट होगा. ज्योतिष शास्त्र यह कहता है कि कुछ लोग प्रसिद्ध ज्योतिष और तांत्रिक के रूप में जाने हैं. यह वाकई में उस व्यक्ति की कुंडली के ग्रहों, नक्षत्रों और राशियों के योग संयोग के कारण होता है. आइए जानते हैं, किसी व्यक्ति का झुकाव तांत्रिक और गुप्त विद्या के प्रति क्यों हो जाता है?

अष्टम भाव का बलवान होना

कुंडली के अष्टम यानी आठवें को भाव को गुप्त विद्या, तंत्र-मंत्र, रहस्य और मृत्यु की बाद के घटनाओं का घर माना गया है. जब इस भाव के स्वामी यानी अष्टमेश बलवान होते हैं या इस भाव में कोई बेहद बलवान ग्रह बैठा होता है या इस भाव पर किसी बेहद बली ग्रह की दृष्टि होती है, तो यह भाव शक्तिशाली और बेहद सक्रिय होता है. ऐसे में लोगों की रुचि अक्सर तंत्र-मंत्र और गुप्त विद्या के प्रति होती है.

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राहु-केतु और शनि

इस भाव में केतु या राहु ग्रह का विराजमान होना व्यक्ति को एक ऊंचे दर्जे का तांत्रिक बनाता है. जब शनि का अष्टम भाव से संबंध होता है, व्यक्ति गहरी आध्यात्मिक और तांत्रिक शक्तियों को प्राप्त करता है.

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चंद्रमा की स्थिति

चंद्रमा दवाइयों और मंत्रों के कारक ग्रह भी हैं. जब चंद्रमा कुंडली के तीसरे, पांचवें, सातवें या ग्यारहवें भाव में अकेले विराजमान होते हैं, तो यह देखा गया है कि व्यक्तिगुप्त विद्या, जैसे- मंत्र प्रयोग और औषधियों के ज्ञान में निपुणता प्राप्त करता है.

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शक्ति की साधना

जब कुंडली के पंचम भाव याने बुद्धि और साधना के घर में सूर्य स्थित होते हैं या इस भाव पर सूर्य की पूर्ण दृष्टि यानी दोष रहित सप्तम दृष्टि होती है, तो व्यक्ति को तंत्र साधना में शक्ति की उपासना में रुचि होती है और वह एक शाक्त तांत्रिक बनता है.

दशमेश और शनि का संयोग

जब कुंडली के दशमेश यानी दशम भाव के स्वामी के साथ शनि ग्रह की युति बनती है, तो व्यक्ति का प्रबल झुकाव तामसिक साधनाओं आर तांत्रिक प्रक्रियाओं की ओर होता है.

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आपको बता दें, तंत्र साधना का एक मौलिक सिद्धांत यह है कि इन कुंडली में इन योगों के उपस्थित रहने के बावजूद के एक योग्य गुरु का मार्गदर्शन निहायत जरूरी है, क्योंकि तंत्र साधना न केवल क्लिष्ट यानी अति-कठिन प्रक्रिया है, बल्कि इसमें विचलन बहुत अधिक होता है, व्यक्ति का मानसिक संतुलन हमेशा के लिए बिगड़ सकता है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: May 11, 2026 07:29 PM

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About the Author

Shyamnandan

श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.

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